प्रदूषण फैला रही फ्लाई ऐश के उपयोग के लिए सरकार बनाएगी नीति

प्रदेश के थर्मल पॉवर प्लांटों में प्रदूषण फैला रही फ्लाई ऐश के उपयोग के लिए सरकार जल्द ही नई नीति बनाएगी। थर्मल पॉवर प्लांटों में सालाना लाखों टन फ्लाई ऐश निकल रही है। इसमें से बमुश्किल 40 फीसदी फ्लाई ऐश का ही उपयोग हो पा रहा है। फ्लाई ऐश के उपयोग पर आयोजित कार्यशाला में शामिल होने आए पीडब्लयूडी और पर्यावरण प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव ने यह बात कही। उन्होंने आयोजकों से कहा कि वे तीन दिवसीय कार्यशाला में निकलने वाले निष्कर्स का डाटा उन्हें उपलब्ध कराएं। यह डाटा सरकार को फ्लाई ऐश के उपयोग पर बनने वाली नीति में काम आएगा।

पीएस ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ भी प्रदेश में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर चिंतित हैं। प्रदूषण कम करने की दिशा में हर संभव प्रयास सरकार द्वारा किए जा रहे हैं। इस कार्यक्रम में सीएसआईआर एएमपीआरआई भोपाल के डायरेक्टर डॉ. अविनाश कुमार श्रीवास्वत, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव आरएस कोरी, ग्रीन एस्कॉन से सुधीर पॉलीवाल, एफएमपीसीसीआई के वॉयस प्रसीडेंट दिवेंदर पॉल सिंह चावला, सर्च एंड रिसर्च से डॉ. मोनिका जैन, एनजीटी के रजिस्ट्रार सुशील कुमार चौहान सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद थे। यह अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार फेडरेशन आफ मध्य प्रदेश, चैम्बर ऑफ कॉमर्स, ग्रीन एश फाउंडेशन, सीएसआईआर-एम्प्री, और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल का सयुंक्त तत्वाधान में सीएसआईआर-एम्प्री के सभागार में हो रहा है।
सेमिनार संयोजक सुधीर पालीवाल ने बताया कि मप्र बिजली के लिए कोयले पर निर्भर है। देश का 8 फीसदी कोयला मप्र में है। इस कोयले से 12400 मेगावॉट बिजली पैदा की जा रही है। इससे 8.94 मिलीयन टन फ्लाई ऐश निकल रही है, लेकिन इसमें से ज्यादातर फ्लाई ऐश का उपयोग नहीं हो पा रहा है। हमारे देश के कोयले में 40 फीसदी फ्लाई ऐश है। इस वजह से इसके उपयोग से ज्यादा मात्रा में फ्लाई ऐश निकल रही है, लेकिन इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के थर्मल पॉवर प्लांट से निकलने वाली ऐश का उपयोग नहीं हो पाता है। यह ऐश थर्मल पॉवर प्लांट के आसपास के गांव और खेतों तक को प्रदूषित कर रही है। पॉलीवाल ने कहा कि मप्र में बड़ी संख्या में रोड और फ्लाई ओवर बन रहे हैं, लेकिन इनमें फ्लाई ऐश का उपयोग नहीं हो रहा है। ईंटों में सिर्फ 8 फीसदी फ्लाई ऐश का उपयोग हो रहा है। यही वजह है कि इसकी मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि थर्मल पॉवर प्लांटों में फ्लाई ऐश के ढेर लग गए हैं।
एफएमपीसीसीआई के वॉयस प्रसीडेंट दिवेंदर पॉल सिंह चावला ने कहा कि मप्र में मंदी के दौर में भी उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, यह अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पानी और पर्यावरण को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की जरूरत है। थर्मल पॉवर फ्लाई ऐश ब्रिक्स इंडस्ट्री को प्राथमिकता दी जाए। प्रदेश में इस इंडस्ट्री को बढ़ावा नहीं मिल रहा है। मिट्टी से ईंटें बनाए जाने से खेतों की उर्वरता नष्ट हो रही है। इसे बचाने के लिए सरकार को नीति बनाए जाने की जरूरत है।
इन विषयों पर हुई चर्चा
इस अंतर्राष्ट्रीय सेनीमार में ग्रीन बिल्डिंग उत्पादों, संयंत्र और पेवर ब्लॉक जैसे निर्माण उत्पादों के निर्माण पर मशीनरी, कंक्रीट, तैयार मिक्स कंक्रीट, बनाई हुई रेत, प्री कास्टवॉल पैनल, इंजीनियर लकड़ी, बांस की लकड़ी, बेकार प्लास्टिक निर्माण सामग्री आदि के इस्तेमाल के बारे में विस्तार से चर्चा हुई।

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