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मालवा अंचल के ‘मटकी’ नृत्य की प्रस्तुति
मध्यप्रदेश राज्य की स्थापना 1 नवंबर के अवसर को संस्कृति विभाग रंग मध्यप्रदेश के रूप में मनाते हुए जनजातीय संग्रहालय में पूरे माह सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन कर रहा है। इसमें विभाग की सभी अकादमियों की भागीदारी से कार्यक्रम हो रहे हैं।
कालिदास अकादमी की गतिविधियां उज्जैन तथा शेष भोपाल में शाम 6:30 बजे से आयोजित हैं। इसकी शुरुआत आज से हुई। आज 01 नवम्बर, 2020 को श्री कमल सिंह मरावी एवं साथियों द्वारा गोण्ड जनजातीय नृत्य ‘करमा’ और ‘सैला’, श्री प्रताप भील और साथियों द्वारा नृत्य ‘भगोरिया’, श्री संजय महाजन और साथियों द्वारा निमाण अंचल का ‘गणगौर’ एवं झालरिया ‘नृत्य’ और सुश्री प्रतिभा रघुवंशी और साथियों द्वारा मालवा अंचल के ‘मटकी’ नृत्य की प्रस्तुति हुई | प्रस्तुति की शुरुआत श्री मरावी और साथियों द्वारा ‘करमा’ नृत्य से हुई, गोण्ड जनजातीय नृत्य, करमा – अतिथियों के आगमन पर युवक-युवतियों द्वारा मिलकर किया जाने वाला नृत्य है इसमें इसमें गीतों के माध्यम से सवाल-जबाव भी किये जाते हैं वहीं सैला नृत्य- दशहरे से शुरू होकर फागुन मास तक किया जाता है, जो अच्छी फसल आने पर खुशियों का प्रदर्शन के रूप में मनाया जाता है |
गोंड– मध्यप्रदेश के मंडला जिले के चाड़ा के जंगलों के आस-पास रह्नेवाली जनजाति है और इनके नृत्यों में जीवन और प्रकृति के सुन्दर आयाम देखने को मिलते हैं| इन नृत्यों को देखते हुए जहाँ एक ओर हमें उनकी पारम्परिक वेशभूषा, संगीत और नृत्य का कौशल देखने को मिलता है वहीं दूसरी ओर इन नृत्यों के माध्यम से गोण्ड आदिवासियों की आस्थाएं उनके कर्मकांड और स्मृतियों के साथ चली आ रही महान विरासत के दर्शन भी होते हैं|
भील जनजातीय नृत्य ‘भगोरिया’, भील– मध्यप्रदेश की झाबुआ,अलीराजपुर, धार और बड़वानी क्षेत्र में निवास करने वाली प्रमुख जनजाति है। फागुन मास में होली के सात दिन पूर्व से आयोजित होने वाले हाटों में पूरे उत्साह और उमंग के साथ भील युवक एवं युवतियों द्वारा पारंपरिक रंग-बिरंगे वस्त्र,आभूषण के साथ नृत्य किया जाता है, जिसे भगोरिया नृत्य कहते हैं| फसल कटाई के पश्चात् वर्षभर के भरण-पोषण के लिए समुदाय इन हाटों में आता है| भगोरिया नृत्य में विविध पदचाप समूहन पाली, चक्रीपाली तथा पिरामिड नृत्य मुद्राएँ आकर्षण का केंद्र होती हैं| रंग-बिरंगी वेशभूषा में सजी-धजी युवतियों का श्रृंगार और हाथ में तीरकमान लेकर नाचना ठेठ पारंपरिक व अलौकिक संरचना है|
गणगौर नृत्य
चैत्र मास की नवरात्रि में मध्यप्रदेश के निमाड़ अंचल में गणगौर का पर्व बड़े ही श्रद्धा भाव एवं हर्षोल्लास से मनाया जाता हैl शिव एवं पार्वती के रूप में धनियर राजा एवं रनु बाई के रथ सजाए जाते हैं l महिलाएं इन रथों को आंगन में रखकर झालरिया नृत्य करती हैं वहीं पुरुष और स्त्रियां सामूहिक रूप से इन रथों को सिर पर रखकर झेला नृत्य करते हैं l ढोल और थाली की थाप पर थिरक उठते हैं lमध्यम लय से शुरू होकर द्रुत लय में गणगौर नृत्य अपने पूर्णता को प्राप्त करता है l
झालरिया लोक नृत्य नाटिका
मध्य प्रदेश का निमाड़ अंचल रनु बाई यानी गणगौर का पीहर माना जाता है चैत्र मास में रनु बाई अपने पीहर निमाड़ अंचल आती है उन्हें ससुराल ले जाने के लिए क्रमशः ससुर, जेठ एवं देवर आते हैं लेकिन वह उनके साथ जाने से मना कर देती है, अपनी सहेलियों के साथ फूलपाती का खेल खेलना चाहती है l अंत में शिव स्वरूप धनियर राजा स्वयं उन्हें विदा कराने आते हैं और देवी को उनके साथ भारी मन से विदा होना पड़ता है |
मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित युवा उत्सव में नृत्य विधा में स्वर्ण पदक प्राप्त श्री संजय महाजन राजनीति एवं कथक नृत्य में स्नातकोत्तर हैं
कथक नृत्य की शिक्षा गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत प्रख्यात नृत्याचार्य श्री राजकुमुद जी ठोलिया (जयपुर घराना) उज्जैन तथा रायगढ़ घराने की प्रसिद्ध नृत्य गुरु डॉ सुचित्रा जी हरमलकर से प्राप्त की है l मध्य प्रदेश के सभी प्रतिष्ठित मंचो पर नृत्य प्रदर्शन के अलावा देश के कई प्रतिष्टित मंचों पर प्रस्तुति दे चुके हैं |
मटकी नृत्य– प्रस्तुति में वे पारंपरिक रूप से गाई जाने वाली गणपति की आराधना, मालवा की एक पारंपरिक रचना पनिहारी नृत्य, जिसमें महिलाएं सिर पर गगरी लेकर जल भरने जाती हैं और साथ-साथ नृत्य और गीत भी गाती हैं इसके बाद त्योहारों से जुड़ा हुआ लोकगीत (होली गीत), मालवा के सुप्रसिद्ध कथानक डग-डग रोटी पग-पग नीर की कथा कहता हुआ एक गीत ‘प्यारो लागे रे म्हारो मालवा रे’ नृत्य के माध्यम से मालवा की माटी की विशेषताओं का वर्णन किया गया, इस नृत्य को अनेक अवसरों पर महिलाओं द्वारा किया जाता है विशेष रूप से विवाह समारोह आदि में, इसमें महिलाएं मटक मटक कर नृत्य करती हैं और इसीलिए इसे मटकी नृत्य भी कहा जाता है |
सुश्री प्रतिभा रघुवंशी एलची शास्त्रीय कथक नृत्य के साथ साथ लोकनृत्य की भी निष्णात नृत्यांगना हैं । आपने देश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुई दी है|




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