मप्र के ई-मार्ग सॉफ्टवेयर से अन्य राज्यों की सड़कों की भी होगी मॉनीटरिंग

मध्यप्रदेश में विकसित किए गये ई-मार्ग सॉफ्टवेयर से पूरे देश में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़कों की मॉनीटरिंग की जाएगी। इस सॉफ्टवेयर का ही परिणाम है कि राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश में सबसे कम मात्र 6.16 प्रतिशत सड़कों पर मेन्टीनेंस का काम निकल रहा है। यह बात ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार की संयुक्त सचिव और एनआरआईडीए की डायरेक्टर जनरल श्रीमती अलका उपाध्याय ने कही है। श्रीमती उपाध्याय आज रोड मेन्टीनेन्स पर भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं।

संयुक्त सचिव श्रीमती उपाध्याय ने कहा कि मध्यप्रदेश में ग्रामीण सड़कों के क्षेत्र में देश में सर्वोत्तम काम किया गया है। इसका मुख्य कारण प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण का मॉनीटरिंग सिस्टम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में देश में आज तक बनाई गई 60 प्रतिशत सड़कें परफार्मेन्स गारंटी पीरियड से बाहर आ गई है, इनकी अब मरम्मत किया जाना है। इस प्रक्रिया पर सतत् निगरानी के लिए सुदृढ़ तकनीकी की जरूरत है। इस परिस्थिति में ‘ई- मार्ग’ बेहतर विकल्प है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा इस सिस्टम की प्रशंसा की गई है। इसे शीघ्र ही रोड बनाने वाले अन्य विभागों द्वारा भी लागू किया जा सकता है। उन्होंने इस सॉफ्टवेयर के लिए भोपाल एनआईसी के सीनियर टेक्निकल डॉयरेक्टर श्री विवके चितले और उनकी टीम को बधाई दी।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री सड़क विकास प्राधिकरण श्री नीतेश व्यास ने बताया कि मध्यप्रदेश में एक लाख 13 हजार 708 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें हैं। इनमें 64 प्रतिशत 73 हजार 265 किलोमीटर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क है। इन सड़कों की मरम्मत और मॉनीटरिंग करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे प्रदेश में वर्ष 2013 से ही आईजियो एप्रोच प्रणाली तथा ई-मार्ग के द्वारा आसान बनाया गया है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश की सड़कों की गुणवत्ता अन्य सभी राज्यों से बेहतर है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सड़कों के निर्माण के बाद 5 साल तक उनके रख-रखाव की जिम्मेदारी संबंधित निर्माण एजेन्सी की होती है। एजेन्सी द्वारा बेहतर कार्य किया जा रहा है कि नहीं, यह जॉचना-परखना भी एक बड़ा कार्य होता था, जिसे ‘ई-मार्ग’ सॉफ्टवेयर ने आसान बनाया है। इसके साथ ही इस सॉफ्टवेयर में पब्लिक भी सड़क की शिकायत फोटो सहित कर सकेगी। इससे भी गुणवत्ता को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

‘ई-मार्ग’ विकसित करने वाले मध्यप्रदेश एनआईसी के सीनियर टेक्निकल डॉयरेक्टर श्री विवके चितले ने सॉफ्टवेयर की कार्य-प्रणाली के बारे में विस्तार से बताया। यह सॉफ्टवेयर एण्डराइड मोबाइल पर कहीं से भी ऑपरेट किया जा सकेगा।

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