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भारत की महान सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करना सबसे महत्वपूर्ण
उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि भारत की महान सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करना महत्वपूर्ण है। श्री नायडू कल शाम शिकागो के कला संस्थान में भारतीय समुदाय को सम्बोधित कर रहे थे।
आज से 125 साल पहले स्वामी विवेकानन्द ने जिस जगह से 1893 में विश्व धर्म संसद को संबोधन किया था, उसी शिकागो आर्ट इंस्टीच्यूट के सभागार में रविवार की देर शाम उपराष्ट्रपति ने शिकागो में बसे भारतीय लोगों को संबोधित किया। उन्होंने विदेशों में बसे भारतीयों को अपनी प्राचीन संस्कृति और मूल्यों को आज भी बरकरार रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के बड़े फैसलों से देश आज बड़े बदलाव से गुजर रहा है। देश की अर्थव्यवस्था विश्व में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है। जीएसटी की वजह से करदाताओं का दायरा बढ़ा है और कर देने वालों लोगों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। जन-धन खातों की संख्या और उनमें जमापूंजी का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार के सभी कार्यक्रमों का लक्ष्य गरीब लोगों के कल्याण का है।




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