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64 हजार श्रमिक प्रदेश में वापस लाये गये
कोरोना संक्रमण के कारण विभिन्न प्रदेशों में फँसे मध्यप्रदेश के करीब 64 हजार श्रमिक अब तक वापस लाये जा चुके हैं। गुजरात से करीब 3 हजार लोग आज वापस लाये गये। प्रतिदिन पैदल प्रदेश में 2 से 3 हजार लोग आ रहे हैं।
अपर मुख्य सचिव एवं प्रभारी स्टेट कंट्रोल-रूम श्री आई.सी.पी. केशरी ने जानकारी दी है कि 3 मई, 2020 तक मुख्यत: गुजरात से 20 हजार, राजस्थान से 33 हजार, हरियाणा से 1350, उत्तर प्रदेश से 2 हजार श्रमिक वापस लाये गये हैं। नासिक से ट्रेन से 347 लोग भोपाल लाये गये हैं। इन सभी को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उनके गृह स्थान पहुँचा दिया गया है।
विभिन्न जिलों में फँसे 43 हजार श्रमिकों को पहुँचाया गृह स्थान
प्रदेश के विभिन्न जिलों में फँसे मध्यप्रदेश के ही करीब 43 हजार श्रमिकों को उनके गृह स्थान पहुँचा दिया गया है। केशरी ने बताया है कि तमिलनाडु, केरल, आंध्रप्रदेश, कर्नाटका, गोवा, हरियाणा, पंजाब एवं गुजरात में फँसे श्रमिकों को वापस लाने के लिये रेल मंत्रालय से ट्रेन उपलब्ध करवाने की कार्यवाही की जा रही है।
प्रदेश सरकार, लॉकडाउन में अन्य राज्यों में फंसे मजदूरों को वापस लाने के लिए इंतजाम में जुटी है। वहीं प्रदेश में विभिन्न हिस्सों में अन्य प्रदेशों के मजदूरों को भी उनके राज्य में पहुँचाया जा रहा है।
पिछले दिनों हरदा जिला प्रशासन द्वारा उत्तरप्रदेश के 362 मजदूरों को 12 बसों से उनके राज्य के लिये रवाना किया गया। तय रूट के अनुसार 4 बस प्रयागराज और 8 बस झाँसी के लिये रवाना की गईं। इन मजदूरों के स्वास्थ्य की जांच कर प्रमाण पत्र दिए गए और सभी के लिये भोजन की व्यवस्था भी की गई। इनमें से कई मजदूर महाराष्ट्र राज्य के शहरों से घर की ओर पैदल निकले पड़े थे और आते-आते हरदा में रूके, जिन्हे जिला प्रशासन द्वारा रूकने के साथ ही भोजन की भी व्यवस्था की गई।
औरंगाबाद से पैदल चलकर आने वाले मजदूर राजेन्द्र, हरभजन ने अपनी व्यथा बताई कि लॉक डाउन के चलते मजदूरी मिलना बंद हो गई और राशन-पानी की किल्लत होने के बाद वे अपने घर पैदल ही निकल पड़े। हरदा आकर उन्हें जो सुकून मिला उसे हमेशा याद रखेंगे। जिला प्रशासन द्वारा ठहरने की व्यवस्था के साथ ही भोजन उपलब्ध करवाया गया। अब उन्हें बस द्वारा घर भिजवाया जा रहा है।
उत्तरप्रदेश के जिला महोवा और चन्दोली जिले के 45 मजदूर बुरहानपुर में काम करते थे। कुछ दिन वहीं रहें पर लम्बे लॉकडाउन के कारण उन्होंने घर जाने का निर्णय लिया और किसी तरह हरदा पहुँचे। मजदूर हबीव, दीनेन्द्र कुमार, महेन्द्र, रवि, शशि, और राजू ने बताया कि जिला प्रशासन ने न केवल उन्हें उपयुक्त स्थान पर ठहराया अपितु खाने-पीने की बेहतर व्यवस्थाएं करने के बाद उन्हें बसों से प्रस्थान कराकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगा दी है।




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