‘गमक’ अन्तर्गत नाटक ‘कामायनी’ का मंचन

संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित गमक श्रृंखला की सप्ताहांत प्रस्तुतियों के अंतर्गत रवींद्र भवन में आज रूपवाणी संस्था, वाराणसी के कलाकारों द्वारा श्री व्योमेश शुक्ल के निर्देशन में महान साहित्यकार जयशंकर प्रसाद की विशिष्ट कृति ‘कामायनी’ का मंचन हुआ|  

‘कामायनी’ की कथा प्रलय से आरंभ होती है। जलप्लावन के बाद अकेला बचा मनुष्य मनु हिमालय की एक चोटी पर बैठा उदास आँखों से विनाश को देख रहा है। तभी वहाँ सृष्टि की पहली स्‍त्री श्रद्धा का आगमन होता है। वह हताश मनु को नये जीवन और कर्म के लिए प्रोत्साहित करती है। दोनों मिलकर नूतन निर्माण करते हैं। असुर पुरोहितों के फेर में पड़कर मनु का ध्यान निर्माण की बजाय आखेट, यज्ञ, बलि और सुरा जैसी प्रवृत्तियों में लग जाता है। इसके बाद मनु की मुलाकात एक दूसरी स्त्री, बुद्धि की प्रतिनिधि इड़ा से होती है दोनों मिलकर कर्मशक्ति से एक नया सारस्वत प्रदेश विकसित करते हैं। प्रजा, कृषि और राज्य, सब कुछ, मनु और इड़ा के समवेत नेतृत्व में फल-फूल रहे हैं किन्तु अभिमान के कारण वह अधिपति की तरह व्यवहार करता है और इड़ा को भी पाने की कोशिश करता है। उधर, श्रद्धा और मनु का पुत्र मानव बड़ा हो गया है अपनी माँ के साथ वह पिता को खोजने निकला है एक स्थल पर घायल, अचेत पिता मनु पड़े मिलते हैं। मनु अब भी पलायन करना चाहते हैं, इड़ा पुत्र और शासन का दायित्व संभालने को तैयार हो जाती है और मनु श्रद्धा के साथ हिमालय की ओर तपस्या करने चले जाते हैं। 

मंच पर- स्वाति, नंदिनी, तापस, वंशिका, काजोल, साखी, जय, हर्ष, रोशन, आकाश, विशाल, विनय, देवराज एवं अश्विनी ने अभियान किया|  

वस्त्र विन्यास :- डॉ. शकुन्तला शुक्ल, संगीत निर्देशन:- अरविन्ददास गुप्त परिकल्पना और सिनिक डिज़ाइन:- धीरेन्द्र मोहन, नेपथ्य नियमन:- जे. पी. शर्मा और टी.एन. विश्वकर्मा, नेपथ्य सहकार:- स्वाति, नंदिनी व किशोर सार्थक एवं निर्देशन:- व्योमेश शुक्ल का था|   

श्री शुक्ल ने वर्ष 2004 में लिखने की शुरूआत की कविताओं के अलावा आलोचनात्मक लेखन का कार्य किया तथा कुछ निबन्धों के हिन्दी में अनुवाद आपके द्वारा किया गया। आपने नाट्यशास्त्र और संगीत पर केन्द्रित कुछ निबन्ध का लेखन किया है। आपको वर्ष 2008 में कविताओं के लिए अंकुर मिश्र स्मृति पुरस्कार एवं वर्ष 2009 में कविताओं के लिए भारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार प्राप्त है। अंग्रेज़ी दैनिक ‘द इण्डियन एक्सप्रेस’ द्वारा कराये गये एक सर्वेक्षण के मुताबिक़ आप देश के दस सर्वोत्तम लेखकों में शुमार हैं। आपकी रंगकर्म में विशेष रूचि है, आप देश के विभिन्न प्रतिष्टित मंचों पर कई नाटकों का सफल निर्देशन कर चुके हैं|   

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