विधानसभा अध्यक्ष के परिवार ने अतिक्रमण कर स्कूल- दुकानें बनायीं: अग्रवाल

प्रदेश कांगे्रस के मीडिया प्रभारी मानक अग्रवाल ने विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा के पिता पंडित रामलाल शर्मा के नाम पर होशंगाबाद में उनके परिवार द्वारा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर चल रहे स्कूल और अवैध दुकानें बना लेने के अरोप को दोहराया है।अग्रवाल ने कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष झूठ बोल रहे हैं कि यह अतिक्रमण नहीं है। आज भी स्कूल और दुकानों की जमीन सरकारी रिकार्ड में नजूल भूमि दर्ज है। वर्तमान कलेक्टर द्वारा कराई गयी जांच में इस तथ्य की पुष्टि हो चुकी है। उन्होंने शासन से मांग की है कि शासकीय जमीन पर अतिक्रमण कर बनाये गये स्कूल और अवैध दुकानों को तत्काल तोड़ा जाये।
अग्रवाल ने अपने दावे के समर्थन में नजूल रिकार्ड का हवाला देतु हुए कहा कि पूर्व में भी तत्कालीन कलेक्टर आशीष उपाध्याय ने 29 जनवरी 2003 को मुख्यमंत्री के सचिव को सूचित किया था कि राजस्व अभिलेखों में नजूल की शीट नंबर 43 में प्लाट नंबर 15/3 ‘खेल का मैदान नजूल’ दर्ज है। इसका रकबा एक लाख 88 हजार 100 वर्गफुट है। यह जमीन एस.एन.जी. स्कूल से लगी होने के कारण इसे एस.एन.जी. स्टेडियम के नाम से जाना जाता है। कलेक्टर ने लिखा था कि यहां स्टेडियम के निर्माण के लिये नर्मदा शिक्षा समिति (एनईएस) को कार्य एजेंसी बनाया गया था। समिति होशंगाबाद मंे विद्यालय चलाती है और कलेक्टर इसके पदेन अध्यक्ष हैं।
मानक अग्रवाल ने बताया कि आजादी के पहले सन् 1929 की नजूल शीट क्रमांक 43 मेें प्लाट क्रमांक 15/1 रकबा 2 लाख 47 हजार 500 वर्गफुट हिन्दी स्कूल म्युनिस्पल के नाम से दर्ज था। इसी शीट में प्लाट क्रमंाक 15/2 एक लाख 36 हजार 776 वर्गफुट एवीएम स्कूल के नाम से दर्ज था। सरकार ने यह जमीन 1949 में नर्मदा एजुकेशन सोसायटी, होशंगाबाद को दे दी।
अग्रवाल ने कहा कि बाद में सन् 1955-56 में प्लाट क्रमांक 15/1 रकबा 2 लाख 47 हजार 500 वर्गफीट में से हिस्सा कर प्लाट क्रमांक 15/3 बनाया गया। इसका रकबा 1 लाख 88 हजार 100 वर्गफुट है। इस जमीन को सरकार ने नर्मदा एजुकेशन सोसायटी द्वारा संचालित न्यू इंग्लिश हाई स्कूल होशंगाबाद को अपने नियम और शर्तों के अनुसार दिया गया। यह तथ्य राजस्व रिकार्ड में दर्ज किया गया।
अग्रवाल ने कहा कि इसके बाद शासन ने 18 मई 1960 को यह जमीन पुनः वापस लेकर नजूल में दर्ज कर ली। अब शासन 1949 में जो प्लाट नंबर 15/2 रकबा 1 लाख 36 हजार 778 वर्गफुट नर्मदा एजुकेशन सोसायटी को दिया था, उसे भी सन् 72-73 मंे नियमों का उल्लंघन करने के कारण वापस ले लिया जो आज की तारीख तक शासन के कब्जे में है।
अग्रवाल ने बताया कि इस तरह 15/1, 15/2 और 15/3 तीनों रकबे नजूल के हैं। शासन की इस जमीन में से 15/1 के 32 हजार वर्गफुट पर अतिक्रमण कर भवन बनाकर पंडित रामलाल शर्मा स्कूल संचालित किया जा रहा है। इस पर तीन मंजिला भवन बनाया गया है, जिसका निर्माण एरिया एक लाख वर्गफुट है। यह बिना अनुज्ञा के किया गया अवैधानिक कार्य है।
अग्रवाल ने कहा कि नर्मदा एजुकेशन सोसायटी का उपयोग निजी हितों के लिए किया गया है। यहां 70 दुकानें बनाकर एक-एक दुकान की सात-सात लाख रूपये पगड़ी ली गयी और चार हजार रूपये प्रतिमाह किराया लिया जा रहा है। कलेक्टर गाइड लाइन के अनुसार यहां जमीन की कीमत बीस हजार रूपये प्रति वर्गफुट है।
मानक अग्रवाल ने कहा कि नगर पालिका का अमला जब अतिक्रमण हटाने पहुंचा, तब अचानक उच्च स्तर से आये दबाव के कारण वह चुपचाप बैरंग लौट आया। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बनते ही जमीन पर बीते 14-15 साल से शर्मा परिवार का अवैध कब्जा है।
अग्रवाल ने पूर्व में लगाये आरोपों पर अड़िग रहते हुए कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा के रसूख और दबाव के कारण अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा है। श्री शर्मा संवैधानिक पद पर हैं, जहां से वे अक्सर लोकतंत्र की रक्षा की दुहाई देते रहते हैं, अब उनके स्वयं का परिवार सरकार की नाक के नीचे खुलेआम नियम-कानून की धज्जियां उड़ाते हुए सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर रहा है। इस अतिक्रमण से शर्मा परिवार ने लगभग दो अरब रूपये का लाभ कमाया है। सरकार को इसे भी जप्त कर सरकारी खजाने में जमा करना चाहिए, ताकि यह राशि लोकहित में खर्च की जा सके।
अग्रवाल ने कहा है कि यह तो केवल एक उदाहरण है जो कलेक्टर की जांच में सामने आया है। यदि सघन जांच की जाये तो ऐसी बहुत सारी बेनामी और सरकारी संपत्ति सामने आ सकती है, जिस पर शर्मा परिवार का कब्जा है।

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