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नीमच में आदिवासी युवक की नृशंस हत्या के पीछे भाजपा कार्यकर्ताओं का हाथ: कांतिलाल भूरिया
मध्यप्रदेश में आदिवासी जनजाति और दलितों पर अत्याचार के नए रिकॉर्ड पर कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। एक भील आदिवासी युवक को पिकअप वाहन से बांधकर घसीटने की लोमहर्षक घटना पर कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा नियुक्त जांच समिति के अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने आज एक पत्रकार वार्ता में खुलासा किया कि बाणदा में कन्हैया भील उर्फ कान्हा को चोरी के मिथ्या आरोप में पिकअप वाहन से घसीट कर मार डालने वाले लोग भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं।
केवल गांव में अपनी धौंस जमाने के लिए और लोगों में भय का वातावरण बनाने के लिए रची गई इस घटना में प्रशासन और सरकार के लोगों का आचरण अपराधियों के पक्ष में था, ऐसा गांव के लोगों ने बताया है। लोगों ने तो यहां तक बताया कि मृतक को जब अस्पताल ले जाया गया तब पुलिस उसके घर चोरी की जांच करने भी पहुंच गई थी। चारों तरफ आपदाओं से घिरे इस गांव में ना तो कोई मूलभूत सुविधा है, ना ही पक्का मार्ग। गांव के जिस फलिया में मृतक का परिवार रहता है, वह 75 आदिवासी परिवारों की बस्ती है। ना ही वहां बिजली है ना ही कोई पक्का मकान और ना ही वहां किसी ग्रामीण को अब तक आवास योजना का लाभ दिया गया है। यह स्पष्ट है कि मुख्य आरोपी महेंद्र गुर्जर भारतीय जनता पार्टी का समर्थक है, उसकी पत्नी वर्तमान में सरपंच है और इस परिवार के लोग विगत 20 वर्षों से ग्राम पंचायत बाणदा के सरपंच पद पर हैं। मुख्य आरोपी पर वर्तमान सरपंच पति स्थानीय विधायक जावद एवं मंत्री का समर्थक होने के कारण ग्रामीणों को कार्यवाही होने पर संशय है। प्रशासन पर सरकार का दबाव है। परिवार एवं ग्रामीण जन भयभीत हैं।जांच समिति के सदस्यों ने पुलिस अधीक्षक नीमच से मिलकर परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर कार्यवाही करने एवं उन्हें सख्त सजा देने की मांग करते हुए कहां है कि मृतक का परिवार उजड़ गया है तथा उसका मात्र 2 वर्ष का एक बच्चा है, इसलिए मृतक के परिवार को एक आवास तथा परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी और एक करोड़ रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाये। भूरिया ने सरकार को चेताया कि भय का वातावरण बनाने के लिये मध्य प्रदेश के आदिवासी समाज पर भाजपाईयों के हमले प्रदेश के लिये कलंकित करने वाले हैं। आदिवासी समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। प्रदेश में चाहे बलात्कार हो, चाहे ठगी, चाहे प्रशासनिक लालफीताशाही, उसका सर्वाधिक शिकार आदिवासी समाज को बनाया जा रहा है।श्री भूरिया ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने आदिवासियों के एक लाख रूपये तक का कर्जा माफ कर, दस हजार तक की आर्थिक सहायता और सूदखोरों के जाल से मुक्त कर आदिवासी वर्ग में आत्मविश्वास पैदा किया था। आदिवासियों के महापुरुषों के स्मारक बनाने और विश्व आदिवासी दिवस पर अवकाश घोषित कर आत्म सम्मान का वातावरण बनाया था। परंतु शिवराज सरकार ने उस वातावरण को चौपट कर दिया है। आदिवासी स्कूलें बंद की जा रहीं हैं, ताकि आदिवासी शिक्षित न हो सकें। शिवराज सरकार में यह सब लंबे समय तक नहीं चलेगा।श्री भूरिया ने कहा कि पूरे प्रदेश में भाजपा नेता अपनी ठसक बनाने के लिये गरीबों, दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों पर अत्याचार कर रहे हैं। बाणदा में कन्हैया भील को घसीटकर हत्या करने की घटना इस बात का प्रमाण है।




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