आयोग ने एसपी छतरपुर से दो सप्ताह में मांगा प्रतिवेदन

छतरपुर जिले के राजनगर थानांतर्गत ग्राम बन्दरगढ़ की एक दलित गर्भवती महिला के साथ उसके घर में घुसकर आरोपियों ने उस समय मारपीट की, जिस समय उसका पति घर से बाहर था। बीच-बचाव कर रही महिला की सास के साथ भी आरोपियों ने जमकर मारपीट की। आरोपियों ने पीड़िता को कहीं भी शिकायत करने पर गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी थी, लेकिन मीडिया में मामला आने पर राजनगर थाना प्रभारी ने पुलिस भेजकर पीड़िता को थाने बुलवाया और उसकी शिकायत सुनकर आरोपियों के विरूद्ध एट्रोसिटी एक्ट सहित आईपीसी की धारा 452, 343, 323, 294, 506, 34 के तहत मामला दर्ज कर लिया। 

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री नरेन्द्र कुमार जैन ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर पुलिस अधीक्षक, छतरपुर से दो सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है।मिली जानकारी के मुताबिक पीड़ित दलित महिला का पति गांव में ही मज़दूरी करता है। गांव के ही बद्री पटेल के पुत्रों ने महिला के पति को अपने यहां काम करने को कहा था, लेकिन जब वह मज़दूरी करने नहीं गया, तो दबंगों ने उसको इसका अंजाम भुगतने की धमकी देते हुये, अब गांव में आगे मज़दूरी नहीं करने देने का फरमान सुनाया। इतना ही नहीं आरोपी उसे मारने के लिये ढूंढने लगे। इसकी जानकारी होने पर उक्त मज़दूर डर के मारे कहीं छुप गया, तो आरोपी उसके घर पहुंच गये और उसकी गर्भवती पत्नी से उसके छोटे-छोटे बच्चों के सामने ही मारपीट कर दी। साथ ही उसके पेट में भी लात मार दी। मौके पर मौजूद पीड़ित महिला की बुजुर्ग सास ने मारपीट से रोका, तो आरोपियों ने उसे भी मारा और पुलिस में रिपोर्ट न करने की धमकी दी। साथ ही महिला को घर से बाहर न निकलने देने को लेकर पहरा भी बिठा दिया था।

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