आशाओं की अनिशिचतकालीन हडताल 31 वें दिन भी जारी

आशा उषा आशा सहयोगी संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर जीने लायक वेतन की मांग को लेकर प्रदेश भर में जारी अनिश्चितकालीन हडताल एवं प्रदर्शन आज 31 वें दिन भी जारी है। हडताल के दौरान सभी जिलों में आशाओं का प्रदर्शन जारी है साथ साथ हडताल को महीने भर होने के बाद भी सरकार के मुख्या- मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिह और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्य प्रदेश के मुख्या मिशन संचालक के खिलफ  आशा एवं सहयोगियों में आक्रोश भी बढ रही है। यह दोनों मुख्या आशाओं के शोषण के खिलाफ, वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के प्रति मौन साधे हुये है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुये आशाओं के नेताओं ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियानों में निचले स्तर पर अति महत्वपूर्ण काम कर रही है, लेकिन सरकार आशाओं की उपेक्षा कर रही है। कोरोना संक्रमण काल में आशाओं ने अपनी जान को जोखिम मों डाल कर जी जान से काम किया। लेकिन सरकार आशों के वेतन बढाने के सम्बन्ध में एक शब्द भी नही बोल रही है। वक्ताओं ने कहा कि आशाओं के प्रति सरकार की यह रवैया कतई मंजूर नही। सरकार की रवैया अगर नही बदला तो आंदोलन और तेज करने के लिये आशा एवं सहयोगी मजबूर होंगे।  2000 रुपये का अल्प वेतन में आशाओं का शोषण, महिलाओं के प्रति सरकार का नजरिये का भी सूचक है, जिसे स्वीकार नही किया जा सकता।

विभाग की मुख्या अपनी बात से मुकर गये, अब आशा का नाम लिखने के लिये इंकार

आशा कार्यकर्ता राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान को निचले स्तर पर आम जनता के बीच चलाने वाले मुख्य कार्यकर्ता है। सहयोगी उनका मार्गदर्शन करती है। बाकी सभी कर्मचारी व अधिकारी उनके द्वारा किये गये काम की आंकडा इकत्रित कर सरकार को देते है। काम करने वाली आशा को सरकार केवल 2000 रुपये वेतन दे रही है। वेतन वृद्धि की मांग को लेकर महीने भर से चल रही आशाओं की हडताल के प्रति सरकार तो खामोश है, लेकिन उससे भी शर्मनाक बात यह है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का मुख्या, मिशन संचालक अपने खुद के हस्ताक्षर से जारी पत्र में आशाओं का नाम तक लेने से इंकार कर रही है। मैदान में काम कर रही असली कार्यकर्ताओं के प्रति विभाग का यह रैवया चिंताजनक है।

24 जून को प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के सामने प्रतिनिधिमंडल से मिशन संचालक ने स्पष्ट रूप से कहा था कि आपका प्रमुख मांग निश्चित वेतन की है, यह जायज है, हाना भी चाहिये। मै आशाओं के लिये विभाग की ओर से 10,000 रुपये का वेतन का प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजेगी और इसकी प्रति यूनियनों को भी दी जावेगी। जब सहयोगियों के सम्बन्ध में सवाल रखा तो उन्होंने कहा कि इसके अनुरूप उनके वेतन वृद्धि को भी प्रस्ताव में शामिल करेगी। इस बात को 25 जून को समाचार पत्रों में प्रमुखता से छपी। लेकिन अब मिशन संचालक खुद अपनी बात से मुकर रही है और आशाओं के सम्बन्ध में कोई भी प्रस्ताव सरकार को भेजने से इंकार कर रही है। 28 जून को दिन रात प्रदर्शन के बाद 29 जून को सीहोर एवं रायसेन से निकाले गये पदयात्राओं को में रोके जाने के बाद प्रशासन की पहल पर फिर मिशन संचालक से मिले प्रतिनिधिमंडल को बताया कि कल सुबह (30 जून को)पत्र मिल जायेगा, लेकिन शाम तक इंतजार के बाद दिये पत्र में आशाओं के वेतन के सम्बन्ध में कोई उल्लेख तक नही किया। सम्भव है कि इसके लिये मिशन संचालक पर किसी का कोई दबाव हो, लेकिन मिशन संचालक का यह रवैया उनके अधीन में काम कर रही आशाओं के हितों के खिलाफ तो है ही, इसके साथ साथ उनकी खुद की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न चिन्ह है।

आशा ऊषा आशा सहयोगी संयुक्त  मोर्चा के नेतागण श्रीमति लक्ष्मी कौरव एवं ए टी पदमनाभन ने प्रदेश भर की आशा एवं सहयोगियों से सरकार की ओर से आशाओं के वेतन में वृद्धि किये जाने तक हडताल जारी रखने की अपील की है।

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