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दादुलाल डाण्डोलिया द्वारा बधाई एवं नौरता नृत्य की प्रस्तुति
एकाग्र ‘गमक:रंग मध्यप्रदेश’ श्रृंखला अंतर्गत आदिवासी लोककला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा आज 06 नवम्बर, 2020 को श्री मंशाराम द्वारा कोरकू गदली और थापटी श्री दिनेश भार्वे द्वारा गुदुमबजा श्री दादुलाल डाण्डोलिया द्वारा बधाई एवं नौरता नृत्य की प्रस्तुति हुई| प्रस्तुति की शुरुआत भारिया जनजाति के सर्वाधिक लोकप्रिय समूह नृत्य भड़म से हुई,
यह नृत्य भारियाओं द्वारा शादी-विवाह के अवसर पर किया जाने वाला नृत्य है, इसमें ढोल, टिमकी वादक पहले घेरा बनाते हैं, घेरे के बीच का एक नर्तक लकड़ी उठाकर दोहरा गाता है| दोहरा के अंतिम शब्द से बाद्य बजना शुरू हो जाते हैं, ढोलक की थाप और टिमकी की ताल पहले मंद गति से उठती है और तीब्र से तीव्रतर होती जाती है| ढोल वादकों के पैर समानान्तर गति में धीरे-धीरे सरकते हैं| उसके बाद कोरकू जनजातीय नृत्यगदली की प्रस्तुति हुई| गदली नृत्य में- स्त्री के एक हाथ में चिट्कोला तथा दुसरे हाथ में रुमाल और पुरुषों के हाथ में घुन्घुरुमाला तथा पंछा होता है| कोरकू नृत्यों में ढोलक की प्रमुख भूमिका होती है| ढोलक की लय और ताल पर कोरकू हाथों और पैरों की विभिन्न मुद्राओं को बनाते हुए गोल घेरे में नृत्य करते हैं|थापटी नृत्य- बैशाख के महीने में किये जाने वाला स्त्री प्रधान समूह नृत्य है| युवतियां अर्धवृत्त में नृत्य करती हैं| इनके हाथों में बजाने के लिए झांझ और चिटकोरा रहता है| इस नृत्य में नृत्यांगनाएं अपनी कटि को आगे की ओर झुकाती हुई पैरों की विशेष मुद्राओं से क्रमशः आगे-पीछे, दायें-बायें होकर नृत्य करती हैं| बधाई- बुन्देलखण्ड अंचल में जन्म विवाह और तीज-त्यौहार के अवसर पर बधाई नृत्य किया जाता है| इस नृत्य में स्त्री एवं पुरुष दोनों ही उमंग से भरकर नृत्य करते हैं| मंच पर जब बधाई नृत्य समूह के रूप में प्रस्तुत होता है, तब इसमें गीत भी गए जाते हैं|
गुदुमबाजा- गोंड जनजाति की उपजाति ढुलिया का पारंपरिक नृत्य है| कलाकारों द्वारा गुदुम वाद्य, ढफ, मंजीरा, शहनाई, टिमकी आदि वाद्यों के जनजातियों के पारंपरिक गीतों की धुनों पर वादन और नर्तन करते हैं|
नौरता– नवरात्री के अवसर पर कुँवारी कन्याओं द्वारा इसका आयोजन होता है| यह पूरे नौ दिन तक चलता है| घर के बाहर एक अलग स्थान पर नौरता बनाया जाता है| नौरता में सुअटा, चंदा, सूरज तथा नीचे रंगीन लाइनें बनाई जाती हैं| कुँवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की मनोकामना के लिए नौरता नृत्य करती हैं




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