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‘कबीर गायन’ और ‘गणगौर नृत्य’ की प्रस्तुति
एकाग्र ‘गमक’ श्रृंखला अंतर्गत आज आदिवासी लोककला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा सुश्री अंजना सक्सेना एवं साथी, इंदौर का ‘कबीर गायन’ और श्री अनिमेष उपाध्याय एवं साथी, खण्डवा द्वारा ‘गणगौर नृत्य’ की प्रस्तुति हुई |
प्रस्तुति की शुरुआत सुश्री अंजना सक्सेना और साथियों द्वारा कबीर गायन से हुई, जिसमें- गुरु वंदना- मोहे लागी लगन गुरु चरणन की, मोहे सुन सुन आवे हँसी, घूंघट के पट खोल, चदरिया झीनी रे झीनी, लागी लगन, कौन ठगवा एवं मन लागो यार फकीरी में आदि पदों का गायन प्रस्तुत किया|
मंच पर – तबले पर- श्री महेश यादव, वायलिन पर- श्री अब्दुल हनीफ लतीफ, हारमोनियम- श्री लक्ष्मण बंसल बंसल एवं श्री दिनेश यादव ने संगत दी |
सुश्री सक्सेना ने संगीत की शिक्षा स्व. गुरु स्वतंत्र कुमार ओझा से लेना आरम्भ की एवं वर्तमान में श्री रमाकांत दुबे से संगीत की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं| आपने अखिल भारतीय गन्धर्व महाविद्यालय मंडल, मुंबई से संगीत विषारद कंठ संगीत एवं राजा मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय, ग्वालियर से कंठ संगीत में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की | आप देश के विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं|
दूसरी प्रस्तुति श्री अनिमेष उपाध्याय एवं साथी, खण्डवा द्वारा ‘गणगौर नृत्य’ की हुई जिसमे- अरे सायबा खेलन गई गणगौर- नारी मन की व्यथा कथा का गीत, अतुली पातुलि- अरग, को काई करंड कस्तूरी- रनुबाई की आरती, रत्नापुर सी हो रनुबाई का रात उत्तरीय, माता का जयकारा गीत एवं महरा पियर में बोई गणगौर-श्रृंगार गीत, तोड़ो तोड़ो रे डेडम डेड- पाती गीत, सोनरूपा का घड़ा- झालरिया एवं दुलरी, घाटी चडीन न हऊ हरी हो चंदा- श्रृंगार आदि निमाड़ी जनपद में गाये जाने वाले पारंपरिक गणगौर गीतों के माध्यम से गणगौर नृत्य प्रस्तुत किया |
श्री उपाध्याय विगत 11वर्षों से स्वतंत्र रूप से गणगौर नृत्यों का सफल निर्देशन कर रहे हैं। इन्होंने गणगौर की प्रसिद्ध विडिओ सीडी “गणगौर पर्व” एवं “रंगों-रंगो रनुबाई का हाथ” के नृत्य निर्देशन में भी सक्रिय भूमिका निभायी है। आप देश के कई मंचों पर अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं |
प्रस्तुति में मंच पर- खंजरी- अनिमेष उपाध्याय, गायन में- श्रीमती साधना उपाध्याय एवं आरती रावल, ढोलक पर- मनोज सावनेर एवं रघुवीर, हारमोनियम पर- नरेंद्र सिंह सूर्यवंशी और नृत्य में- नैंसी खेड़े, आयुषी पत्रिकर, विधि मंडलोई, कनक राठौर, भूमि राठौर, अंतरा राठौर, जया पाटिल एवं वैष्णवी पाटिल ने संगत दी|




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