सीटू के राष्ट्रीय 10 दिवसीय अभियान सम्पन्न

आज सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स(सीटू) के राष्ट्रीय 10 दिवसीय अभियान के अंतिम दिन प्रदेश में सीटू की इकाईयों ने स्थानीय प्रशासन- संभागीय कमिश्नर, जिला कलेक्टर, एसडीएम,  तहसीलदार आदि के जरिये प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, नीमच, सीहोर, सतना, शहडोल, उमरिया, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, सिंगरौली, गुना, अशोकनगर, मुरैना समेत अनेकों स्थानों पर सीटू कार्यकर्ताओं ने स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपे।

      कोविड के दूसरे लहर के चलते उन श्रमिकों व मेहनतकशों पर दोहरी मार पड़ी है, जो पहले दौर मेँ लॉक डाउन और साथ ही सरकार की मजदूर किसान विरोधी नीतियों के चलते हुए हमलो के चलते बुरी तरह से प्रभावित हुए। मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की क्रूर असंवेदनशीलता तब और बढ़ जाती है जब हम देखते हैं कि इस अवधि के दौरान, जब मजदूर वर्ग और पूरे मेहनतकश लोग कोविड महामारी और उससे जुड़े लॉकडाऊन के विनाशकारी प्रभाव से जूझ रहे थे, तब भाजपा सरकार ने अपनी बर्बरता को और तेज कर अपने श्रम संहिताओं और कृषि कानूनों के माध्यम से उन पर हमला तेज कर दिया है। यह इसी अवधि के दौरान है कि वह अपने विनाशकारी निजीकरण की मुहिम के जरिये देश को बिक्री करना चाहता है। इन सबका उद्देश्य हमारे देश की संपदा का उत्पादन करने वाले हमारी मेहनतकश जनता, श्रमिकों और किसानों की कीमत पर कॉर्पोरेट मुनाफे की रक्षा और वृद्धि करना है। इसी अवधि के दौरान उसने अपनी नीतियों के सभी विरोधों और प्रतिरोधों को दबाने के लिए हमारी जनता के बुनियादी मानवीय और संवैधानिक अधिकारों पर अपने हमलों को तेज कर दिया है।

      सरकार के इन हमलों के खिलाफ 1 जून से 10 जून तक देशव्यापी अभियान चलाया गया। आज इसी के तहत प्रधानमंत्री के नाम 15 सूत्रीय माँगपत्र सौंपा गया।

      माँगपत्र में मांग की गई है की वर्तमान जनविरोधी कारपोरेट परस्त वैक्सीन नीति समाप्त कर एक निश्चित समय सीमा में देश के सभी लोगों के लिये सार्वभौमिक वैक्सीनेशन के लिये केन्द्र सरकार कानूनी कदम उठाये जावें। नये निजी क्षेत्र के साथ सार्वजनिक क्षेत्र की वैक्सीन निर्माण कम्पनियों को भी वैक्सीन उत्पादन के काम में शामिल कर उत्पादन बढाये। केन्द्र सरकार घरेलू उत्पादकों व विदेशी उत्पादकों से वैक्सीन प्राप्त कर एक निश्चित समय सीमा में देश के सभी नागरिकों के नि:शुल्क वैक्सीनेशन की जिम्मेदारी ले। कोविड महामारी के उफान व सम्भावित तीसरी लहर से मुकाबला करने हेतु समुचित अस्पताल, आक्सीजन युक्त पलंग, वैन्टीलेटर, दवाओं के पुख्ता इंतजाम किये जावे। सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाया जावे तथा उसके लिये जरूरी फंड, स्वास्थ्य कर्मियों (डाक्टर,नर्स, कम्पाउन्डर, वार्ड बाय आदि) की बडे पैमाने पर भर्ती की जावे। आपदा प्रबंधन कानून के तहत लाक डाउन, कोरोना कर्फ़्यू आदि लगाने के किसी भी आदेश में सभी प्रबंधकों, नियोजकों को छंटनी, वेतन कटौती, आवास खाली कराने जैसे कदम न उठाने के सख्त निर्देश शामिल किये जावे। पेशागत स्वास्थ्य व सुरक्षा पर बनी श्रम संहिता में समाहित कर लिये गये अन्र्तराज्यीय प्रवासी कामगार कानून 1979 को पुन: बहाल करो। चारों काली श्रम संहितायें, तीनों काले कृषि कानून व विद्युत अध्यादेश वापस लो। कोरोना का प्रभाव रहने तक (संभावित तीसरी, चौथी लहर को दृष्टिगत रखते हुए) सभी गैर आयकरदाता परिवारों को 7500 रुपया प्रति माह नगद राशि तथा प्रति व्यक्ति प्रतिमाह 10 किलोग्राम अनाज नि:शुल्क दिया जावे।सभी सरकारी अस्पतालों में गैर कोविड मरीजों को भी प्रभावशाली इलाज मुहैया कराया जावे। कोरोना महामारी से मुकाबला करने में लगे सभी फ्रंट लाइन वर्करों (आंगनवाडी, आशा आशा सहयोगी) अन्य कर्मियों को सुरक्षा उपकरण, मास्क, पीपीर्ई किट आदि मुहैया कराने के साथ व्यापक बीमा कवच प्रदान किया जावे। केन्द्र व राज्य सरकारों के विभागों में खाली पड़े पदों पर भर्ती की जावे तथा बड़ी संख्या में वर्षों से कार्यरत सभी संविदाकर्मी दैनिक वेतनभोगी कार्यभारित आंगनवाड़ी, आशा-ऊषा सहयोगिनी, मध्यान्ह भोजनकर्मियों सहित तमाम योजनाकर्मियों को संबंधित विभागों का नियमित सरकारी कर्मचारी बनाकर वेतन व सूविधायें दी जावें। म.प्र. में न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण का काम तुरन्त शुरू कर न्यूनतम 21000 रुपये वेतन करो। सेल्स प्रमोशन एम्पलाईज एक्ट के स्वतंत्र अस्तित्व व स्वरूप में परिवर्तन करना बंद कर इसके सभी प्रावधानों के सुनिश्चित अमल के निर्देश जारी करो। सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र की उत्पादन इकाईयों में जारी ठेका पद्धति समाप्त कर सभी को नियमित श्रमिक बनाकर उन्हें वेतन, भत्ते  व अन्य  सुविधाओं सहित कल्याण योजनाओं का लाभ दिया जावे श्रमकानूनों का पालन करते हुए उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा के प्रावधानों का सख्ती से पालन कराया जावे। कोरोना अवधि में मारे गये श्रमिकों, कर्मचारियों को 50 लाख रुपया दिये जाने की योजना का लाभ दी जावे।ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में कार्यरत लाखों ड्रायवर्स, कंडक्टर्स, हेल्पर्स की सेवाओं, वेतन, सुरक्षा सहित इलाज के पुख्ता इंतजाम करने के साथ काम के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होने पर 50 लाख का बीमा कवरेज व उनके परिजनों के सुनिश्चित रोजगार की व्यवस्था करो। कोरोना महामारी से मुकाबला करने में इनकी अग्रणीय भूमिका के लिए उन्हें भी कोरोना योद्धा मान कर सभी अधिकार व सुरक्षा प्रदान की जावे तथा लॉकडाऊन के कारण हुई वेतन हानि की भरपाई राज्य सरकारें अपने खजाने से करायें। मॉडल मंडी एक्ट वापस लो तथा कृषि उपज मंडियों में कार्यरत सभी हम्माल, पल्लेदारों को 21 हजार रुपये मासिक की सुनिश्चित आमदनी, कल्याण योजनाओं का लाभ देने के साथ सभी क्षेत्रों में कार्यरत हम्माल, पल्लेदारों के लिए श्रमिक कल्याण मंडल की तरह कल्याण मंडल बनाकर उस जैसी सभी कल्याण योजनायें लागू करो।

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