अंसारी द्वारा संकलित “बतख़ मियां अंसारी की अनोखी कहानी” शीर्षक से प्रकाशित

छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक, मोहम्मद वज़ीर अंसारी द्वारा संकलित “बतख़ मियां अंसारी की अनोखी कहानी” शीर्षक से प्रकाशित एक उर्दू पुस्तक का विमोचन प्रसिद्ध समाजसेवी एवं लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष, रघु ठाकुर, प्रसिद्ध समाजसेवी यासीन मोमिन, भिवंडी, डॉक्टर माहताब आलम न्यूज़ 18 उर्दू के प्रिंसिपल कोरेस्पोंडेंट
एवं शायर अंजुम बाराबंकवी के हाथों आज भोपाल में संपन्न हुआ। विमोचन का यह कार्यक्रम भोपाल की साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था “ शेरी भोपाली “ के बैनर तले उसिया रिसॉर्ट क्वीन्स होम, कोहेफिजा, में आयोजित की गई।

वक्ताओं द्वारा बताया गया की अगर बतख मियां अंसारी ने अँगरेज़ की बात मान ली होती तो शायद आज भारत की आज़ादी का सपना जो गांधी जी ने देखा था अधूरा रह जाता। इस अवसर पर पुस्तक के संकलक एम डब्ल्यू अंसारी, आई पी एस, ने आज़ादी के योद्धा बतख़ मियां अंसारी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा की 1917 में जब महात्मा गाँधी चम्पारण बिहार के मोतिहारी जिला में अंग्रेज़ों द्वारा किसानों से ज़बरदस्ती नील की खेती कराये जाने के विरुद्ध अपना विरोध दर्ज कराने पहुंचे तो किसानों की एक बड़ी भीड़ मोतिहारी स्टेशन पर बापू के स्वागत में उमड़ पड़ी। इतनी बड़ी भीड़ को देख अँगरेज़ प्रशासन तंत्र हिल गया। भीड़ देख तत्कालीन अँगरेज़ प्रशासक इरविन ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर अत्याचार करने का मन बना लिया। इस कड़ी में इरविन ने महात्मा गाँधी को अपने बंगले पर दावत में बुला कर बतख़
मियां के द्वारा उनकी जान लेने का षड़यंत्र रचा। इरविन ने अपने विश्वास पात्र खानसामा (रसोइया) बतख़ मियां अंसारी को आदेश दिया कि गाँधी जी को दूध में ज़हर मिला कर दिया जाये। जब बतख़ मियां ने यह कृत करने में आना कानि की तो फिर उसका वेतन बढ़ाने, कृषि भूमि देने एवं मकान देने जैसे प्रलोभन दिए। लेकिन एक सच्चे देश भक्त मुसलमान बतख मियां अंसारी टस से मस नहीं हुए। उसके बाद अँगरेज़ ने इनको डरा धमका कर गाँधी जी को दूध में ज़हर मिला कर देने के लिए दबाव बनाया। जब गाँधी जी वरिष्ठ वकील और आज़ाद
भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के साथ इरविन के आवास पर दावत में पहुंचे तो बतख मियां ने ज़हर मिला दूध परोसने से पहले ही बापू को सचेत कर दिया। इस प्रकार बतख मियां अंसारी  की इस बहादुरी और देश भक्ति के कारण गाँधी जी की जान बच गई। यही कारण रहा की आज हम आज़ाद भारत में सांस ले रहे हैं। बतख मियां अंसारी के इस काम से अँगरेज़ अफसर इतने नाराज़ हुए की उनको नौकरी से ही नहीं निकाला बल्कि उनको जेल भेज दिया।
इतना ही नहीं अंग्रेज़ों ने उनके पैतृक गांव सिस्वा अज़गरी के घर को नीलाम कर दिया और परिवार सहित उनको गांव से निकाल दिया गया। मुकदमे में जुर्म साबित न होने पर उनको रिहा कर दिया गया और वह चम्पारण के किसी अन्य गांव में जाकर गुमनामी की ज़िन्दगी गुज़ारने लगे और इस प्रकार 1957 में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। अपना गहरा दुःख प्रकट करते हुए वक्ताओं ने बताया की बतख मियां जैसे देश भक्त के बच्चे आज दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हैं। सभी ने चिंता व्यक्त की कि क्या इसी दिन के लिए उन्हों ने देश
की आज़ादी के लिए क़ुरबानी दी थी। वक्ताओं ने बतख मियां अंसारी की देशभक्ति को नमन किया और राज्य एवं भारत सरकार से अपील की कि बतख मियां के वारिसों को पुनर्वास कराया जाकर उनके नाम से गांव में स्कूल, कॉलेज और अस्पताल कायम करे जिससे की देश के लिए उनके बलिदान को याद किया जाता रहे।

इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में अधिवक्ता एवं प्रसिद्ध समाजसेवी यासीन मोमिन, भिवंडी, ने बतख मियां को आज़ादी के योद्धा कहकर सम्मान किया, तो दूसरी तरफ न्यूज़ 18 उर्दू के प्रिंसिपल कोरेस्पोंडेंट, माहताब आलम ने बतख मियां को जंग-ए-आज़ादी का कर्णधार बताया जिसने गाँधी जी के प्राण की रक्षा की। अंत में इस कार्यक्रम के अध्यक्ष, रघु ठाकुर ने मोहम्मद वज़ीर अंसारी (आई पी एस) द्वारा संकलित पुस्तक को स्वतंत्रता संग्राम  के
इतिहास में मील का पत्थर करार दिया तथा बतख मियां के व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के संचालक शायर डॉक्टर अंजुम बाराबंकवी ने बतख मियां के जीवन पर प्रकाश डालते हुए सरकार से मांग की कि ऐसी शख्सियत की जीवनी और योगदान को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए जिससे कि आने वाली नस्ल को गांधी जी के प्राण रक्षक और उनके हत्यारे के विषय में मालूम हो सके। 

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