-
दुनिया
-
फिर Political माहौल की गर्मा गरमी के बीच बेतुका फैसला, MP कांग्रेस के प्रवक्ताओं की छुट्टी
-
आमिर, सलमान के प्लेन को उड़ाने वाली MP की पायलट संभवी पाठक महाराष्ट्र के Dy CM के साथ हादसे में मृत
-
MP नगरीय विकास विभाग दागदारः दूषित पानी से बदनाम हुआ स्वच्छ Indore तो Bhopal के स्लाटर हाउस में गौ हत्या
-
साँची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध विद्वान का दौरा
-
प्रतिष्ठित VIT ग्रुप के सीहोर कॉलेज में कुप्रबंधन से नाराज छात्रों का हंगामा, गाड़ियां जलाईं, तोड़फोड़…जांच कमेटी बनी
-
मणिपुरी, ओडिसी एवं भरतनाट्यम की हुई प्रस्तुति
47वें खजुराहो महोत्सव के समापन के अवसर पर शुक्रवार को मां जगदंबा और कंदरिया महादेव मंदिर के प्रांगण में मणिपुरी, ओडिसी और भरतनाट्यम की प्रस्तुति हुई। पहली प्रस्तुति जवाहरलाल नेहरू मणिपुरी डांस अकादमी-मणिपुरी समूह द्वारा प्रस्तुत की गई। इस प्रस्तुति में मणिपुरी संकीर्तन रखी गई, जिसमें बसंतरास, वैष्णों संप्रदाय में रासलीला तथा ढोलचोलक (पुंगचोलक) की प्रस्तुति की गई।
आर्या नंदे द्वारा मंगलाचरण एवं पल्लवी नृत्य की प्रस्तुति
दूसरी प्रस्तुति आर्या नंदे द्वारा ओडिसी एकल नृत्य के संदर्भ में दी गई। जिसमें मंगलाचरण और पल्लवी नृत्य और किरवानी पल्लवी की प्रस्तुति हुई। पल्लवी नृत्य मुख्यतः टेक्नीकल फार्म पर आधारित है। इसे किरवानी पल्लवी भ्ीा कहते हैं। इस प्रस्तुति में महानाटक रामायण एवं उससे जुड़े कुछ संदर्भ एवं कहानी की सहायता से सभी नौ रसों के आधार पर प्रस्तुति की गई इस प्रस्तुति में रामायण के पात्र से जुड़े प्रसंग समाहित है।
खजुराहो की महत्ता प्रतिपादित करने ब्रम्ह अर्पणा की प्रस्तुति
तीसरी एवं अंतिम प्रस्तुति पूर्णिमा अशोक एवं साथियों द्वारा भरतनाट्यम के संदर्भ में दी गई। इस नृत्य की थीम खजुराहो नृत्य के महोत्सव के संदर्भ में विशेष रूप से बनाया गया है जिसे ब्रम्ह अर्पणा कहते हैं। ब्रम्ह्ा जी चारों वेदों के रचयिता हैं। पांचवी प्रस्तुति ब्रम्ह अर्पणा के मुख्य भाव के इर्द गिर्द घूमती है। ब्रम्ह अर्पणा में प्रेम, भक्ति और मुक्ति के भाव समाहित हैं।
ब्रम्ह अर्पणा में तीन अलग-अलग प्रस्तुति दी गई। जहां प्रेम रस में रामजी सीता से मिलते हैं की प्रस्तुति दी गई है। इस प्रेम श्रृंगार की प्रस्तुति को दो व्यक्तित्व ही महसूस कर सकते हैं। इसमें रामजी एवं सीता जी के स्नेही मिलन का भाव समाहित है।
मुक्ति के भाव में मीरा के पात्र का चित्रण है मुक्ति के भाव में मीरा के संदर्भ से जुड़ी सामाजिक भावना है कि मीरा पात्र के भाव हमें मुक्ति की ओर ले जाते है और स्त्रियों का यह भाव (पात्र) जो हमें जीवन को जीने की प्रेरणा देते हैं।
भक्ति के भाव शिवजी की स्तुति में शिव शंभो शिव शंभो स्वयंभू समाहित है, जो हमें यह सिखलाता है कि शिवजी की भक्ति से हमें क्या-क्या प्राप्त हो सकता है।
समारोह के समापन अवसर पर पूर्व राज्यमंत्री ललिता यादव, कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह सहित पर्यटन एवं संस्कृति विभाग भोपाल के अधिकारी उपस्थित रहे। कलाकारों की प्रस्तुति के बाद ललिता यादव ने पूर्णिमा अशोक एवं साथियों का कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने जवाहरलाल नेहरू मणिपुरी डांस अकादमी की आर्या नंदे एवं सदस्यों को सम्मानित किया।




Leave a Reply