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महामारियों का लोक संस्कृति पर प्रभाव, राष्ट्रीय परिसंवाद
मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आज से छह दिन का महामारियों का लोक संस्कृति पर प्रभाव, वेब एवं आभासी माध्यमों पर आधारित, ‘राष्ट्रीय परिसम्वाद’ का आयोजन किया जा रहा है। पहले दिन कार्यक्रम के शुभारम्भ अवसर पर प्रो. धर्मेन्द्र पारे ने देश विभिन्न राज्यों से आमंत्रित सभी वक्ताओं एवं सह वक्ताओं का गूगल मीट पर स्वागत किया।
राष्ट्रीय परिसंवाद में प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित, लखनऊ (उत्तरप्रदेश), डॉ. जमुना बीनी, इटानगर (अरुणाचल प्रदेश), डॉ. बी. नंदा, राजनंदगांव (छत्तीसगढ़), डॉ. पवन अग्रवाल, लाकनाऊ (उत्तरप्रदेश), डॉ. प्रिया उद्यान, कोटायम (केरल), डॉ. दिया ठाकुर, दिल्ली, डॉ. लथा चौहान, बेंगलोर (कर्नाटक), डॉ. सावित्री बडाईट, राँची (झारखण्ड), एवं डॉ. सुभाष महतो, चाईवासा (झारखण्ड) सहित अन्य कई वक्ताओं ने चर्चा में भाग लिया। ‘राष्ट्रीय परिसंवाद’ में सभी वक्ताओं द्वारा महामारी के साथ-साथ शरीर का इम्यूनिटी सिस्टम बढ़ाने, खान-पान को दुरुस्त रखने और महामारी का लोक संस्कृति पर किस तरह प्रभाव पड़ता है और बदलाव आता है, आदि विषयों पर चर्चा की। चर्चा में कोरोना महामारी एवं लोक संस्कृति के विविध पक्षों पर विद्वान अध्येताओं द्वारा सारगर्भित रूप से पक्ष रखा गया ।




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