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“अफ़साने का अफ़साना” आयोजित
मध्यप्रदेष उर्दू अकादमी के तŸवावधान में 13 फरवरी को एक दिवसीय कहानी एवं उपन्यास पर आधारित सेमिनार “अफ़साने का अफ़ाना” का आयोजन मुल्ला रमूज़ी संस्कृति भवन, भोपाल में हुआ जो दो सत्रों पर आधारित था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अदिति कुमार त्रिपाठी उपस्थित रहे। प्रथम सत्र में 4 अफ़साना निगारों ने अपने अफ़साने पेष किये। इस सत्र की अध्यक्षता पद्मश्री मेहरून निसा परवेज़ ने की और कार्यक्रम का संचालन महमूद मलिक ने की।
कार्यक्रम के प्रारम्भ अकादमी की निदेषक डाॅ0 नुसरत मेहदी ने अतिथियों का स्वागत पुस्तकें पेष कर के किया। डाॅ0 नुसरत मेहदी ने स्वागत भाषण में बोलते हुये सेमिनार की एहमियत पर रौषनी डालते हुये कहा कि हम चाहते हैं कि मध्यप्रदेष से नई नस्ल के अफ़साना निगार हमारे सामने आयें क्योंकि हमारे प्रदेष शायरी में तो बहुत लोग सामने आ रहे हैं लेकिन जो दीगर नस्री इस्नाफ़ हैं उसकी तरफ नई नस्ल बहुत कम ध्यान दे रही है। इन सेमिनारों के अयोजन के द्वारा हमारा मक़सद है कि नई नस्ल फिक्षन निगारी की ओर ध्यान दे और आने वाले समय में नई नस्ल से अफसाना निगार हमारे सामने आयें। उन्होंने आगे बोलते हुये कहा कि हमने अभी मध्यप्रदेष में संभागीय स्तर पर कार्य करना प्रारम्भ किया है। जिसमें नये लिखने वाले शायर, साहित्कार एवं कलाकर को जोड़ा जायेगा। जिसके द्वारा छिपी हुई प्रतिभायें जो हमारे प्रदेष में मौजूद हैं उन तक हमारी पहुंच हो। इसके लिये हमने संभागीय स्तर पर कार्य करना शुरू कर दिया है। जिसके प्रमाण के रूप में स्तुति अग्रवाल आपके सामने हैं। जो आज के इस प्रोग्राम में कहानी पेष करने वाली सबसे युवा कहानीकार हैं और हम उन्हीं से इस कार्यक्रम को शुरू कर रहे हैं जो सिरोंज से तषरीफ लाई हैं। स्तुति अग्रवाल ने अपना अफसाना “तुम्हारे नाम” शीर्षक से पेष किया। इस अफ़साने के बाद भोपाल से संबंध रखने वाले शायान कुरैषी ने अपना अफ़ासना “रज़ामंदी” शीर्षक से पेष किया जिसको सभी ने पंसद किया। शायान कुरैषी के अफ़साने के बाद लखनऊ तषरीफ़ लाईं अफ़साना निगार इषरत नाहीद ने अपना अफ़साना “ज़रा सा एतबार पा लेने दो” पेष किया। इस अवसर पर कहानियों का संग्रह “मंज़िल-ए-बेनिषां” का विमोचन भी हुआ। प्रथम सत्र के अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं पद्मश्री मेहरून निसा परवेज़ ने अकादमी द्वारा किये जा रहे कार्यों की प्रषंसा करते हुए अपना अफसाना पेष किया।
दूसरे सत्र में तीन अफ़साने पेष किये गये। इस सत्र की अध्यक्षता श्री नईम कौसर ने की और संचालन सुश्री इषरत नाहीद ने किया। प्रारम्भ में षिफ़ाली पाण्डे ने तीन छोटी कहानियां पेष कीं। इसके बाद अलीगढ़ से तषरीफ लाईं सुश्री अफ्षां मलिक ने अपना अफ़साना “मोहब्बत अमर है” पेष किया। इसके पश्चात श्री निसार राही ने अपना अफ़साना “जानवर और इन्सान” पेष किया। दूसरे सत्र की अध्यक्षता कर रहे श्री नईम कौसर ने अपने संबोधन में मध्यप्रदेष उर्दू अकादमी के द्वारा किये जा रहे कार्यक्रमों की प्रषंसा की और कहा कि हमें भविष्य में स्कूल और कालेज के छात्रों को भी उर्दू की ओर लाना है। कार्यक्रम के अंत में डाॅ0 नुसरत मेहदी और श्री मुमताज़ खान उपस्थित श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया।




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