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राजहंस का तबला वादन एवं अरुण मोरेने के सितार वादन की प्रस्तुति
एकाग्र ‘गमक:रंग मध्यप्रदेश’ श्रृंखला अंतर्गत उस्ताद अलाउद्दीन संगीत एवं कला अकादमी द्वारा आज गांधार राजहंस, खण्डवा का तबला वादन एवं अरुण मोरेने द्वारा सितार वादन की प्रस्तुति हुई | प्रस्तुति की शुरुआत तबला वादन से हुई, जिसमे ताल तीन ताल, पेशकार कायदे, कुछ गतें और टुकड़े-मुखड़े प्रस्तुत किये|
आपको तबले की प्रारंभिक शिक्षा आपके ताउजी सुभाष कंपुवाले जी से प्राप्त हुई। वाणिज्य में स्नातक एवं तबला विषय से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। आप आकाशवाणी ग्वालियर के नियमित कलाकार है। वर्तमान में आप इंदौर के श्री उल्हास राजहंस जो कि आकाशवाणी इंदौर में पदस्थ है, उनके मार्गदर्शन में आप तबले का उच्च प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है। आप को देश के प्रतिष्ठित संगीत समारोह जैसे कि तानसेन संगीत समारोह ग्वालियर, शंकरलाल महोत्सव दिल्ली, अमीर खां समारोह, इंदौर, कालिदास समारोह उज्जैन इन सभी में अपने तबले की सफल प्रस्तुति करने का सुअवसर प्राप्त हुआ है। आपने देश के ख्यातिनाम कलाकारों के साथ तबले की संगती की। वर्तमान में आप शासकीय संगीत एवं ललित कला महाविद्यालय, खण्डवा में संगतकार तबले के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे है।
मंच पर- हारमोनियम पर श्री जीतेन्द्र शर्मा ने संगत दी|
अगली प्रस्तुति में श्री अरुण मोरोणे द्वारा सितार वादन की प्रस्तुति हुई, जिसमे श्री मोरोणे द्वारा राग रागेश्री में आलाप, जोड़, झाला l उसके पश्चात् विलम्बित एवं मध्यलय त्रिताल में निबद्ध दो बंदिशे प्रस्तुति कीं l
श्री मोरोणे का जन्म एक संगीत विज्ञ परिवार में हुआ, उन्होंने पांच वर्ष की आयु से ही अपने पिता श्री गोपाल राव मोरोणे से गायन की शिक्षा प्राप्त करना आरम्भ कर दिया था | सितार वादन की प्रारंभिक शिक्षा श्री वासुदेव राव आष्टे वाले जी से प्राप्त की एवं डागर घराने के ख्यात ध्रुपद गायक उस्ताद जिया फरीउद्दीन डागर से मार्गदर्शन प्राप्त किया| श्री मोरोणे ने सितार वादन का प्रशिक्षण हमदाद्खानी घराने के प्रसिद्द सितार वादक एवं गुरु पंडित विमलेन्दु मुखर्जी से प्राप्त किया | आप वर्ष 1992 से आकाशवाणी दूरदर्शन के ‘ए’ ग्रेड कलाकार हैं एवं देश के विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं| आपके साथ तबला पर – श्री गांधार राजहंस ने संगत दी|




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