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2019 को आदिवासी भाषा वर्ष घोषित
भोपाल के इंदिरा गाँधी मानव संग्रहालय में आदिवासी भाषा, संस्कृति और समग्र विकास पर केन्द्रित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन आज आदिवासी वर्ग से जुड़े मुद्दों पर विषय-विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।
विचार-विमर्श के दौरान विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2019 को आदिवासी भाषा वर्ष घोषित किया है। इसका मकसद आदिवासी वर्ग की विलुप्त होती बोलियों को संरक्षित करना है। इन्हीं उद्देश्यों को लेकर आदिम-जाति कल्याण विभाग और आदिवासी समन्वय मंच, भारत ने संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की है। इस संगोष्ठी में देशभर के 200 विषय-विशेषज्ञ आपसी विचार-विमर्श के लिये भोपाल में एकत्र हुए हैं।
संगोष्ठी में नीदरलैण्ड की सुश्री जेसिका ने बताया कि उनकी संस्था ट्रायबल विस्डम विश्वभर के आदिवासियों की कला, इतिहास, गीत, जीवन-शैली, जीवन-मूल्य और जीवन-दर्शन जैसे विषयों पर विश्व समाज को जानकारी देने के लिये वेबसाइट चला रही है। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के दोहन के संबंध में आदिवासी समुदाय के सिद्धांतों की जानकारी दी। आस्ट्रेलिया से आये एक अन्य वक्ता श्री बेंजामिन ने आस्ट्रेलिया के आदिवासियों की समस्याएँ और संघर्ष की जानकारी दी। उन्होंने आदिवासियों के हितों के लिये वहाँ की सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी। इसी सत्र में श्री विपिन जोजो ने फिनलैण्ड के सामी आदिवासी समुदाय को वहाँ की सरकार द्वारा दी गई स्वायत्तता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आदिवासियों के नीति-निर्धारण में आदिवासी समुदाय के मतों को शामिल किया जाता है।
आज दूसरे दिन आदिवासी भाषा एवं संस्कृति, आदिवासी ज्ञान, परम्परा एवं स्वास्थ्य, आदिवासी भाषा एवं शिक्षा का भविष्य, भूमि, जंगल एवं पानी पर आदिवासियों का वैश्विक दृष्टिकोण, आदिवासी अर्थव्यवस्था एवं वैश्वीकरण, आदिवासी वर्ग में नेतृत्व विकास और विकास में महिलाओं की भागीदारी विषयों पर शोध प्रस्तुत किये गये। इन शोधों पर तीसरे दिन 17 नवम्बर, रविवार को भी चर्चा होगी।
संगोष्ठी के तीसरे दिन आदिवासी क्षेत्रों में कार्यरत प्रशासकों, शोधकर्ताओं और समुदाय के जन-प्रतिनिधियों के बीच विचार-विमर्श होगा। संगोष्ठी का समापन सत्र दोपहर 2 बजे होगा। समापन के दिन आदिम-जाति कल्याण मंत्री श्री ओमकार सिंह मरकाम भी मौजूद रहेंगे।




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