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बाबूलाल गौर का निधन, हजारों की भीड़ उमड़ी
1974 के बाद से लगातार 10 बार भोपाल से विधानसभा में जीत हासिल करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का बुधवार की सुबह निधन हो गया। गौर दो जून 1929 को जन्मे और युवा अवस्था में भोपाल आ गए थे। यहां कपड़ा मिल में मजदूर नेता रहे और 1972 में पहली बार चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। कोर्ट में चुनौती देने पर उनकी जीत हुई लेकिन उन्हें उप चुनाव लड़ना पड़ा। इसमें जीत के बाद वे फिर कभी नहीं हारे। आज उनकी सीट से बहू कृष्णा गौर विधायक हैं।
गौर प्रदेश के 27वें मुख्यमंत्री रहे। उन्हें 2003 में कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने वाली उमा भारती के सीएम पद से इस्तीफा दे देने के बाद सीएम बनाया गया था। पद छोड़ते समय गौर से उमा भारती ने गंगा जल से शपथ दिलाई थी कि वे जब आएंगी तो पद छोड़ देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मगर उमा भारती ने पार्टी छोड़ दी और इस बीच शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय नेतृत्व ने सीएम बनाने का सौभाग्य दे दिया। शिवराज सिंह चौहान 2018 में भाजपा सरकार के राज्य से विदा होने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शपथ ली और सबसे पहले वे गौर साहब का आशीर्वाद लेने पहुंचे थे।
भोपाल को लेकर सपने देखते रहे गौर
बाबूलाल गौर ने हमेशा भोपाल के विकास को लेकर सपने देखे। कभी पैरिस जैसी सड़कें बनाने की कल्पना की तो कभी अतिक्रमणमुक्त शहर तो कभी पशुरहित स्पॉट बनाए तो कभी हॉकर्स कॉनर्र बनाकर व्यवस्थित रूप देने का प्रयास किया। सड़कों के चौड़ीकरण, सौंदर्यीकरण जैसे सपनों को उन्होंने साकार भी किया। भारत टॉकीज, वन विहार, वीआईपी, पॉलीटेक्निक-राजभवन सहित कई अच्छी सड़कें दीं।




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