मप्र मानव अधिकार आयोग ने मानव अधिकार हनन के चार मामलों में प्रतिवेदन मांगा

पिछले 15 महीने के दौरान कोरोना के वायरस ने मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को धराशायी करते हुये लगभग 8 लाख लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। इनमें से 8 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई। इस दौरान कुछ शहरों के सरकारी अस्पतालों में आनन- फानन में कोरोना के इलाज की व्यवस्था हो गई, लेकिन जिला अस्पतालों से लेकर कस्बों में तक स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत अभी भी बहुत खराब है। इस तरह की चार घटनाओं पर राज्य मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान लेकर संबंधितों से प्रतिवेदन मांगा है।

प्रदेश के मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालात बदतर होने तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और उप स्वास्थ्य केन्द्र सहित जिला अस्पताल में भी वेंटिलेटर, आईसीयू और पर्याप्त डाॅक्टरों का इंतजाम नहीं होने की खबरें संज्ञान में लेकर आयोग ने यह कार्रवाई की है। आयोग ने कहा कि अब, जब तीसरी लहर की आशंका व्यक्त की जा रही है, तो जरूरी है कि ग्रामीण स्तर तक स्वास्थ्य सुविधाएं जल्द दुरूस्त की जायें, ताकि लागों को समय पर अपने आसपास ही इलाज की बेहतर सुविधा मिल सके। समाचार पत्र में प्रदेश के विभिन्न जिलों से प्रकाशित ग्राउंड रिपोर्ट में दिये गये तथ्यों पर आयोग द्वारा स्वयं संज्ञान लेकर प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया गया है। आयोग ने इस मामले में प्रमुख सचिव, म.प्र. शासन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, मंत्रालय तथा आयुक्त/संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल से मामले की जांच कराकर की गई कार्यवाही का दो सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने इन अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने प्रतिवेदन में यह स्पष्ट करें किः-
(1) क्या उपयोग हेतु तैयार स्वास्थ्य केन्द्रों पर पीड़ित मरीजों के इलाज की सुविधाएं तत्काल प्रारंभ कराये जाने की अपेक्षा उनका केवल औपचारिक शुभारंभ के इंतजार में उपयोगहीन रखते हुए ऐसे पीड़ित मरीजों को प्राप्त हो सकने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रखा जाना अनुमत है ?
(2) क्या पीड़ित मरीजों को उचित और प्रभावी स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने के मौलिक/मानव अधिकारों की अपेक्षा केवल ऐसे भवन के शुभारंभ/उद्घाटन के इंतजार में उसे उपयोगहीन बनाये रखना उचित है ?
(3) समाचार पत्र में बताये गये उप स्वास्थ्य केन्द्र, गांव बरखेड़ी, जिला रायसेन, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बदनावर, जिला धार, उप स्वास्थ्य केन्द्र बेलसरा, जिला अनूपपुर, जिला चिकित्सालय रायसेन के नवनिर्मित 14 बेड के आईसीयू वार्ड, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अटेर, जिला भिण्ड के संबंध में दिये गये तथ्यों के संबंध में स्पष्ट जानकारी भेजें।

वैक्सीनेशन सेंटर मंे महिला वार्ड अध्यक्ष ने मनाया जन्मदिन
 इन्दौर शहर के 
सदर बाजार स्थित वैक्सीनेशन सेंटर पर बीते शनिवार को जहां आम लोग वैक्सीन लगवाने कतार में लगे थे, वहीं दूसरी तरफ एक राष्ट्रीय राजनैतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपनी महिला वार्ड अध्यक्ष का जन्मदिन मना लिया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने सेंटर पर ही बिना मास्क के महिला वार्ड अध्यक्ष से केक कटवाया और केक खाते हुये जमकर शोर-शराबा भी किया। यहां दीवार पर स्थानीय विधायक के पोस्टर भी लगे थे। नाराज लोगों ने इसपर घोर आपत्ति ली। आयोग ने इस मामले में स्वयं संज्ञान लेकर प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है और कमिश्नर, इंदौर तथा पुलिस महानिरीक्षक, इंदौर से दो सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है।
83 साल का वृद्ध माफियाओं के सामने लाचार, पुलिस नहीं कर रही माफियाओं पर कार्यवाही
छतरपुर जिले के 
हिनौता थानाक्षेत्र पुलिस के संरक्षण में रेत माफिया आम आदमी की सम्पत्ति को कुचलने में लगा है। यहां 83 साल का एक वृद्ध पिछले कई महीनों से अपने खेत की सुरक्षा के लिये पुलिस से गुहार लगा चुका, मगर पुलिस मदद के लिये हाथ नहीं बढा रही। वृद्ध का आरोप है कि पुलिस उनके उपर ही शिकायतें वापस लेने का दबाव बनाती है। वृद्ध ने न केवल पुलिस को लिखित श्किायत दी है, बल्कि मुख्यमंत्री शिकायत प्रकोष्ठ में भी शिकायत दर्ज कराई है। तमाम कोशिशों के बावजूद वृद्ध को न्याय नहीं मिल रहा। हिनोता थाना क्षेत्र के ग्राम हथौहा निवासी गंगाप्रसाद मिश्र बताते हैं कि केन नदी में बने पुल के पास खसरा नं. 714/2 रकबा 0.729 हेक्टेयर उनके स्वामित्व की जमीन है। उनके बेटे बाहर नौकरी करते हैं। इसलिये वह घर में अकेले हंै। इस उम्र में अब खेतों तक जाना कठिनाई भरा कार्य है। इसी का फायदा उठाकर स्वामित्व की जमीन से रात में रेत माफिया अवैध उत्खनन करते हैं। उनके खेत से बिना किसी  अनुमति के रेत माफियाओं ने रास्ता बना लिया है। वे बताते हैं कि पुलिस को अवैध उत्खनन के बारे में जानकारी होने के बावजूद उनके द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जाती। रेत माफिया पुल के नीचे ही लिफ्टर लगाकर नदी से रात में रेत निकालते हंै। वृद्ध ने बताया कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद पुलिस और राजस्व विभाग से कोई सहयोग नहीं मिला। शिकाायत होने पर अधिकारी आते हैं और मामला शांत करने का दबाव बनाते हैं। आयोग ने इस मामले में कमिश्नर, सागर तथा पुलिस महानिरीक्षक, सागर से जांच कराकर की गई कार्यवाही का 15 दिन में तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा है।
पूछताछ के लिये लाये बुजुर्ग की मौत के बाद हंगामा, तीन पुलिस जवान लाइन अटैच
कच्ची शराब के
 लिये पुलिस द्वारा पूछताछ के लिये लाने के बाद एक बुजुर्ग मौत होने से उसके परिजनों ने पुलिस की पिटाई से मौत का आरोप लगाया है। हंगामे के बाद थाने के तीन कांस्टेबल को लाईन अटैच कर दिया है। मामले में एसडीओपी जावरा जांच कर रहे हैं। रतलाम जिले के बडावदा थाने के तीन पुलिसकर्मी कच्ची शराब बेचने की शंका में ठिकरिया गांव के प्रम सिंह को पूछताछ के लिये थाने ले गये थे। करीब 1 घंटे बाद बडावदा थाने के तीन जवान दो बाईक से आये और प्रेम को उसके घर के बाहर छोडकर चले गये। घर पर उस समय उसकी  पत्नी और बच्चे ही थे। प्रेमसिंह की पत्नी ने उसकी तबीयत खराब होने की सूचना अपने रिश्तेदारों को दी। पत्नी और रिश्तेदार उसे लेकर बडावदा अस्पताल पहुंचे, जहां से उनको जावरा रेफर किया गया था। परिजनों का आरोप है कि उसकी मौत पुलिस की पिटाई से हुई है। एसपी रतलाम ने तीनों पुलिसकर्मियों को लाईन अटैच करर विभागीय जांच के आदेश दिये हंै। आयोग ने इस मामले में उप पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी), रतलाम से जांच कराकर की गई कार्यवाही का 15 दिन में आवश्यक दस्तावेजात सहित तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने डीआईजी रतलाम को निर्देशित किया है कि मृतक की शव परिक्षण रिपोर्ट थाना बडावदा के रोजनामचा रजिस्टर में इंद्राजों की संबंधित अवधि की प्रतियां, आरोपी पुलिसकर्मियों के नाम आदि समस्त सुसंगत जानकारी प्रतिवेदन के साथ भेजी जाये।

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