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विधानसभा में मीडिया के सम्मान पर सत्तापक्ष व विपक्ष में तनातनी
मप्र विधानसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह और जीतू पटवारी के सवालों के उत्तर के दौरान मीडिया पर एक टिप्पणी पर सत्तापक्ष व विपक्ष पत्रकारों के सम्मान को लेकर आमने-सामने हो गए। मंत्री सहित सत्तापक्ष के विधायकों ने जीतू पटवारी को मीडिया को लेकर की गई टिप्पणी पर माफी मांगने को कहा गया तो विपक्ष ने कहा जो चीज सदन में हुई नहीं उसके लिए माफी क्यों मांगें। हालांकि हंगामे व कार्यवाही स्थगित होने के बाद भी दोनों पक्ष संतुष्ट नहीं हुए और कार्यवाही आगे बढ़ गई। इस घटना को लेकर सेंट्रल प्रेस क्लब ने भी जीतू पटवारी की टिप्पणी की निंदा करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को शिकायत भेजी और उनसे मांग की है कि पटवारी से माफी मंगवाएं।
विधायक जयवर्द्धन सिंह ने पिछले चार साल में जनसम्पर्क विभाग द्वारा शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार हेतु प्रिंट, इलेक्ट्रानिक सहित सभी माध्यमों पर कितनी राशि व्यय हुई है, का सवाल उठाया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने 640 करोड़ रुपये खर्च किये तथा वह चाहती तो इस राशि से खुद का टीवी चैनल और अखबार चालू कर देती। जवाब में जनसम्पर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि एक-एक चैनल और अखबार को कितनी राशि दी इसकी जानकारी बहुत विस्तृत है, वे इसे विधायक को अलग से दे देंगे। जयवध्र्दन सिंह ने मामले की जांच कराने के लिये कहा तो मंत्री श्री मिश्रा ने जांच कराने का आश्वासन भी दे दिया।
इसके बाद विधायक जितू पटवारी का इलेक्ट्रानिक माध्यमों को विज्ञापन दिये जाने का सवाल था। पटवारी ने कहा कि लोकतंत्र की मूल धारणा है कि जो लांकतंत्र को जर्नलिज्म के जरिये जिन्दा रखते हैं, जनता की खून पसीने की कमाई उनके पास जाना चाहिये। परन्तु उनके पास न जाकर उन लोगों के पास जा रही है जो कहते हैं कि मंत्री जी आपकी जाकेट अच्छी है, मूंछ बढिय़ा है। इस पर सत्तापक्ष ने आपत्ति की। जवाब में जितू पटवारी ने कुछ टिप्पणियां की जिन्हें स्पीकर ने कार्यवाही से निकाल दिया। पटवारी ने फिर टिप्पणी की कि अंधा, अंधे को रेवड़ी बांटे। जर्नलिज्म वाले परेशान हैं। एक गिरोह बन गया है। जो आरिजनल जर्नलिज्म वाले हैं, वे खाली हाथ हैं। इस पर फिर सत्तापक्ष ने जमकर आपत्ति ली। कांग्रेस के विधायक विरोध स्वरुप सदन के गर्भगृह में आ गये जिस पर स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दस मिनट के लिये स्थगित कर दी।
सदन के पुन: समवेत होने पर आगे की कार्यवाही चली परन्तु अशासकीय संकल्पों पर चर्चा के दौरान यह मुद्दा फिर उठा। जितू पटवारी ने कहा कि उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान मीडिया के बारे में गलत शब्दों को चयन नहीं किया और जनसम्पर्क मंत्री को सदन को गुमराह करने पर माफी मांगना चाहिये। इस पर मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि एक ऐसे व्यक्ति ने सदन की गरिमा को तारतार करके सदन के फ्लोर का उपयोग अपनी व्यक्तिगत रंजिश के लिये किया और ऐसा व्यक्ति मुझसे माफी मांगने की बात कह रहा है। क्षमा उन्हें मांगना चाहिये जिन्होंने मीडिया को चोर कहा। इस पर स्पीकर ने मामला शांत कराया।




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