प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही सतर्क हुआ स्वास्थ्य विभाग

प्रदेश में बारिश की शुरूआत होने के साथ ही मौसमी बीमारियों जैसे दस्त-उल्टी, स्वाइन फ्लू एवं वाहक जनित रोगों (मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया) के खतरों की संभावनाओं की ध्यान में रखकर इनकी जाँच एवं उपचार के लिये स्वास्थ्य विभाग ने सभी आवश्यक तैयारियाँ सुनिश्चित की हैं। प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य द्वारा आज यहाँ मौसमी बीमारियों से निपटने के लिये तैयारियों की समीक्षा की गई। इन बीमारियों की समुचित रोकथाम एवं उपचार प्रबंधन के संबंध में दिशा-निर्देश भी जारी किये गये। प्रदेश के मैदानी स्वास्थ्य अमले को निरंतर सतर्क रहने के लिये भी कहा गया है।

राज्य-स्तर पर मौसमी बीमारियों की प्रति दिन मॉनीटरिंग के लिये राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय में कंट्रोल-रूम स्थापित किया गया है। कंट्रोल-रूम से प्रति दिन दो बार प्रात: 11-12 बजे एवं शाम की 6 बजे रिपोर्ट जारी की जायेगी, जिसके आधार पर प्रभावित जिलों के लिये आवश्यक निर्देश जारी करते हुए स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सकेगा।

प्रदेश में जिला स्तर पर भी मौसमी बीमारियों के नियंत्रण के लिये कंट्रोल-रूम संचालित होंगे। जिला कंट्रोल-रूम से प्रतिदिन सुबह 10.30 से 11.30 बजे एवं शाम को 4-5 बजे के बीच में निर्धारित प्रारूप में जानकारी राज्य-स्तर पर भेजने के निर्देश दिये गये हैं। जिला ऐपिडेमियोलॉजिस्ट, जिला मलेरिया अधिकारी एवं वरिष्ठ जिला स्वास्थ्य अधिकारी जिला-स्तर पर कंट्रोल-रूम के प्रभारी होंगे। इसके अतिरिक्त कंट्रोल-रूम से जानकारी प्रेषित करने का दायित्व संबंधित जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का होगा। राज्य एवं जिला-स्तर के कंट्रोल-रूम प्रात: 10.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक क्रियाशील रहेंगे।

कंट्रोल-रूम स्थापना की जानकारी उनके दूरभाष नम्बर के साथ सभी क्षेत्रीय अधिकारी, स्वास्थ्य कर्मचारी एवं आशा कार्यकर्ताओं को दी जा रही है। इससे वे आवश्यकतानुसार मौसमी बीमारियों तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं की जानकारी कंट्रोल-रूम पर सीधे भेज सकेंगे।

प्रदेश में 43 सेन्टीनल साइट के माध्यम से डेंगू, चिकुनगुनिया की जाँच की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इसके अतिरिक्त सभी जिलों में ग्राम-स्तर तक रैपिड डायग्नोस्टिक किट द्वारा मलेरिया जाँच की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिये मैदानी अमले को आरडी किट एवं मलेरिया पाये जाने पर पूर्ण मौलिक उपचार देने के लिये पर्याप्त मात्रा में एन्टीमलेरियल औषधियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं। सभी जिला चिकित्सालयों में गंभीर मलेरिया रोगियों की भर्ती एवं उपचार की व्यवस्था की गई है।

प्रदेश में एनआईआरटीएच जबलपुर, डीआरडीओ ग्वालियर एवं एम्स भोपाल में सिजनल इन्फ्लूऐंजा (एच-1 एन-1) की जाँच की सुविधा उपलब्ध है। पॉजिटिव पाये गये रोगियों के उपचार के लिये सभी जिलों में पर्याप्त मात्रा में टेमीफ्लू औषधि उपलब्ध करवाई गई है। वर्षा ऋतु में उल्टी-दस्त के बढ़ने की संभावना रहती है, जिसके उपचार के लिये सभी दवाएँ प्रदेश की सभी स्तर की स्वास्थ्य संस्थाओं को उपलब्ध करवा दी गई है।

प्रदेश में सभी जन-समुदाय से अपील की गई है कि मौसमी बीमारियों से बचाव एवं रोकथाम के संबंध में जागरूक रहें एवं बीमारी के नियंत्रण में सहयोग प्रदान करें।

दस्त-उल्टी, स्वाइन फ्लू एवं वाहक जनित रोगों (मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया) के खतरों की संभावनाओं की ध्यान में रखकर इनकी जाँच एवं उपचार के लिये स्वास्थ्य विभाग ने सभी आवश्यक तैयारियाँ सुनिश्चित की हैं। प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य द्वारा आज यहाँ मौसमी बीमारियों से निपटने के लिये तैयारियों की समीक्षा की गई। इन बीमारियों की समुचित रोकथाम एवं उपचार प्रबंधन के संबंध में दिशा-निर्देश भी जारी किये गये। प्रदेश के मैदानी स्वास्थ्य अमले को निरंतर सतर्क रहने के लिये भी कहा गया है।

राज्य-स्तर पर मौसमी बीमारियों की प्रति दिन मॉनीटरिंग के लिये राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय में कंट्रोल-रूम स्थापित किया गया है। कंट्रोल-रूम से प्रति दिन दो बार प्रात: 11-12 बजे एवं शाम की 6 बजे रिपोर्ट जारी की जायेगी, जिसके आधार पर प्रभावित जिलों के लिये आवश्यक निर्देश जारी करते हुए स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सकेगा।

प्रदेश में जिला स्तर पर भी मौसमी बीमारियों के नियंत्रण के लिये कंट्रोल-रूम संचालित होंगे। जिला कंट्रोल-रूम से प्रतिदिन सुबह 10.30 से 11.30 बजे एवं शाम को 4-5 बजे के बीच में निर्धारित प्रारूप में जानकारी राज्य-स्तर पर भेजने के निर्देश दिये गये हैं। जिला ऐपिडेमियोलॉजिस्ट, जिला मलेरिया अधिकारी एवं वरिष्ठ जिला स्वास्थ्य अधिकारी जिला-स्तर पर कंट्रोल-रूम के प्रभारी होंगे। इसके अतिरिक्त कंट्रोल-रूम से जानकारी प्रेषित करने का दायित्व संबंधित जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का होगा। राज्य एवं जिला-स्तर के कंट्रोल-रूम प्रात: 10.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक क्रियाशील रहेंगे।

कंट्रोल-रूम स्थापना की जानकारी उनके दूरभाष नम्बर के साथ सभी क्षेत्रीय अधिकारी, स्वास्थ्य कर्मचारी एवं आशा कार्यकर्ताओं को दी जा रही है। इससे वे आवश्यकतानुसार मौसमी बीमारियों तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं की जानकारी कंट्रोल-रूम पर सीधे भेज सकेंगे।

प्रदेश में 43 सेन्टीनल साइट के माध्यम से डेंगू, चिकुनगुनिया की जाँच की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इसके अतिरिक्त सभी जिलों में ग्राम-स्तर तक रैपिड डायग्नोस्टिक किट द्वारा मलेरिया जाँच की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिये मैदानी अमले को आरडी किट एवं मलेरिया पाये जाने पर पूर्ण मौलिक उपचार देने के लिये पर्याप्त मात्रा में एन्टीमलेरियल औषधियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं। सभी जिला चिकित्सालयों में गंभीर मलेरिया रोगियों की भर्ती एवं उपचार की व्यवस्था की गई है।

प्रदेश में एनआईआरटीएच जबलपुर, डीआरडीओ ग्वालियर एवं एम्स भोपाल में सिजनल इन्फ्लूऐंजा (एच-1 एन-1) की जाँच की सुविधा उपलब्ध है। पॉजिटिव पाये गये रोगियों के उपचार के लिये सभी जिलों में पर्याप्त मात्रा में टेमीफ्लू औषधि उपलब्ध करवाई गई है। वर्षा ऋतु में उल्टी-दस्त के बढ़ने की संभावना रहती है, जिसके उपचार के लिये सभी दवाएँ प्रदेश की सभी स्तर की स्वास्थ्य संस्थाओं को उपलब्ध करवा दी गई है।

प्रदेश में सभी जन-समुदाय से अपील की गई है कि मौसमी बीमारियों से बचाव एवं रोकथाम के संबंध में जागरूक रहें एवं बीमारी के नियंत्रण में सहयोग प्रदान करें।

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