-
दुनिया
-
अमेरिकी TRADE DEAL के खिलाफ INC आंदोलन की तैयारी, RAHUL GANDHI व खड़गे की उपस्थिति में BHOPAL में पहला किसान सम्मेलन
-
फिर Political माहौल की गर्मा गरमी के बीच बेतुका फैसला, MP कांग्रेस के प्रवक्ताओं की छुट्टी
-
आमिर, सलमान के प्लेन को उड़ाने वाली MP की पायलट संभवी पाठक महाराष्ट्र के Dy CM के साथ हादसे में मृत
-
MP नगरीय विकास विभाग दागदारः दूषित पानी से बदनाम हुआ स्वच्छ Indore तो Bhopal के स्लाटर हाउस में गौ हत्या
-
साँची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध विद्वान का दौरा
-
‘गमक’ अन्तर्गत नाटक ‘बूढ़ी काकी’ का मंचन
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित गमक श्रृंखला की सप्ताहांत प्रस्तुतियों के अंतर्गत रवींद्र भवन में आज सूत्रधार आज़मगढ़ के युवा रंगकर्मियों द्वारा अभिषेक पंडित के निर्देशन में हिंदी साहित्य के महान कहानीकार मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानी ‘बूढ़ी काकी’ की नाट्य प्रस्तुति हुई|
‘बूढ़ी काकी‘ मुंशी प्रेमचंद की एक चर्चित कहानी है। इस कहानी में भी उन्होंने समाज की ही एक काकी के बुढ़ापे का जीवन चित्रित किया है। इस कहानी में कई पात्र हैं। बूढ़ी काकी, रूपा, रूपा की प्यारी बेटी लाडली और बुद्धिराम मुख्य पात्र हैं।
इसमें बूढ़ी काकी को वक़्त के रूप में परिभाषित करने की कोशिश की गई है। क्योंकि समय कभी एक जैसा नहीं रहता है। जीवन में सुख और दुख आता रहता है। इससे प्रकृति और मनुष्य कोई भी नहीं बच सका है। बूढ़ी काकी जीवन के सत्य के रूप में हमारे सामने मौजूद है। वहीं लाडली बूढ़ी काकी की प्रतिमूर्ति है। लाडली अपनी काकी का बहुत ख़्याल रखती है। लेकिन रूपा समाज का एक ऐसी चरित्र है जो उस व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करती है, जो कुछ सुविधा या सत्ता पाने के बाद ख़ुद को भूलकर जीवन को अहंकार के साथ जीते हैं, उसे लगता है मैं हमेशा सुख में ही रहूँगा, लोग समय के खेल को झुठलाना चाहते हैं लेकिन ऐसा होता नहीं है। रूपा सिर्फ़ भगवान से ही डरती है, उसे लगता है जीवन मे कोई पाप नहीं होना चाहिए, लेकिन वह फिर भी समय के मोह में फंसी हुई है, और ऐसा ही आम जीवन मे भी होता है। बुद्धिराम एक कंजूस व्यक्ति है जो जीवन में कुछ भी खर्च करने से पहले बहुत सोचता है|
प्रस्तुति में मंच पर- डी. डी. संजय, डॉ. अलका सिंह, ममता पंडित, रितेश रंजन, विवेक सिंह एवं सत्यम कुमार ने अभिनय किया|
मंच परे कलाकार- कहानी- मुंशी प्रेमचंद, संगीत- शशिकांत कुमार का, तबले पर- अजय वर्मा, खंजड़ी पर- अनादि एवं अभिषेक, प्रकाश परिकल्पना- रंजीत कुमार की, मंच परिकल्पना- अंगद कश्यप की, मंच व्यवस्था- रितेश रंजन की, वस्त्र विन्न्यास- ममता पंडित का और परिकल्पना तथा निर्देशन- अभिषेक पंडित का था|
———-
संस्था के बारे में –
सूत्रधार आज़मगढ़ युवा रंगकर्मियों का एक जागरूक समूह है। जो विगत लगभग दो दशक से उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जनपद में रंगकर्म व अन्य रचनात्मक गतिविधियों में सतत सक्रिय है। संस्था प्रति वर्ष नाट्य कार्यशाला, संगोष्ठि, प्रदर्शनी के साथ-साथ राष्ट्रीय नाट्य उत्सव ‘आज़मगढ़ रंगमहोत्सव’ के नाम से आयोजित करती आ रही है।




Leave a Reply