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ऑनलाइन “शाम ए ग़ज़ल “: ग़ज़ल गायिका तापसी ने देशभक्ति की नज़्म पेश की
मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के अंतर्गतगमक ( कला विविधताओं की प्रस्तुतियां) के तहत 15 जुलाई को शाम ऑनलाइन “शाम ए ग़ज़ल ” कार्यक्रम आयोजित किया गया । कार्यक्रम का लाइव प्रसारण मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल पर किया गया ।
शाम ए ग़ज़ल कार्यक्रम के प्रारंभ में मशहूर ग़ज़ल गायिका तापसी नागराज ने अपने संगतकारों लोकेश मालवीय एवं श्रीधर नागराज के साथ मिल कर चकबस्त की देशभक्ति से पूर्ण मशहूर नज़्म
ये हिन्दोस्तां है हमारा वतनमोहब्बत की आँखों का तारा वतन
पेश की। उसके बाद उन्होंने फै़ज़ का कलाम
तेरे ग़म को जाँ की तलाश थीतेरे जाँ निसार चले गए एवं अमीर ख़ुसरो का कलाम
खुसरो रैन सुहाग की
एवं मिर्ज़ा ग़ालिब की मशहूर ग़ज़ल
दर्द मिन्नत कशे दवा न हुआमैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ
पेश कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर किया।
तापसी नागराज की प्रस्तुति के पश्चात भोपाल के मशहूर ग़ज़ल गायक याक़ूब मलिक ने मिर्ज़ा ग़ालिब की मशहूर ग़ज़ल
दिले नादां तुझे हुआ क्या है आख़िर इस दर्द की दवा क्या है
तथा डॉ. इकराम अकरम की ग़ज़ल
मैंने कहा क़रीब आ उसने कहा नहीं नहीं मैंने कहा कि मान जा, उसने कहा नहीं नहीं
एवं डॉ. बशीर बद्र की मशहूर ग़ज़ल ख़ुदा हमको ऐसी ख़ुदाई ने कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे
पेश कर श्रोताओं से ख़ूब तालियाँ बटोरीं। कार्यक्रम के अंत में अकादमी की निदेशक डाॅ नुसरत मेहदी ने तमाम श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया। इस कार्यक्रम का सफ़ल संचालन इफ्तिख़ार अय्यूब ने किया।




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