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बक्स्वाहा के जंगल बचाने हेतु 26 से 30 जून तक चलेगा हरित सत्याग्रह
बक्स्वाहा के जंगल बचाने हेतु प्रशासन द्वारा अनशन की अनुमति निरस्त करने पर आज गूगल मीट पर चर्चा कर बक्स्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन ने 26 से 30 जून तक जिले में हरित सत्याग्रह का ऐलान किया है। हरित सत्याग्रह के पहले दिन जिले के गांधी आश्रम में स्थित गांधी की प्रतिमा के सामने जिला प्रशासन की तानाशाही के खिलाफ सुवह 11 से शाम 5 तक उपवास किया जाएगा फिर उक्त विषय पर शहर के अन्य प्रबुद्ध नागरिकों से संवाद स्थापित किया जाएगा। हरित सत्याग्रह के माध्यम से 26 से 30 जून के दौरान वृक्षारोपण, रक्तदान, स्वच्छता अभियान आदि रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बक्सवाहा के जंगल बचाने का संदेश व अपील की जाएगी।
कार्यक्रम में पर्यावरण बचाओ अभियान के शरद कुमरे, बुंदेलखंड के आंदोलनकारी युवा समाजसेवी अमित भटनागर, किसान नेता दिलीप शर्मा, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक वा राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता सदाचारी सिंह तोमर किसान यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वर चंद्र त्रिपाठी, पर्यावरणविद बीनू बघेल, ज्योति वर्मा, आफताब आलम हाशमी आदि वैज्ञानिक, पर्यावरणविद, सामाजिक चिंतक सहित देश के विरुद्ध पर्यावरण प्रेमी शिरकत कर रहे है।
बक्स्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन के प्रवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने बताया कि बक्स्वाहा के जंगल को बचाने हेतु सरकार में संवेदना जागृत करने व सरकार से सार्थक संवाद हेतु, बक्सवाहा जंगल बचाओ आंदोलन द्वारा छतरपुर के छत्रसाल चौक पर 26 से 30 जून पांच दिवसीय अनशन की अनुमति जिला प्रशासन से मांगी थी, आवेदन में अनशन के दौरान पूर्णतः शांतिप्रिय व कोविड – 19 की गाइडलाईन के पालन करने का लिखित आश्वासन भी दिया गया था, पर प्रशासन ने अपना तानाशाही पूर्ण रवैया दिखाते हुए हमारे शांतिपूर्ण अनशन की अनुमति को निरस्त कर दिया था, जिसके बाद शुक्रवार को बक्स्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन के द्वारा लगभग 2 घंटे चली गूगल मीट में बक्सवाहा के जंगल बचाने हेतु हरित सत्याग्रह चलाने की सहमति तथा आंदोलन की आगामी रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ। चर्चा के दौरान सभी सदस्यों ने प्रशासन की इस तानाशाही का मकूल जवाब देने की बात कही तथा कहा कि जंगल की रक्षा करना हमारा कर्तव्य भी है और अधिकार भी कोई भी हमें हमारे कर्तव्य अधिकारों को पालन से रोक नहीं सकता, हमने प्रशासन व सरकार से सार्थक संवाद का प्रयास किया, और आगे भी हम सरकार से संवाद के हर संभव प्रयास करते रहेंगे, और सरकार अगर हम से संवाद नहीं करना चाहती तो हम जनता से संवाद स्थापित करेंगे, क्योंकि लोकतंत्र में जनता ही सबसे बड़ी शक्ति है, हम इसी जनशक्ति को जागृत कर अपने बक्सवाहा के जंगल को बचाएंगे।




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