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पांढुर्ना का गोटमार मेला, पत्थरबाजी में कई घायल
पांढुर्ना के सुरेश कांवले की सातवीं पीढ़ी है जो यहां के गोटमार मेले के लिए जाम नदी में पलाश का पेड़ गाढ़ती आ रही है। आज भी सुबह पांच बजे इस परिवार के लोगों ने जाम नदी में पलाश का पेड़ गाढ़ा और इसके बाद सांवर गांव व पांढुर्ना के लोगों ने उसकी पूजा अर्चना की। जुलूस निकालते हुए गाजे-बाजे के साथ लोगों ने नाचते-गाते हुए वहां झंडे गाढ़े।
गोटमार मेला कई दशकों से आयोजित किया जा रहा है जिसमें सांवर गांव और पांढुर्ना के लोगों के बीच पलाश के पेड़ को लेकर पथराव होता है। पांर्ढुना के लोग कुल्हाड़ी से जाम नदी में गाढ़े गए पलाश के पेड़ को काटकर ले जाते हैं। जब पेड़ काटा नहीं जाता तब तक दोनों पक्ष के लोग पत्थर फेंकते हैं। पेड़ काटे जाने के बाद पांढुर्ना में माता चंडिका के मंदिर पर उसे ले जाया जाता है और वहां पूजा अर्चना के बाद महा आरती होती है। इसके बाद मेला समाप्त हो जाता है।
आज सुबह नौ बजे से गोटमार मेला शुरू हुआ जिसमें जमकर दोनों गांव के लोगों ने एक दूसरे पर पत्थर बरसाए। इसमें करीब 100 लोग जख्मी हो चुके हैं लेकिन पेड़ अभी भी काटा नहीं जा सका है। पुलिस व प्रशासन के लोग मूकदर्शक बनकर यह नजारा देख रहे हैं। अस्थाई अस्पताल बनाकर घायलों का इलाज करा रहे हैं।




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