निजी मेडिकल कॉलेजों में अपात्र लोगों को प्रवेश मिलता रहा, चिकित्सा शिक्षा विभाग सोता रहा

व्यापमं घोटाले के पीएमटी 2012 में सीबीआई ने गुरुवार को जिला विशेष न्यायालय में 592 लोगों के खिलाफ चालान पेश किया जिसमें चार मेडिकल कॉलेजों चिरायु मेडिकल कॉलेज, पीपुल्स मेडिकल कॉलेज, इंडेक्स मेडिकल कॉलेज और एनएल मेडिकल कॉलेजों में अपात्र स्टूडेंट्स के प्रवेश होते रहे और चिकित्सा शिक्षा विभाग सोता रहा। निजी मेडिकल कॉलेजों के साथ सॉल्वर्स और बिचौलियों के एक गिरोह ने मिलकर यह गोरखधंधा किया। गुरुवार की रात को निजी मेडिकल कॉलेजों के चेयरमेन से लेकर अन्य अधिकारियों पर जमानत मिलने- न मिलने की तलवार लटकी रही। सभी 30 अग्रीम जमानत याचिका ख़ारिज हो गई। कोर्ट में पेश हुए 15 आरोपियों को कोर्ट ने जमानत दी। ऐतिहासिक रात 2:41 तक भोपाल कोर्ट चली। भोपाल की डीपी मिश्रा की सीबीआई कोर्ट में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने पीएमटी 2012 के 592 आरोपियों की चार्जशीट पेश की है। इसमें करीब 145 वे आरोपी हैं जिनके बारे में सीबीआई को पता तक नहीं था। इन्हें तलाशने में सीबीआई को काफी मेहनत करना पड़ी और उसने तकनीकी का भरपूर इस्तेमाल किया। सॉल्वर्स और उन्हें परीक्षा में फायदा लेने वाले स्टूडेंट उपलब्ध कराने वाले बिचौलियों ने निजी मेडिकल कॉलेजों के चेयरमेन, डीन, अधिकारियों के साथ मिलकर षड़यंत्र किया। बिचौलिये सॉल्वर्स लाते थे और फिर उन्हें परीक्षा केंद्र में फायदा लेने वाले स्टूडेंट के आसपास बैठाने की व्यवस्था करने के लिए व्यापमं के अधिकारियों के साथ सांठगांठ करते थे.
बिचौलिये सॉल्वर्स के रूप में मेडिकल स्टूडेंट को तलाशते थे। इनके अलावा मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश और दिल्ली में मेडिकल एजुकेशन में सक्रिय लोगों की कोचिंग इंस्टीट्यूट का पता करते थे। वहां के अच्छे स्टूडेंट्स को भी सॉल्वर्स बनाते थे। इस पूरे गठजोड़ को पकडने में सीबीआई को काफी लंबा समय लगा। इस गठजोड़ में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी निजी मेडिकल कॉलेज रहे जिन्हें सॉल्वर्स के योजनाबद्ध ढंग से सीटों को खाली करने, उनके बदले दूसरे अयोग्य व्यक्ति को खाली सीट पर आवंटन कराते थे।

पीपुल्स कॉलेज के डायरेक्टर डॉ अशोक नागनाथ, कुलपति डॉ विजय कुमार पंड्या की अग्रिम ज़मानत याचिका भी ख़ारिज हो गई हैं। व्यापमं PMT2012 सभी 30 अग्रीम जमानत याचिका ख़ारिज हो गई। कोर्ट में पेश हुए 15 आरोपियों को कोर्ट ने जमानत दी। अनुपस्थित सभी के खिलाफ गिरतरी वारेंट जारी। ऐतिहासिक रात 2:41 तक भोपाल कोर्ट चली।

गुमनाम खत से व्यापम घोटाले का खुलासा
यदि एक गुमनाम खत पर इंदौर पुलिस ने गौर नहीं किया होता तो व्यापम में फर्जी तरीके से डॉक्टर बनाने का खेल न जाने कितने साल और चलता. पुलिस ने गुमनाम शिकायत पर जांच शुरू की थी.

साल 2013 में मंडल की तरफ से आयोजित की गई प्री-मेडिकल टेस्ट परीक्षा के एक दिन पहले पुलिस सक्रिय हुई. इंदौर के तत्कालीन आईजी विपिन माहेश्वरी ने इसकी कमान संभाली. पत्र में दी गई जानकारी के आधार पर होटलों की तलाशी शुरू हुई.

क्राइम ब्रांच इंदौर की टीम को देखकर एक युवक ने अपना बैग खिड़की से बाहर फेंक दिया. पुलिस ने बैग को जब्त कर उसे चेक किया तो उसमें पीएमटी की परीक्षा का एक प्रवेश पत्र मिला. वो प्रवेश पत्र पकड़े गए युवक का नहीं था. पूछताछ में युवक ने वे सभी बातें बताईं जिनका जिक्र गुमनाम पत्र में था.

इंदौर पुलिस ने 7 जुलाई 2013 को राजेंद्र नगर थाने में एफआईआर दर्ज कर अपनी जांच तेज कर दी. जांच में पुलिस को पता चला कि कुल चार गिरोह पूरे प्रदेश में सक्रिय हैं. इसके बाद एसटीएफ को और फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 15 जुलाई 2015 को सीबीआई ने जांच शुरू की थी.

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