दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन का समापन, अब मॉरीशस में होगा 11 वां सम्मेलन

भोपाल में आयोजित दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन का समापन हो गया। इसके समापन समारोह में अगला सम्मेलन के लिए मॉरीशस को मेजबानी सौंपी गई है। इसके पूर्व मॉरीशस में 1076 में दूसरा व 1003 में चौथा सम्मलेन हो चुका है।

दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन के समापन समारोह में फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन को आना था लेकिन उनके दांतों की सर्जरी के कारण वे नहीं आ सके। उन्होंने आयोजन समिति के अनिल माधव दवे को पत्र लिखकर माफी भी मांगी है। उनके नहीं आने से यह कयास लगाए जा रहे थे कि समापन समारोह का आकर्षण कम हो जाएगा लेकिन वैसा नहीं रहा। भव्य तरीके से इसका समापन हुआ जिसमें विदेशी हिन्दी सेवियों का सम्मान भी किया गया।

समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी हिन्दी न केवल राजभाषा है बल्कि यह संपर्क भाषा भी है। इसको जिंदा रखने में गिरमिटिया देशों की अहम भूमिका है। सिंह ने हिन्दी को भारतीय भाषाओं की बड़ी बहन बताते हुए कहा कि आज तकनीकी कंपनियों को हिन्दी के प्रति काफी प्रेम दिखाई दे रहा है। यह उनका हिन्दी प्रेम व्यवसायिक हितों के कारण है। उन्होंने अफसोस जाहिर किया कि हिन्दी को हम राष्ट्र भाषा के रूप मंे लोगों के दिल में नहीं बैठा पाए। इसके लिए उन्होंने राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमजोरी बताया।

इसके पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समापन के मौके पर कहा कि प्रदेश में अब हर साल 14 सितंबर को हिन्दी सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। प्रदेश में राजभाषा विभाग को फिर से स्थापित किया जाएगा। चौहान ने कहा कि अटलबिहारी विश्व विद्यालय को अंतर राष्ट्रीय स्तर का बनाया जाएगा और सरकारी विज्ञापनों को हिन्दी में ही तैयार किया जाएगा। बाजारों में व्यापारियों को हिन्दी में ही अपने संस्थानों के नाम लिखने को प्रेरित किया जाएगा। साथ ही प्रदेश मेें जो उत्पाद बनते हैं उनमें हिन्दी में ही नाम लिखे जाने का प्रयास किया जाएगा। हिन्दी में जो अच्छा काम करेगा उसे पुरस्कृत किया जाएगा
विदेशियों का सम्मान
सम्मेलन विदेशी हिन्दी सेवी सम्मानित किए गए। इनमें अनूप भारती (ब्रिटेन), स्नेह ठाकुर (कनाडा), प्रो. हाईंस वारनाल वेस्लर (जर्मनी), अकिदा ताका हाशी (जापान), उषा देवी शुक्ल (दक्षिण अफ्रीका), कमला रानी (त्रिनिदाद टोबेका), नीलम कुमारी (फिजी, डॉ. शर्ज व्रजे (ब्राजील), अंजाला माताम व गंगाधर सिंह (मॉरीशस), दशनायक इंदिरा कुमारी (श्रीलंका), मोहम्मद इस्माइल (सउदी अरब) औरे सुर्जन पारोही (सूरीनाम)शामिल हैं।

ये हुईं सिफारिशें
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चिकित्सा शिक्षा की पढ़ाई हिन्दी में हो।
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शोधपत्रों का लेखन भी हिन्दी हो।
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राजभाषा लोकपाल बनाए जाए।
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सभी परीक्षाओं में हिन्दी को अनिवार्य किया जाए।
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संयुक्त राष्ट्र संघ मंे हिन्दी को अधिकृत भाषा में शामिल किया जाए।
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विदेश मंत्रालय हिन्दी में कामकाज हो।
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विदेश मंत्रालय में हिन्दी के रिक्त पद भरे जाएं।
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पासपोर्ट में हिन्दी में ही प्रविष्टियां की जाएं।
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विज्ञान में हिन्दी का उपयोग किया जाए।
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बाल साहित्य अकादमी बनाई जाए।
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केंद्र व राज्य सरकार निजी प्रकाशकों को बाल साहित्य के लिए अनुदान दें।
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हाईकोर्ट में शपथ पत्र और आदेश हिन्दीं में जारी हों।
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अखबारों की मूल लिपि कमजोर नहीं की जाए।
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राष्ट्र भाषा आयोग का गठन किया जाए।

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