अश्लील कविता, महिला के अंगों की आपत्तिजनक प्रस्तुति

साहित्य, कला और संस्कृति के नाम पर स्त्री अंगों को लेकर लिखी गई कविता को साहित्य जगत में बेहद अश्लील माना जा रहा है। इस कविता की शिकायत प्रदेश के संस्कृति मंत्री ऊषा ठाकुर को की गई है। कविता भारत भवन के प्रशासनिक अधिकारी प्रेमशंकर शुक्ला की है। शुक्ला के कविता संग्रह प्रेम की कविता में मीठी पीर के नाम से एक कविता है जिसे लेकर सोशल मीडिया पर विवाद हुआ है।

कविता है…..

मीठी पीर

(कंचन)जंघाएँ अलसाई पड़ी हैं
योनि जागती है
सुख की तलब में

मथे गये उरोज में
उठ रही है
मीठी पीर

नाभि में जो उठ रहा है
उसी को बुदबुदा रहे हैं
होठ

साथ चली गलियों की
तलवों में
गुदगुदी है

कोयल की पुकार में
रह-रहकर
रात गड़ती है।

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