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सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ी, मंत्री-विधायकों सहित कई समर्थकों के इस्तीफे
मध्यप्रदेश की राजनीति में सात दिन से चल रहा सियासी घमासान होली के रंग में पूरी तरह रंगीन हो गया और कांग्रेस की राजनीति के खेमे की अगुवाई करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने से भूचाल आ गया। सोमवार रात तक चला उन्हें मनाने का सिलसिला चला लेकिन सोमवार को स्व. माधवराव सिंधिया की 75वीं जयंती और होली के दिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा सोशल मीडिया पर वायरल किया और कुछ देर बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए पार्टी से निष्कासित करने का आदेश किया।
सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने से मध्यप्रदेश की राजनीति में ऐसा भूचाल आया है कि कमलनाथ सरकार खतरे में पड़ गई है। सिंधिया के गुट के छह मंत्रियों तथा 13 विधायकों ने बेंगलुरू से इस्तीफा भेजा है तो कुछ बिसाहूलाल सिंह, मनोज चौधरी, एंदलसिंह कंषाना जैसे विधायकों के पृथक से इस्तीफे आए हैं। बिसाहूलाल सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास पर पहुंचकर दोपहर में भाजपा ज्वाइन की। कंषाना और चौधरी का इस्तीफा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस प्रकार कांग्रेस के पास आज की स्थिति में 92 विधायक बचे हैं जिससे कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई है।
बेंगलुरू से सिंधिया समर्थक मंत्र और विधायकों के सामूहिक इस्तीफे की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा राज्यपाल लालजी टंडन के नाम छह मंत्रियों इमरती देवी, तुलसीराम सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, डॉ. प्रभूराम चौधरी, महेंद्र सिंह सिसौदिया व को अपने मंत्रिमंडल से निकालने का पत्र भेजा। दूसरी तरफ सिंधिया के इस्तीफे के बाद कांग्रेस में उनके समर्थकों के इस्तीफे होने लगे और रात तक कई जिला अध्यक्षों, संगठन पदाधिकारियों तथा अन्य नेताओं के इस्तीफे हो गए। कांग्रेस दफ्तर के सामने उनका पुतला जला दिया गया और पीसीसी में उनके चुनाव अभियान समिति अध्यक्ष की हैसियत से आवंटित कक्ष के बाहर की नाम पट्टिका तो़ड़ दी गई।




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