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राष्ट्रव्यापी मांग दिवस पर आशा एवं सहयोगियों ने नियमित कर्मचारी बनाने की मांग की
अखिल भारतीय आशा कोर्डिनेशन कमेटी के आह्वान पर राष्ट्रीय व्यापी मांग दिवस के दौरान प्रदेश के दो दर्जन से अधिक जिलों में आशा एवं सहयोगियों ने प्रदर्शन करते हुये प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप। प्रधानमंत्री के नाम सौंपे गये ज्ञापन में आशा ऊषा आशा सहयोगी एकता यूनियन मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को लागू करने के काम करने वाली आशा एवं आशा सहयोगियों को स्वास्थ्य कर्मचारी के रूप में नियमित करने एवं न्यूनतम वेतन देने की मांग की।
उल्लेखनीय है कि भारतीय श्रम सम्मेलन के 45वें सत्र ने आशा एवं आशा सहयोगी सहित योजना कर्मियों को कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम वेतन एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था। इसके 7 वर्ष बीत जाने के बाद भी सरकार ने इसे लागू नही किया।
प्रदर्शन की अन्य मांगों में आशाओं सहित सभी अग्रिम पक्ती के कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण देन, खास कर रेड जोन में एवं कंटेनमेंट एरिया में काम करने वाले आशाओं को पी.पी.ई. किट देने, सभी फ्रं टलाइन वर्कर्स का नियमित रूप से निशुल्क कोविड-19 के टेस्ट किए जाने, सभी फ्रं टलाइन वर्कर्स के लिए 50 लाख का बीमा सुनिश्चित करने, आशाओं के परिवार के कोविड-19 के इलाज को शामिल करने, कोविड-19 ड्यूटी में लगी आशा एवं सहयोगियों सहित सभी स्वास्थ्य एवं परियोजना कर्मियों को 25000 रु. की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने, उन सभी परिवारों को जो करदाता नही है-निशुल्क कोविड-19 टेस्ट एवं इलाज उपलब्ध कराने, सभी अस्पतालों एवं कोरांटाईन सेंटरों में पर्याप्त सुविधायें सुनिश्चित करने, सभी जरूरतमंदोंं को पर्याप्त राशन एवं सभी गैर करदाता परिवारों के लिये 6 माह तक 7500 रुपए देने, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं एवं स्वास्थ्य के ढांचे को मजबूत करने, स्वास्थ्य क्षेत्र के लिये जीडीपी का 6 प्रतिशत आवंटित करने, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं एवं स्वास्थ्य के ढांचे के निजीकरण को रोकने, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के अधिकार को संवैधानिक अधिकार बनाने, पर्याप्त वित्तीय आवंटन के साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन(एनएचएम)को सरकार का स्थाई सार्वभौमिक स्वास्थ्य कार्यक्रम बनाने की मांगें शामिल की है।
मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में राज्य सरकार से मांगी अतिरिक्त वेतन
आशा एवं आशा सहयोगी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग की सभी योजनाओं को जनता के बीच लागू करने का काम करती है। इनकी काम की देखरेख करने वाले सभी नियमित कर्मचारी है, लेकिन आशा तो न्यूनतम वेतन से भी वंचित है। अपनी जान को जोखिम में डाल कर काम कर रही आशाओं को केवल 2000 रुपये मासिक का भुगतान किया जा रहा है। अन्य राज्य सरकारें आशाओं को अपनी ओर से अतिरिक्त वेतन दे रही है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार आशाओं को अपनी ओर से कुछ भी नही दे रही है। जबकि दूसरे कर्मियों को सरकार अपनी ओर से अतिरिक्त वेतन दे रही है। मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गये ज्ञापन में आशा ऊषा आशा सहयोगी एकता यूनियन (सीटू)ने राज्य सरकार की ओर से तत्काल अतिरिक्त वेतद देने की मांग की।
प्रदेश में कोविड महामारी के खिलाफ काम करने वाली आशाओं को शासन केवल एक मास्क एवं सैनिटराईजर का एक छोटा बोटल देते है, जबकि कंटनमेन्ट, कोरोन्टाईन क्षेत्र एवं रेड जोन में काम करने वाली आशाओं को भी ग्लब्स, पीपीई किट आदि नही दे रही है। जो उनके जीवन के साथ खिलवाड है। इसलिये कन्टनमेन्ट क्षेत्र एवं कोरोन्टाईन क्षेत्र में काम कर ही आशाओं को सुरक्षा उपकरण देने, एवं प्रदेश में मृत चार आशाओं के परिवार को 50 लाख रुपये की राशि तुरन्त उपलब्ध कराने की भी मांग की। आज के प्रदर्शन में रतलाम, इंदौर, नीमच, उज्जैन, सीहोर, भोपाल, रायसेन, होशंगाबाद, ग्वालियर, अशोकनगर, गुना, शिवपुरी, श्योपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, जबलपुर, डिंडौरी, शहडोल, अनूपपुर, रीवा सहित दो दर्जन जिलों में प्रदर्शन करते हुये ज्ञापन सौंपार हया।
सीटू राष्ट्रीय कार्यालय नई दिल्ली में हुये प्रदर्शन में सीटू राष्ट्रीय महासचिव तपन सेन, राष्ट्रीय सचिव ए आर सिन्धु, अ.भा.आशा कोर्डिनेशन कमेटी की संयोजिका रंजना नरुला ने भागीदारी की।




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