प्रधानमंत्री ने कहा-भ्रम फैलाने वाली जमात को देश के किसान देंगे जवाब

नए कृषि कानूनों की बहुत चर्चा हो रही है, लेकिन ये कानून रातोंरात नहीं आए। पिछले 20-22 सालों से हर सरकार इन पर विचार करती रही, विमर्श चलता रहा। देश के कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और उन्नत किसान लगातार इनकी मांग करते आए हैं। अगर सभी दलों के घोषणा पत्र देखे जाएं, नेताओं के बयान और चिट्ठियां देखी जाएं, तो इनमें वही बात की गई है। कृषि सुधार कानून उनसे अलग नहीं है। इन्हें तकलीफ कृषि कानूनों से नहीं है, इन्हें दिक्कत इस बात से है कि जो हम अपने घोषणापत्र में कहते थे और कर नहीं पाए, उसे मोदी ने कैसे कर दिया? मोदी इसकी क्रेडिट कैसे ले सकता है? लेकिन मैं कहता हूं, मुझे क्रेडिट नहीं चाहिए, मुझे किसानों के जीवन में आसानी और समृद्धि चाहिए। मैं आपके घोषणापत्रों को ही इन कानूनों की क्रेडिट दे देता हूं, लेकिन आप किसानों को बरगलाना छोड़ दीजिए।

यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रायसेन में आयोजित किसान सम्मेलन को वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए कही। मोदी ने कहा कि कानून लागू होने के 6-7 महीने बाद इन लोगों ने अचानक किसानों को भ्रमित करके राजनीति शुरू कर दी। हम बार-बार पूछ रहे हैं कि क्या दिक्कत है? लेकिन वे कोई ठोस जवाब नहीं देते और यही उनकी सच्चाई है। ये लोग किसानों को उनकी जमीनों का डर दिखाकर खुद की राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने प्रदेश के 35 लाख से अधिक किसानों के खातों में 1600 करोड़ से अधिक की राहत राशि पहुंचाई, किसानों को क्रेडिट कॉर्ड तथा लाभार्थियों को चेक वितरित किए। इसके साथ ही कृषि उपयोगी सुविधाओं का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा एवं कृषि मंत्री कमल पटेल विशेष रूप से उपस्थित थे। स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने स्वागत भाषण दिया।

वोटबैंक की राजनीति करने वालों को देश जान गया है

                प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज जो लोग किसानों के नाम पर झूठे आंसू बहा रहे हैं, उनके लिए किसान कभी भी देश की शान नहीं रहा, ये राजनीति के लिए उसका इस्तेमाल करते रहे हैं। ये लोग किसानों के प्रति कितने निर्दयी रहे हैं, मैं इसका खुलासा करना चाहता हूं। इन लोगों ने 8 सालों तक स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट को दबाकर बैठे रहे और किसान इंतजार करता रहा। हमारी सरकार किसान को अन्नदाता मानती है और हमने उन सिफारिशों को लागू करते हुए किसान को उसकी लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य दिया। ये किस तरह से धोखाधड़ी करते हैं, उसका उदाहरण किसानों की कर्जमाफी है। इन्होंने मध्यप्रदेश में चुनाव के समय 10 दिनों में कर्जमाफी का वादा किया और जब सरकार बन गई, तो बहाने बनाने लगे। राजस्थान के किसान भी कर्जमाफी का इंतजार कर रहे हैं। ये हर चुनाव के समय कर्जमाफी की बात करते हैं, लेकिन कभी उस तरह से कर्जमाफी नहीं करते, जैसा कहते हैं। इनकी कर्जमाफी का लाभ छोटे किसानों को नहीं, इनके करीबियों को मिलता था। इन वोटबैंक की राजनीति करने वालों को देश जान गया है। जब ये लोग किसान हित की बात करते हैं, तो आश्चर्य होता है कि कोई इस हद तक छल-कपट कैसे कर सकता है?

हमारी नीयत पवित्र है

                श्री मोदी ने कहा कि किसानों को लेकर हमारी नीयत गंगाजल जैसी पवित्र है। हम ये मानते हैं कि भारत के किसानों को विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने में अब देर नहीं की जा सकती। भारत का किसान इन सुविधाओं के अभाव में रहे, यह हमें स्वीकार्य नहीं है। किसानों को धोखा देने वाले लोग 10 सालों में एक बार 50 हजार करोड़ की कर्जमाफी करते हैं, हम प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में हर साल 75000 हजार करोड़ रुपये सीधे किसानों के खाते में पहुंचाते हैं। 10 साल में यह राशि 7.5 लाख करोड़ होती है। उन्होंने कहा कि 8 साल पहले किसान यूरिया के लिए रात-रात भर लाइन में लगे रहते थे फिर भी उसकी फसल बर्बाद हो जाती थी। लेकिन इनका दिल नहीं पसीजा। अब ऐसा नहीं होता। हमने नए प्रावधान किए, भ्रष्टाचार पर नकेल कसी, यूरिया की नीम कोटिंग शुरू की। आने वाले समय में गोरखपुर, बरौनी, सिंदरी, तालकेर और रामागुंडम में आधुनिक तकनीक वाले यूरिया प्लांट शुरू हो जाएंगे। हमने तय किया है देश को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएंगे, इन्हें ऐसा करने से किसने रोका था? इनके पास नीयत, नीति और निष्ठा नहीं थी। इन्हें किसानों की चिंता होती, तो 100 से अधिक सिंचाई प्रोजेक्ट लटके नहीं रहते। हमारी सरकार इन परियोजनाओं को मिशन मोड पर पूरा कर रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि हमने खेती की लागत को कम करने के लिए प्रयास किए। किसानों को कम कीमत पर सोलर पंप दिये जा रहे हैं और हम अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने के लिए भी काम कर रहे हैं।

लगातार झूठ बोल रहे हैं, भ्रम फैला रहे हैं

                प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि विपक्षी दलों के लोग लगातार झूठ बोल रहे हैं। भ्रम फैला रहे हैं कि एमएसपी बंद हो जाएगी, मंडियां बंद हो जाएंगी। इससे बड़ा कोई झूठ और षडयंत्र नहीं हो सकता। तीनों कानून लागू हुए 6-7 महीने हो गए हैं और उसी एमएसपी पर किसानों की फसलें उन्हीं मंडियों में खरीदी जा रही हैं। श्री मोदी ने कहा कि अगर हमें एमएसपी बंद करना होता, तो हम स्वामीनाथन कमीशन की अनुशंसाओं को क्यों लागू करते? उन्होंने कहा कि मैं विश्वास दिलाता हूं कि एमएसपी बंद नहीं होगी। हमारी सरकार एमएसपी को लेकर कितनी गंभीर है, उसका अंदाज इन तथ्यों से लगा सकते हैं कि पिछली सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1400 रुपये क्विंटल तय किया था, हम 1975 रुपये दे रहे हैं। उन्होंने धान का एमएसपी 1310 रुपये तय किया था, हम 1870 दे रहे हैं। वे ज्वार का समर्थन मूल्य 1520 रुपये देते थे, हम 2640 दे रहे हैं। उन्होंने चने का मूल्य 3100 रुपये दिया, हम 5100 दे रहे हैं। वो तूअर 4300 रुपये प्रति क्विंटल खरीदते थे, हम 6000 रुपये पर खरीद रहे हैं। वो मूंग 4500 रुपये पर खरीदते थे, हम 7200 रुपये पर खरीद रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि ये इस बात का सबूत है कि हमारी सरकार एमएसपी को लेकर कितनी गंभीर है।

इन्होंने जो पाप किए, उसका प्रायश्चित है कृषि सुधार कानून

                श्री मोदी ने कहा कि हमने कृषि सुधार कानूनों के जरिये किसानों को आजादी दी है। हमने सिर्फ ये किया है कि किसान को जहां फायदा हो, वह अपनी उपज बेच सकता है। मंडी भी चालू है, वो चाहे तो अपनी उपज वहां भी बेच सकता है, बाहर भी बेच सकता है। लेकिन इन्होंने किसानों को बांधकर रखा और इनके इसी पाप का प्रायश्चित है कृषि सुधार कानून। श्री मोदी ने कहा कि कानून लागू होने के बाद से एक भी मंडी बंद नहीं हुई, हम मंडियों को आधुनिक बना रहे हैं। कानून का विरोध कर रहे लोग तीसरा झूठ फार्मिंग एग्रीमेंट को लेकर बोल रहे हैं, जबकि ये व्यवस्था कोई नई बात नहीं है, बरसों से चल रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में पंजाब सरकार ने प्रदेश के किसानों द्वारा किए गए 800 करोड़ के एक एग्रीमेंट का जश्न मनाया था। हमने पुराने तरीकों को सुधारा है, किसानों को सुरक्षा दी है। श्री मोदी ने किसानों से आग्रह किया कि वे भ्रम फैलाने वाली ताकतों से सतर्क रहें, इन्होंने हमेशा किसानों को धोखा दिया है, इस्तेमाल किया है और आज भी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर किसी को भी इन कानूनों को लेकर कोई भी आशंका है, तो हम सिर झुकाकर, पूरी विनम्रता के साथ बात करने को तैयार हैं, हमारे लिए किसानों का हित सर्वोपरि है।

किसानों के लिए कांग्रेस उपवास नहीं पश्चाताप करेः शिवराजसिंह चौहान

                सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने किसानों को तीनों कृषि कानून के लाभ समझाते हुए कहा कि कृषि कानून से किसान समृद्ध होंगे, लेकिन कांग्रेसी किसानों को भ्रमित कर रहे हैं, घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। राहुल गांधी और कमलनाथ बोलते हैं कि हम किसानों के लिए उपवास करेंगे,  लेकिन उन्हें उपवास नहीं, पश्चाताप करना चाहिए। आपने किसानों से झूठे वादे किए, उनको ठगा, उनको छला, उनको धोखा दिया, उसके लिए पश्चाताप करो। उन्होंने कहा कि कमलनाथ जी ने कर्ज़माफी का झूठ तो बोला ही, उसके साथ ही प्रधानमंत्री किसान कल्याण निधि के लिए पात्र किसानों की सूची ही केंद्र को नहीं भेजी। हमने किसानों की सूची भेजी और रु. 6,000 के साथ ही अपनी ओर से रु. 4,000 भी किसानों को दिये। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आशीर्वाद और सहयोग से पिछले आठ महीने में हमने 82,422 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत किसानों के खाते में अंतरित करने का काम किया है।

घडियाली आंसू बहाने वाले नेता, मोदी जी का विरोध कर रहे

                श्री चौहान ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल कृषि कानून को लेकर भ्रम फैला रहे है, लेकिन किसान बन्धु आप किसी की बातों में मत आना, मंडी बंद नहीं होगी और न ही एमएसपी पर खरीदी बंद होगी। मंडी की व्यवस्था को हम पहले से अधिक सुदृढ़ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के नाम पर घड़ियाली आँसू बहाने वाले नेता अब मोदी जी का विरोध करने के लिए झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी किसानों के सबसे बड़े हितैषी हैं, जिनमें किसानों की आय दुगनी करने का जज्बा है, जिन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनाई है। श्री चौहान ने कहा कि नये कृषि कानून के विरोध में जो लोग ढोंग कर रहे हैं, जब इनकी सरकार थी तो यह एमएसपी पर केवल गेहूं की खरीदी करते थे। लेकिन हमने अन्य फसलों पर भी एमएसपी पर खरीदी की।

मध्यप्रदेश का किसान मोदी जी, शिवराज जी और भाजपा के साथः विष्णुदत्त शर्मा

                भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में हुए किसान सम्मेलन में बड़ी संख्या में आए किसानों की उपस्थिति ने यह बता दिया कि कृषि कानूनों को लेकर मध्यप्रदेश का किसान प्रधानमंत्री जी के साथ, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा नेतृत्व के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि जब कोई भी उत्पादक अपने उत्पाद की कीमत तय कर सकता है तो दिन-रात अथक मेहनत करने वाला किसान अपनी उपज की कीमत क्यों तय नहीं कर सकता है? श्री शर्मा ने कहा कि नये कृषि बिल से किसान अपनी इच्छानुसार मूल्य तय कर फसल बेच सकता है। उन्होंने कहा कि पहले जब किसान फसल बेचने मंडी जाता तब व्यापारी ही फसल का दाम तय कर देते थे। किसान आढ़तियों ओर दलालों के जबड़े में फंसा रहता था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कृषि कानून के जरिये किसानों को न सिर्फ आजादी दी बल्कि किसानों को दलालों से बचाया है। उन्होंने कहा कि एक सर्वे में सामने आया है कि गेहूं और धान में किसान और कंज्यूमर के बीच 2.5 प्रतिशत लगभग यानी लगभग 3 हजार 300 करोड़ रुपये बिचौलियों के पास चला जाता था, नए कृषि कानून से बिचौलियों पर अंकुश लगेगा।

गांवों की तस्वीर और किसानों की तकदीर बदलने का अभियान जारी रहेगा : कमल पटेल

                कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा कि पूर्व की कमलनाथ सरकार ने फसल बीमा के लाभ से वंचित रखा था लेकिन सत्ता परिवर्तन से शुरू हुए व्यवस्था परिवर्तन से किसानों को लाभ मिलना शुरू हो गया। प्रदेश के 23 लाख 85 हजार किसानों के खाते में 5 लाख करोड़ से अधिक की राशि डाली जा चुकी है। आज अतिवृष्टि और बाढ़ से नष्ट हुई सोयाबीन की फसल की क्षतिपूर्ति के 1600 करोड़ रुपए डाले जा रहे हैं लेकिन यह अंतिम नहीं है, अभी फसल बीमा के मिलाकर किसानों के खाते में 8000 करोड़ रुपए और आएंगे। गांवों की तस्वीर और किसानों की तकदीर बदलने का अभियान लगातार जारी रहेगा। श्री पटेल ने कहा कि किसानों को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना भाजपा का संकल्प है, इसे पूरा करने पर ही आत्मनिर्भर भारत का सपना पूरा होगा। कार्यक्रम के अंत में सभी किसानों ने खड़े होकर एवं हाथ उठाकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कृषि कानूनों का समर्थन तथा अभिनंदन किया।

                कृषि सम्मेलन में सांसद श्री रमाकांत भार्गव, पूर्व मंत्री श्री रामपाल सिंह, विधायक श्री सुरेन्द्र पटवा, श्रीमती अनीता किरार, श्री एस मुनियन, जिला अध्यक्ष डॉ जयप्रकाश किरार, श्री रामकिशन चौहान सहित अन्य जनप्रतिनिधि मंचासीन थे।

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