मेधा पाटकर-सेंचुरी के श्रमिकों का ‘ऐलान उपवास’ समाप्त

सेंचुरी श्रमिकों का संघर्ष 565 दिनों तक चलते हुए ‘श्रमिक दिवस’ के अवसर पर ‘श्रमिक एकता’ के ऐलान के साथ शुरू किया मेधा पाटकर और 7 सेंचुरी के स्त्री पुरुष श्रमिकों का उपवास आज समाप्त हुआ| उपवास समाप्ति के वक्त मेधा पाटकर ने कहा कि श्रमिक संगठनों, ने 90 प्रतिशत श्रमिकों की मांग, सेंचुरी मिल्स लेकर चलाने की होते हुए, उसे ठुकराकर मात्र VRS याने नगद राशि के पक्ष में अपना ठहराव पारित किया , यह ‘Unfair Labour Practice’ श्रमिकों के अहित में किया कार्य माना जाएगा | कंपनियों की मनमानी नहीं चल सकती तो श्रमिक संगठनों की मनमानी भी नहीं चलनी चाहिए |

3 दिवसीय उपवास इसीलिये था, कि आज की देश की परिस्थिति में श्रमिकों एकता, ……. जरुरी है| की हम संयुक्त ट्रेड युनियन कौंन्सिल तक सेंचुरी संघर्ष स्थिति की खबर पहुचाएंगे, उनके हस्तक्षेप की ऐलान के साथ| देश में श्रमिक संगठन भी इमानदारी से चले, यह देखेंगे | इसके लिए भी जरूरी हो तो संघर्ष करेंगे |
सेंचुरी में रही 4 युनियन्स में से एक, टेक्सटाइल मजदूर युनियन का रजिस्ट्रेशन रद्द होते हुए तथा अन्य तीन संगठनों के साथ नहि 10 प्रतिशत श्रमिक सदस्य है न हि उन्होंने सालों से कोई कागजात व रिटर्न्स रजिस्ट्रार को पेश किये हैं, इस स्थिति में युनियन्स ने कंपनी के सामने श्रमिकों के अहित में कोई मांग रखना और अडंगा डालना अन्यायपूर्ण है | उन्हीं को था यह ऐलान |
श्रमिक जनता संघ (संलग्न : हिन्दू मजदूर सभा ) की जनरल बॉडी मीटिंग भी 3 मई के रोज हुई जिसमें श्रमिकों के साथ उन्हीं के परिवारों से बड़ी संख्या में महिलाएं भी शरीक होकर श्रमिक जनता संघ की स्थानीय इकाई और कार्यकारी समिति का गठन हुआ | श्याम भदाने, सुशील विश्वकर्मा, जगदीश लाम्बा, जगन्नाथ पाटील , सुशील त्रिपाठी, अरविन्द कुमार व सतीश पाठक श्रमिक जनता संघ का कार्यभार सम्हालेंगे |
अनशनकारियों के ऐलान से प्रेरित सेंचुरी श्रमिकों ने संकल्प लेकर, सेंचुरी ने औद्योगिक न्यायाधिकरण के फैसले की अवमानना करते हुए, उसके खिलाफ म. प्र. उच्च न्यायालय में अपील याचिका दाखल करने से जो कानूनी चुनौती दी है, उसे स्वीकार करते हुए आगे बढना तय किया| साथ ही श्रमिकों की ओर से हो रही फैसले की अवमानना के मुद्दें पर सेंचुरी के खिलाफ औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत कानूनी कारवाई भी आगे बढाने को घोषणा की |
सेंचुरी जैसे कंपनी ने श्रमिकों को मिल्स चलाने देने का वायदा तोड़ने पर कंपनी की ओर से बेईमानी होगी तो हम मैदानी संघर्ष भी तेज करेंगे, यह संकल्प भी श्रमिकों ने लिया और उसके लिए यहाँ के संघर्ष के नेतृत्व में रहे साथियों ने एकता, कटिबद्धता और इमानदारी के साथ आगे बढाने की तैयारी व्यक्त की|
कल 3 मई की रात को सेंचुरी के सैकड़ों श्रमिकों ने ग्राम-सत्राटी में मानव श्रृंखला बना कर यही घोषित किया कि ‘श्रमिक मालिक बन जाए यह ऐतिहासिक लक्ष्य लेकर हमारा संघर्ष जारी रहेगा|’ सेंचुरी, जो मिल्स खोलने के लिए औद्योगिक न्यायाधिकरण के आदेश के बावजूद तैयार नहीं है, उनकी बिक्री फर्जी साबित होने के बाद जरूरी है की वह अपना वादा पूरा करें और श्रमिकों को / उनकी संस्था को मात्र एक रुपये में, बिना कर्ज बोझ के, यार्न और डेनिम दोनों मिल्स देकर चलाने का मौका दे| जबकि यही आग्रह लेकर सेंचुरी के सैकड़ो श्रमिकों का 565 दिनों से सत्याग्रह व पिछले करीबन 297 दिनों से क्रमिक अनशन भी जारी है और जारी रहेगा|
मेधा पाटकर के साथ 7 अन्य अनशनकारी ज्योति भदाने, वंदना मौर्य, कविता पवार, चंचला सोनेर व संतलाल दिवाकर, मोहन मुलेवा, वैजनाथ यादव सहित सभी अनशनकारियों का अनशन ग्राम खलघाट के समाजसेवी श्री सुशील अग्रवाल जी, श्री मनोज नाहर जी और आनंद गावडेकर जी के हस्ते में छोड़ा गया।
समाज सेवी मनोज नाहर जी ने इस वक्त कहा कि आपकी एकता और संगठन को देख कर हमें संघर्ष में योगदान देने की इच्छा होती है | श्रमिकों की हकदारी को किसी कम्पनी ने नकारना हमें मंजूर नहीं है इसलिए हम आपको समर्थन घोषित करते है | मां नर्मदा डिग्री कॉलेज के डायरेक्टर नाते मनोज नाहर ने कहा की हमारे द्वारा श्रमिकों के बच्चों के लिए 9 वी कक्षा से PG तक फीस में 50% की छूटं हमारी ओर से दी जाएगी साथ ही उन्हें यूनिफॉर्म तथा पुस्तकें आदि मदद भी दी जायेगी|
श्री गावडेकर जी ने आन्दोलन की खबर दूर तक फैलाने की जिम्मेदारी स्वीकार की|
औद्योगिक न्यायाधिकरण के समक्ष रेफरेंस प्रकरण में सेंचुरी का हमारा बहुसंख्यक संगठन, 90% श्रमिकों की ओर से अब 7 मई से evidence पेश करेगा|

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