सिंधिया ने विधायक पद से इस्तीफा देने के बदले 50 करोड़ का प्रलोभन दिया थाः सिंघार

कांग्रेस विधायक पूर्व मंत्री श्री उमंग सिंघार द्वारा पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया गया है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उन्हें विधायक पद से इस्तीफा देने के बदले 50 करोड़ रुपए का प्रलोभन दिया था। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हो रहे 25 विधानसभा क्षेत्रों के उप चुनावों के लिए सिंधिया जिम्मेदार हैं क्योंकि उनके द्वारा उनके समर्थकों एवं अन्य कांग्रेस विधायकों को भाजपा से मोटी-मोटी करोड़ों की राशि का भुगतान कराकर विधायकों से त्याग पत्र दिलाकर प्रजातांत्रिक तरीके से चुनी कांग्रेस सरकार को गिराया गया है।

सिंघार ने आरोप लगाया है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए कांग्रेस पार्टी के हाथ के पंजे पर निर्वाचित 22 विधायको को भाजपा के साथ मिलकर उन्हें खरीदकर कांग्रेस पार्टी की सरकार को अस्थिर कर दिया और उसी का परिणाम है कि आज कोविड-19 की महामारी में कोरोना जैसे संक्रमण फैलने से भयभीत लाखों मतदाताओं को मतदान करने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। जिसके लिये सीधे-सीधे ज्योतिरादित्य सिंधिया जिम्मेदार हैं। क्योंकि उन्हांेने ही राज्य सभा में जाने के लिए प्रदेश की चुनी हुई सरकार को गिराया और विधायकों को करोड़ों रूपयों का नगद भुगतान कराया जिसका उदाहरण स्वयं कांग्रेस विधायक पूर्व मंत्री उमंग सिंघार की स्वीकारोक्ति है कि उन्हें श्री सिंधिया द्वारा 50 करोड़ रूपये नगद एवं मंत्री पद देने का प्रलोभन दिया गया था।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता जेपी धनोपिया ने एक और शिकायत चुनाव आयोग को सौंपते हुए कहा कि छतरपुर कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह एवं पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा द्वारा बड़ा मलहरा विधानसभा उप चुनाव को भाजपा के पक्ष में प्रभावित करने के उद्देश्य से कांग्रेस विधायक आलोक चतुर्वेदी को राजनैतिक द्वेषवश परेशान किया जा रहा है। बडा मलहरा विधानसभा क्षेत्र से प्रदुमन सिंह लोधी भाजपा प्रत्याशी है, जिन्हें सत्तारूढ़ भाजपा के प्रशासनिक अधिकारियों का वरदहस्त प्राप्त है, छतरपुर कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह एवं पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा द्वारा भारतीय जनता पार्टी का खुले रूप से प्रचार किया जा रहा है, कांग्रेस कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों पर झूठे प्रकरण दर्ज किए जा रहे है, यहां तक कि कांग्रेस पार्टी के निर्वाचित जनप्रतिनिधि विधायक आलोक चतुर्वेदी को प्रदेश सरकार के मंत्री भाजपा नेता गोपाल भार्गव के इशारे पर उन्हें अपना व्यवसाय बंद करने की धमकी दी जा रही, भाजपा प्रत्याशी द्वारा व्यक्तिगत रूप से धमकाया जा रहा है, जो कि सीधे सीधे चुनाव आचार संहिता का खुला उल्लंघन है।
धनोपिया ने आयोग से मांग की है कि छतरपुर कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह एवं पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा जो कि भारतीय जनता पार्टी के ऐजेंट के रूप में कार्य कर प्रचार प्रसार कर रहे है और कांग्रेस के निर्वाचित जनप्रतिनिधि विधायक आलोक चतुर्वेदी के व्यवसायों को बंद करने एवं उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रकरणों में फसाने की धमकिया दी दे रहे हैं जो आचार संहिता का खुला उल्लंघन है, इसलिए छतरपुर कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह एवं पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा को तत्काल छतरपुर जिले से अन्य जिले में स्थानांतरित किया जावे ताकि बड़ा मलहरा विधानसभा का उपचुनाव प्रभावित न हो और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान संपन्न हो सके।

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