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कुठियाला से साढ़े छह घंटे पूछताछ, कई सवालों में उलझे, 11 को फिर बुलाया
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला एफआईआर दर्ज होने के करीब साढ़े चार महीने बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में बयान दर्ज कराने पहुंचे। उनसे करीब साढ़े छह घंटे तक चली पूछताछ में विवेचनाधिकारी ने दर्जनों सवाल पूछे। कई सवालों में वे ऐसे उलझे कि उन्होंने दस्तावेजों और नियमों की किताबें देखे बिना बताने में असमर्थता जताई तो उन्हें एकबार फिर 11 सितंबर की तारीख दी गई है। साढ़े छह घंटे में उनसे केवल दस मिनिट का खाने का ब्रेक दिया गया और शेष समय उनके वकील के सामने उनसे पूछताछ की जाती रही।
प्रो. बीके कुठियाला तमाम कोर्टों में जमानत, दुर्भावना से प्रकरण दर्ज किए जाने को आधार बनाकर केस खत्म कराने के आवेदन दे चुके हैं जिन पर उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी नहीं होने की राहत दी है। जिला अदालत उनके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई के लिए वारंट जारी कर चुका है जिसमें उन्हें 31 अगस्त तक ईओडब्ल्यू मुख्यालय में पहुंचकर बयान देने का मौका दिया गया था। इसके एक दिन पहले वे ईओडब्ल्यू मुख्यालय पहुंच गए जिससे कुर्की की अगली कार्रवाई से खुद को सुरक्षित करा सकें। कुठियाला शुक्रवार को सुबह ऑफिस टाइम के पहले ईओडब्ल्यू मुख्यालय पहुंच गए लेकिन जब दफ्तर में अधिकारी नहीं दिखाई दिए तो वे कुछ समय बाद 11 बजकर चार मिनिट पर फिर पहुंचे। महानिदेशक केएन तिवारी को अपनी उपस्थिति के बयान देने के बाद एसपी अरुण मिश्रा से मिले औऱ इसके बाद उनके बयानों का सिलसिला शुरू हुआ।
कुठियाला से पूछताछ के लिए विवेचनाधिकारी ने अपने सवालों को तैयार कर रखा था। जिन सवालों में विश्वविद्यालय के नियम और प्रक्रिया के बारे में कुछ संदेह था तो उन्होंने विवि के रजिस्ट्रार दीपेंद्र सिंह बघेल को बुलवा लिया जो पूछताछ शुरू होने के करीब आधा घंटे तक वहां रहे। दर्जनों सवालों को कुठियाला के सामने पेश किया गया। कुछ सवालों का तो उन्होंने जवाब दे दिया लेकिन कुछ सवालों पर नियम-प्रक्रिया के लिए दस्तावेजों व किताबों की जरूरत महसूस की। इसके बाद भी वे जब जवाब नहीं दे पाए तो उन्होंने और समय की मांग की। ईओडब्ल्यू ने उन्हें 11 सितंबर को दोबारा बयान देने बुलाया।




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