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16 देशों में हर्षाेउल्लास के साथ मना विश्वरंग उत्सव
संस्कृति, कला और साहित्यक विरासत को मनाने वाले विश्वरंग अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव 2020 का ऑनलाइन आयोजन 6 से 8 नवंबर के बीच हुआ। यह कार्यक्रम टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य और कला महोत्सव के दूसरे संस्करण के पूर्वगामी कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया है, जो इस महीने के अंत में हिंदी और भारत की अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में साहित्य और कला को नई पहचान दिलाने के लिए मनाया जाएगा। भारत के अलावा संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नीदरलैंड, सिंगापुर, रूस, उज्बेकिस्तान, श्रीलंका, फिजी, यूक्रेन, स्वीडन, कजाकिस्तान, इंग्लैंड और बुल्गेरिया के प्रतिभागी इस कार्यक्रम का हिस्सा बने। विश्वरंग महोत्सव के बीच में ही बुल्गेरिया कार्यक्रम में शामिल हुआ और विश्वरंग के साथ जुड़ने वाला 16वां देश बना।
दुनियाभर के 100 से ज्यादा कलाकार और 1 लाख से ज्यादा प्रतिभागी कार्यक्रम का हिस्सा बने। भोपाल स्थित रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय आइसेक्ट ग्रुप के अन्य विश्विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थाओं के साथ मिलकर इस कार्यक्रम का आयोजन करता है। यह कार्यक्रम तीन दिन में संपन्न हुआ, जिसमें 16 देशों की साहित्यिक हस्तियां और कलाकारों ने अपने देश की कला, संस्कृति और साहित्य से एक दूसरे को रूबरू कराया। इसके जरिए लोगों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत के बारे में जानने को मिला।
मजबूत सांस्कृतिक रिश्तों में प्रवासी लोगों का महत्व
विश्वरंग ऑस्ट्रेलिया में सरोज वादन, काव्य पाठ, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत सांस्कृतिक संबंधों के महत्व पर एक पैनल चर्चा, भरत नाट्यम, कत्थक, युवा कवि सम्मेलन और मुशायरे के अलावा कई अन्य रोमांचक सत्र आयोजित हुए।
भारतीय मीडिया लिंक ग्रुप के सीईओ पवन लूथरा ने मजबूत सांस्कृतिक रिश्तों में प्रवासी लोगों के महत्व पर बोलते हुए कहा दो देशों का रिश्ता कई आयामों पर निर्भर रहता है। ये आयाम राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और खेल से संबंधित हो सकते हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों में लोगों का आपसी सामंजस्य अहम भूमिका निभाता है। रिपोर्ट के अनुसार 7050 से ज्यादा भारतीय ऑस्ट्रेलिया के समाज और अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2031 तक ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के नागरिकों की संख्या 1.4 मिलियन के करीब पहुंच जाएगी, जो कि ऑस्ट्रेलिया में चीनी मूल के नागरिकों की संख्या से ज्यादा होगी।ष् श्री लूथरा ने कार्यक्रम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों के भविष्य पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दूसरे दिन दर्शकों को अपने जीवन से जुड़े तथ्य बताते हुए स्टीव वॉ ने कहा कि वह एक खिलाड़ी परिवार से संबंध रखते हैं उनके दादाजी एक रग्बी प्लेयर थे और उनके पिताजी बैंक में नौकरी करने से पहले एक शानदार टेनिस प्लेयर थे।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जब वे 6 साल के थे तो अपने भाई के साथ टेनिस फुटबॉल और क्रिकेट खेलने लगे थे। उन्होंने खुलासा किया कि क्रिकेट को लेकर वे अपने पिता के निर्देशन में घर के पीछे बैकयार्ड में प्रैक्टिस किया करते थे। स्टीव बोले कि एक तरह से उनके पहले कोच उनके पिता ही हैं।
विश्वरंग सिंगापुर में रवीन्द्र संगीत, लायन डांस, प्रवासी लोगों की कविताएं, फिल्म शो और शिल्प कला का प्रदर्शन हुआ। विश्वरंग महोत्सव के सिंगापुर मंच में हिंदी साहित्य पर भी चर्चा हुई। इस सत्र का संचालन आराधना झा श्रीवास्तव ने किया। सबसे पहले गौरव उपाध्याय की किताब हॉफ फिल्टर कॉफी पर चर्चा हुई। यह किताब गौरव उपाध्याय की 30 मौलिक कविताओं का संग्रह है। वहीं विश्वरंग इंग्लैंड 2020 में हिंदी लेखकों द्वारा एक विशेष सत्र के अलावा परफॉर्मिंग आर्ट्स पर एक सत्र, एक काव्य पाठ वृत्तचित्र और एक सत्र हिंदी काव्य साहित्य पर भी हुआ। यहां हिंदी लेखकों के साथ चर्चा में अर्चना पनौली, दिव्या माथुर, अनिल शर्मा, पीयूष द्रिवेदी, अचला शर्मा, ममता गुप्ता, मोहन राना, डॉ, श्याम एम पांडे और शेफाली फ्रॉस्ट की रचनाओं पर चर्चा हुई। इस दौरान अनिल जोशी ने बताया कि दिव्या माथुर की कहानियों की प्रमुख विशेषता यह है कि वो स्त्री विमर्श कहानीकार के रूप में जानी जाती हैं। परन्तु उनका स्त्री विमर्श निरंतर परिवर्तनशील है। अब वह पहले जैसा आक्रोश पूर्ण नहीं है, अब उसमें जीवन के समग्र रूप को गहराई से जानने और समाज के ताने-बाने से जुड़कर उसका विश्वलेषण करने की समझ है।
विश्वरंग यूएई में नृत्य महोत्सव, पुस्तक लॉन्च, कला सत्र, नृत्य और संगीत समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के दूसरे दिन डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव ने हिंदी और पर्यटन पत्रकारिता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा ष्हर इंसान को घूमना पसंद होता है पर सभी घूमने वाले लोग लिखते नहीं है। यह अच्छी बात नहीं है। हम अपनी आखों से कई खूबसूरत चीजें देखते तो हैं पर आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ भी संजोते नहीं है। अपने अनुभवों को लिखना हमारी सांस्कृतिक विरासत के लिए बहुत ही जरूरी है।ष् विश्वरंग कनाडा में भारतीय मूल के लेखकों के अलावा कविता चौपाल, शॉर्ट फिल्म स्क्रीनिंग और वास्तविकता पर आधारित साहित्य पर एक सामूहिक चर्चा भी हुई, जिसका विषय था विज्ञान से ज्ञान तक। कार्यक्रम के दूसरे दिन डां रत्नाकर नराले ने बताया कि हिंदी संस्कृत और उसके प्रचार प्रसार के लिए पिछले 50 सालों से काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। वो खुद हाथ से लिखकर पत्रिकाएं निकालते थे। इसके बाद कंम्प्यूटर और तकनीकी आने से उन्हें काफी मदद मिली और अब आसानी ने अपना काम कर पा रहे हैं। इस कार्यक्रम में उन्होंने अपनी 25 किताबों के बारे में बताया। डॉ. नराले अब तक कुल 40 किताबें लिख चुके हैं।
अमेरिका में तीसरे दिन नृत्य पर चर्चा के साथ शुरूआत हुई। गीत और गजल नाम के इस सत्र में संजीव रामभद्रन ने कुछ बेहतरीन गजलें सुनाई। कहीं और जा बसे… संजीव की इस गजल ने सभी को भावविभोर कर दिया। संजीव जी शुरुआत से ही अमेरिका में पले बढ़े। इसके बाद उन्हें श्री राम फाटक से शास्त्रीय और उपशास्त्रीय संगीत का ज्ञान मिला। संजीव अब तक कई बड़े मौकों पर अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। संजीव टीवीएस सारेगामा के मुख्य सत्र के पहले विदेशी प्रतिभागी भी रहे हैं। संजीव ने अपनी प्रस्तुति में लगता नहीं है दिल मेरा, सड़कों पर आवारा फिरूं ऐ दिल का क्या करूं जैसी गजलों से सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया। इसके बाद लय, ताल और नृत्य के साथ साथ ओडिशी नृत्य पर चर्चा हुई। संजुता सेन भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनी। विश्वरंग यूएसए में आगे सुषम बेदी की याद में, युवा प्रतिभा, दास्तानगोई और कुचीपुड़ी नृत्य देखकर दर्शक आनंदित हो उठे। कार्यक्रम में आगे टैगोर और इकबाल पर भी चर्चा हुई। पुस्तक विमोचन और कलाकारों से मिलने के बाद अटलांटिक से पेसिफिक तक कार्यक्रम के साथ विश्वरंग यूएसए का तीसरा दिन समाप्त हुआ।
विश्वरंग यूके में अंक में जहां एक ओर विभिन्न सांस्कृतिक व साहित्यिक गतिविधियाँ हुई तो वहीं दूसरी ओर विजय राणा की डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया। यह डॉक्यूमेंट्री काशी विश्वनाथ मंदिर पर बनाई गई है। इसका नाम है काशी की अमर कहानी। यह डॉक्यूमेंटी दर्शकों को काशी मंदिर के गर्भगृह में ले जाती है। विजय राणा जी ऐसे पहले फिल्मकार हैंए जिन्हें काशी मंदिर के गर्भ ग्रह में जाकर शूटिंग करने का मौका मिला था। अपनी डॉक्यूमेंट्री के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि काशी के बारे में लोगों से सुनकर वो संतुष्ट नहीं हुए थे और इसके बाद ही उन्होंने काशी मंदिर की कहानी सबके सामने लाने का निर्णय लिया। इसमें काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को बहुत ही खूबसूरत तरीके से दिखाया गया है। कार्यक्रम के अंत में मीरा मिश्रा और पद्मेश गुप्ता ने सभी मेहमानों का आभार जताया।
विश्वरंग कनाडा का दूसरा दिन दो प्रतिष्ठित लेखकों के सम्मान के साथ शुरू हुआ। इस समारोह का नाम था ष्सम्मान आपका, मान कनाडा काष्। कार्यक्रम डां रत्नाकर नराले और स्नेही ठाकुर से उनकी रचना यात्रा पर चर्चा हुई। इस बीच सत्र की संचालिका ने सभी भारतीयों को बताया कि कनाडा में भारतीय संस्कृति और साहित्य का झंडा बहुत ऊंचा लहरा रहा है। डां रत्नाकर नराले ने बताया कि हिंदी संस्कृत और उसके प्रचार प्रसार के लिए पिछले 50 सालों से काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ात था। वो खुद हाथ से लिख कर पत्रिकाएँ निकालते थे। इसके बाद कंम्प्यूटर और तकनीकी आने से उन्हें काफी मदद मिली और अब आसानी ने अपना काम कर पा रहे हैं। इस कार्यक्रम में उन्होंने अपनी 25 किताबों के बारे में बताया। डॉ. नराले अब तक कुल 40 किताबें लिख चुके हैं।
नारंगी नीदरलैंड महोत्सव 2020 में लोक संगीत, लोक नृत्य, शास्त्रीय संगीत और नृत्य, रवींद्र संगीत, बांसुरी वादन, कविता और पुस्तक विमोचन जैसे कार्यक्रम आयोजित हुए। इस दौरान डॉ. सोनी वर्मा ने नीदरलैंड में साइकिल के महत्व को समझाया। यहां की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने के लिए सरकार ने साइकिल के उपयोग को खासा बढ़ावा भी दिया है। सोनी वर्मा ने बताया ष्वर्ल्डवार 2 के समय नीदरलैंड सरकार ने यातायात के साधन के रूप में साइकिल की अहमियत पहचानी और पूरे शहर को दोबारा बसाया। यहां रोजाना कतारों में लोग साइकिल चलाकर ऑफिस जाते नजर आते हैं। इसी वजह से यहां के लोग स्वस्थ्य रहते हैं।ष्
विश्वरंग के तीसरे दिन स्वीडन में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुए। जिनमें भाव तरंग, गीत-गज़ल,टैगोर और इकबाल एवं अटलांटिक से पैसिफिक तक का मंचन हुआ। इन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों ने जमकर तालियां बटोरी और अपनी कला से दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया।
विश्वरंग की अगली कड़ी में त्रिनिदाद देश में सर्वप्रथम लय ताल और नृत्य (ओडिशी,कुचिपुड़ी), युवा प्रतिभा, कलाकारों से मिलिए कार्यक्रम का आगाज हुआ।
वहीं इस कार्यक्रम के दौरान कलाकारों और दर्शकों के बीच संवाद भी हुआ। जिसमें विश्वरंग महोत्सव को लेकर कई बिंदुओं पर चर्चा हुई।
महोत्सव के तीसरे और अंतिम दिन यूक्रेन में भी कार्यक्रम आयोजित हुए। जिनमें नृत्य पर चर्चा, सुषमबेदी की याद में दास्तानगोई, साथ ही पुस्तक विमोचन भी हुआ। विश्वरंग उत्सव की सफलता के बाद अब 20 से 29 नवंबर के बीच टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य और कला महोत्सव के दूसरे संस्करण का आयोजन होगा।
विश्व रंग 2020 में स्कोप स्कूल की प्रस्तुति
रविंद्र नाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विश्वरंग 2020 के अंतर्गत स्कोप स्कूल द्वारा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर छात्रों के लिए कलात्मक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की गई जिसमें विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर भारतीय संस्कृति एवं कला के प्रति आपने उत्साह को दर्शाया।
इस क्रम में आयोजित होने वाली गतिविधियाँ रंगोली प्रतियोगिताएपूजन थाली सजावटएदीया और लालटेन सजावटएएकल एवं समूह नृत्य थे।सभी गतिविधियाँ फ़ेस्टिवल ऑफ इंडिया;भारत के पर्वद्ध थीम को केंद्र में रखकर आयोजित की गई थी। छात्र छात्राओं ने अपनी ऑनलाइन प्रविष्टियां वाट्सअप एवं मेल के माध्यम से स्कूल में भेजी।विद्यालय की प्राचार्य डॉण् प्रकृति चतुर्वेदी ने सभी प्रतिभागियों का उत्साह वर्धन किया और उन्हें विश्वरंग जैसे वृहत्त कार्यक्रम में भागीदारिता करने की बधाई दी। उन्होने विश्वरंग से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए http://www.vishwarang.com/ वेबसाइट पर विजिट करने के लिए कहा।




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