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जेल में युवक की मौत का मामला : जेल, पुलिस, डॉक्टर के खिलाफ हत्या का मुकदमा
न्यायिक हिरासत के दौरान ग्वालियर की जेल में भोपाल निवासी मोहसिन नामक युवक की मौत के मामले में राजधानी की एक अदालत ने केंद्रीय जेल के तत्कालीन जेलर आलोक वाजपेयी , तत्कालीन निरीक्षक टीटी नगर थाना मनीष राज भदौरिया , उपनिरीक्षक डीएल यादव , मनोरोग चिकित्सक डॉ. आरएन साहू , क्राईम ब्रांच के तत्कालीन चार आरक्षकों अहसान , मुरली , चिरोंजी लाल एवं एकअन्य के खिलाफ हत्या खिलाफ हत्या , आपराधिक साजिश और सबूत नष्ट करने का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रोहित श्रीवास्तव की अदालत ने मृतक के परिजन की ओर से यावर खान एडवोकेट द्वारा दायर किए गए परिवाद पत्र की सुनवाई के बाद शुक्रवार को दिए हैं। मजिस्ट्रेट ने अभियुक्तगणों को नोटिस जारी कर अगली पेशी तारीख 21 जून को अदालत में हाजिर होने के निर्देश दिए हैं।
– न्यायिक जांच में यह साबित हो गया था कि मोहसिन की मारपीट से मौत हुई है
मोहसिन की मौत के कारणों की न्यायिक जांच करने वाले तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट विपेंद्र यादव की जांच में यह साबित हो गया था कि उसके साथ पुलिस हिरासत अथवा न्यायिक हिरासत के दौरान अमानवीय व्यवहार कर
मारपीट की गई थी जिससे उसकी मौत हो गई थी । मामले की न्यायिक जांच करने वाले राजधानी की जिला अदालत के मजिस्ट्रेट विपेंद्र यादव ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह निष्कर्ष दिया था कि मृतक के साथ पुलिस हिरासत अथवा न्यायिक हिरासत के दौरान अमानवीय व्यवहार कर मारपीट की गई थी जिससे उसकी मौत हो गई थी । मजिस्ट्रेट ने न्यायिक जांच की रिपोर्ट राज्य मानव अधिकार आयोग , जिला एवं सत्र न्यायाधीश , सीजेएम और केंद्रीय जेल अधीक्षक को भेजी थी । मृतक के परिजन के वकील यावर खान ने बताया कि मजिस्ट्रेट ने करीब बीस पेज की जांच रिपोर्ट में यह उल्लेखित किया था कि मृतक विचाराधीन बंदी मोहसिन गिरफतारी के समय शारीरिक एवं मानसिक रुप से स्वस्थ था। पुलिस हिरासत अथवा न्यायिक हिरासत के दौरान अमानवीय व्यवहार कर मारपीट की जाना एवं मानसिक रुग्णता कारित होने संबंधी उपलब्ध स्पष्ट साक्ष्य एवं उपचार के दौरान बंदी को कोई प्राणघातक बीमारी न पायी जाना जिससे उस बीमारी से बंदी की मौत होना संभावित माना जा सके । न्यायिक जांच के दौरान मजिस्ट्रेट की कोर्ट में मृतक के परिजनों और मृतक का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर सहित पांच डॉक्टर , केंद्रीय जेल के जेलर , कंपाउंडर , ग्वालियर के कंपू थाने के टीआई और रक्षित केंद्र के आरक्षकों ने अपने बयान दर्ज कराए थे । न्यायिक जांच में यह साबित होने पर कि मोहसिन की मौत उसके साथ पुलिस हिरासत अथवा न्यायिक हिरासत के दौरान अमानवीय व्यवहार कर मारपीट कि ए जाने से हुई है , मृतक के परिजन ों ने यावर खान एडवोकेट के जरिए केंद्रीय जेल के जेलर आलोक वाजपेयी , तत्कालीन निरीक्षक टीटी नगर थाना मनीष राज भदौरिया , उपनिरीक्षक डीएल यादव , मनोरोग चिकित्सक डॉ. आरएन साहू , क्राईम ब्रांच के तत्कालीन चार आरक्षकों अहसान , मुरली , चिरोंजी लाल एवं एकअन्य के खिलाफ हत्या , आपराधिक साजिश और सबूत नष्ट करने का मुकदमा दर्ज करने क ी मांग को लेकर निज परिवाद पत्र दायर किया था।
– यह है मामला
गौरतलब है कि टीला जमालपुरा निवासी मोहसिन को क्राईम ब्रांच के आरक्षक 13 जून 2015 को उसके घर से ले गए थे। 19 जून को उसे चेन लूट के मामले में अदालत में पेश कर जेल भेज दिया था। 23 जून को जेल प्रशासन ने उसे दिमागी रुप से बीमार बताते हुए ग्वालियर में आरोग्य केंद्र भेज दिया था। वहां पर 24 जून 2015 को उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने युवक की हत्या की आशंका जताते हुए केंद्रीय जेल के जेलर आलोक वाजपेयी , तत्कालीन निरीक्षक टीटी नगर थाना मनीष राज भदौरिया , उपनिरीक्षक डीएल यादव , मनोरोग चिकित्सक डॉ. आरएन साहू , क्राईम ब्रांच के तत्कालीन चार आरक्षकों अहसान , मुरली , चिरोंजी लाल एवं एकअन्य के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग सहित पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई थी।
– सीसीटीव्ही कैमरे की रिकार्डिंग नहीं पेश की थी कोर्ट में
मृतक के परिजनों की ओर से अदालत में आवेदन पेश कर भोपाल केंद्रीय जेल के मैन गेट के सीसीटीव्ही कैमरे की रिकार्डिंग अदालत में पेश किए जाने की मांग की थी , लेकिन जेल प्रशासन से सीसीटीव्ही कैमरे की रिकार्डिंग अदालत में पेश नहीं की थी।




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