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अजा-अजजा पर आयोजित वेबिनार का एडीजीपी ने किया समापन
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अजाक श्री राजेश गुप्ता ने आज अजाक पुलिस मुख्यालय से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के प्रति संवेदनशीलता पर दो दिवसीय राजस्तरीय वेबिनार का समापन किया। श्री गुप्ता ने प्रतिभागी विवेचक अधिकारियों को कहा कि पुलिस का काम केवल इन प्रकरणों की विवेचना करना ही नहीं है बल्कि राहत प्रकरणों का यथाशीध्र-यथोचित निराकरण कराकर पीडि़त पक्ष को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाना भी है। उन्होंने कहा कि इन वर्गों के लिये योजना और कानूनों में जो परिवर्तन होते है उनसे अघतन करना भी इस वेबिनार का उद्देश्य है।
एडीजीपी श्री गुप्ता ने कहा कि यह कार्यशाला कमजोर वर्ग के प्रति आपकी संवेदनशीलता को बढ़ाकर आपको और अधिक क्षमतावान बनाने में सहायक होगी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इस प्रशिक्षण को प्राप्त किया है उनका दायित्व है कि वह इसका लाभ अपने मातहतों और साथियों तक पहुंचाये।
वेबिनार में आज प्रथम सत्र में अधिवक्ता श्री रजनीश बरैया ने न्यायालय में विचारण के दौरान परिलक्षित होने वाली अनुसंधान की कमियों के संबंध में उद्बोधन दिया। श्री बरैया ने बताया कि प्रकरण में एक्ट की जिन धाराओं को लगाया जाता है, उन धाराओं के संबंध में एक्ट का अध्ययन जरूर करें। अनावश्यक साक्ष्य अपनी विवेचना में सम्मिलित न करें। विवेचना में टेक्नीकल व मेडीकल साक्ष्य महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है, उस पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही बताया कि फरियादी के बताये अनुसार एफआईआर लिखना हमारी जिम्मेदारी है परन्तु विवेचना में सत्यता लाना विवेचक के ऊपर निर्भर करता है। व्याख्यान के पश्चात प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षणार्थियों एवं पुलिस अधीक्षक अजाक द्वारा विवेचनाओं व पर्यवेक्षण में आने वाली समस्याओं का समाधान भी श्री बरैया द्वारा इस वेबिनार के माध्यम से किया गया।
वेबिनार के दूसरे सत्र में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भोपाल श्री राजेश सिंह भदौरिया ने –‘’अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत अपराध दर्ज करना तथा अनुसंधान के दौरान की जाने वाली सामान्य त्रुटियां एवं उसका निराकरण’’ विषय पर सारगर्भित उद्बोधन देते हुए बताया कि एफआईआर लिखने से लेकर चालान पेश होने तक कौन-कौन सी गलतियों होती हैं, जिनका लाभ अपराधी को मिलता है। उन्होंने स्वतंत्र साक्ष्य संकलन की आवश्यकता और उसके वैधानिक महत्व पर प्रकाश डाला। जप्ती, मेमोरेंडम, पूछताछ एवं भौतिक साक्ष्य संकलन के संबंध में सीआरपीसी में विहित प्रक्रिया और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों के साथ ही विभागीय निर्देशों के बारे में विस्तार से समझाते हुए कहा कि नियम-निर्देशों का पालन करके ही निष्पक्ष और प्रभावी अनुसंधान किया जा सकता है। प्रथम सूचना संक्षिप्त हो सकती है, किन्तु वह स्पष्ट और सारगर्भित होना चाहिए। यह अपराधियों को दंडित करने का आधार बनता है। उन्होंने अधिनियम की विभिन्न जटिलताओं को समझाते हुए प्रतिभागियों से मैदानी स्तर में आने वाली समस्याओं पर विस्तृत चर्चा भी की
इस दो दिवसीय सेमीनार का संचालन सहायक पुलिस महानिरीक्षक (अजाक) श्री संजीव कंचन द्वारा किया गया। कार्यक्रम के संचालन में श्री एच.एल. शर्मा ने विशेष सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर अजाक शाखा के समस्त अधिकारी / कर्मचारियों भी मौजूद थे।




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