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भारत बचाओ दिवस पर श्रमिकों-किसानों का प्रदर्शन- निकली रैलियाँ
देश के मान्यता प्राप्त 10 केन्द्रीय श्रमिक संगठन, केंद्र, राज्य, बैंक, बीमा, बीएसएनएल, रक्षा उद्योगों समेत तमाम औद्योगिक महासंघ के आह्वान पर आज देशभर के साथ सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में आज भारत बचाओ दिवस मनाया गया। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दिन आज का यह अभियान केंद्र सरकार द्वारा देश की संपदा को कौड़ियों के मोल बेचे जाने व जनविरोधी कानून लागू करने के खिलाफ है।
ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चा द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि आज इस अवसर पर भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर, उज्जैन, सतना, रीवा, उमरिया, सिंगरौली, सीधी, बालाघाट, कटनी, गुना, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, रतलाम, नीमच, बिरसिंहपुर पाली, पाथाखेड़ा, पेंच कनहान आदि समेत 30 से अधिक स्थानों पर श्रमिकों ने संयुक्त प्रदर्शन किए। कई स्थानों पर किसान व मजदूरों की साझी रैलिया निकाली गई। भोपाल में नीलम पार्क में हुए प्रदर्शन को एटक के एस एस मौर्या, सीटू के पूषन भट्टाचार्य, एआईयूटीयूसी के विनोद लुगारिया, इंटक के रामराज तिवारी, बैंक कर्मचारी नेता व्ही के शर्मा, बीमा कर्मचारी नेता मुकेश भदौरिया, किसान नेता प्रह्लाद बैरागी प्रमुख ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि यह अत्यंत खेद जनक है कि वर्तमान केंद्र सरकार को कई पत्र और ज्ञापन दिए जाने के बावजूद ट्रेड यूनियनों से उनकी मांगों पर सरकार द्वारा कोई चर्चा तक नहीं की जा रही है। अपितु बगैर उचित चर्चा के, कोरोना काल का सहारा लेकर श्रम कानूनों को एकतरफा तौर पर समाप्त कर श्रम संहिताओं के जरिए श्रमिक विरोधी कई प्रावधान थोप दिए गए है। ठीक इसी तरह बगैर किसान संगठनों से चर्चा के तीन कृषि विरोधी कानूनों को उनपर थोप दिया गया है। आज आम जनता पेट्रोल-डीजल समेत सभी आवश्यक वस्तुओं की महंगाई के तले दबी जा रही है। कोरोना काल में श्रमिकों के रोजगार व रोजी रोटी के भीषण संकट के बावजूद कोई राहत तक नहीं दी जा रही है। देश की संपदा, तमाम सार्वजनिक क्षेत्रों को विनिवेशीकरण व निजीकरण के नाम पर बेचा जा रहा है।
इस मौके पर प्रदेश के राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर 11 सूत्रीय माँगपत्र दिया गया। इन मांगों में मजदूर विरोधी काली श्रम संहिताएं, किसान विरोधी तीन कृषि कानून और बिजली संशोधन अध्यादेश को रद्द करने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सभी फसलों के लिए सी-2(फसल की वास्तविक लागत अर्थात बीज, खाद, सिंचाई, बिजली, श्रम और कृषि जमीन का किराया) + 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़ उसके आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय कर उसके खरीद की गारंटी सुनिश्चित करने, पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस समेत आम उपयोग की वस्तुओं की मूल्यवृद्धि पर रोक लगाने और बढ़ाई गई कीमतों को वापस करने, कोरोना महामारी व लॉकडाउन के कारण हुई नौकरी से छटनी और वेतन कटौती को वापस लेने, सभी प्रवासी और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का पंजीकरण करने, नए रोजगार पैदा करने, छंटनी, वेतन कटौती पर प्रतिबंध लगाने, सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र में रिक्त पदों को तुरंत भरने, कैजुअल, ठेका, असंगठित मजदूरों तथा योजना कर्मियों सहित सभी श्रेणी के मजदूरों को न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा तथा पेंशन की गारंटी दिए जाने, मनरेगा पर बजट आवंटन में वृद्धि कर 600 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी के साथ कम से कम 200 दिन काम सुनिश्चित किए जाने, शहरी रोजगार गारंटी योजना लागू करने, मनरेगा में काम एवं भुगतान पर जाति आधारित भेदभावपूर्ण सुझाव प्रस्ताव को वापस लेने, सभी गैर-आयकरदाता परिवारों के बैंक खातों में प्रति माह 7500 रुपये भेजना सुनिश्चित किए जाने, महामारी के संकट के पूर्ण समाधान होने तक प्रत्येक परिवार को प्रतिमाह प्रति व्यक्ति 10 किलो निःशुल्क अनाज उपलब्ध किए जाने, देश के सभी नागरिकों को तत्काल सार्वभौमिक निःशुल्क वैक्सीन लगाए जाने, वर्तमान कारपोरेट समर्थक वैक्सीन नीति को रद्द करने, कोरोना में मारे गए नागरिकों के परिवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार मुआवजा देने, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6 प्रतिशत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटित कर सभी स्तरों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को और मजबूत किए जाने, बढ़ती कोविड महामारी से लड़ने के लिए आवश्यक स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती सहित स्वास्थ्य ढाँचा, अस्पताल व उनमें पर्याप्त बिस्तर, ऑक्सीजन और अन्य चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित किए जाने, सभी स्वास्थ्य और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और आशा और आंगनवाड़ी कर्मियों सहित महामारी-प्रबंधन कार्य में लगे सभी के लिए बीमा कवरेज के साथ सुरक्षात्मक गियर, उपकरण आदि की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने, सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी विभागों के निजीकरण और विनिवेश को रोकने, क्रूर आवश्यक प्रतिरक्षा सेवा अध्यादेश को वापस लिए जाने, सड़क परिवहन कर्मचारियों के 20 माह के बकाया वेतन का अविलंब भुगतान किया जाए। प्रतिमाह वेतन भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की मांगे शामिल है।




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