देश के नव-निर्माण के लिये अच्छी शिक्षा व्यवस्था पहली आवश्यकता

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिये प्रदेश में क्रियान्वित योजनाओं की समीक्षा की। आयोग के अध्यक्ष श्री नंद कुमार साय ने चर्चा के दौरान कहा कि प्रदेश में इन वर्गों के लिये प्राथमिक शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाना होगा। इसके लिये अधिसूचित क्षेत्रों की शालाओं में प्रशिक्षित शिक्षकों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करें। श्री साय ने कहा कि देश के नव-निर्माण के लिए अच्छी शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध करवाना पहली आवश्यकता है। उन्होंने फर्जी जाति प्रमाण पत्रों की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए। श्री साय ने कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं के लिये खेलकूद जैसी रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाये।

अनुसूचित जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री लाल सिंह आर्य ने बैठक में बताया कि सरकार द्वारा कम साक्षरता वाले स्थानों का चयन कर वहाँ छात्रावासों का निर्माण करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि लीज पर खदान देते समय नियम और शर्तों में मजदूर वर्ग के स्वास्थ्य परीक्षण और मास्क के उपयोग को आवश्यक किया जायेगा। श्री आर्य ने कहा कि जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों के लिए सात दिवसीय कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के जरिए अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चे भारतीय संस्कृति एवं विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ेंगे।

आयोग की उपाध्यक्ष सुश्री अनुसुईया उइके ने कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को पेंशन एवं हितग्राही मूलक योजनाओं का लाभ समय पर मिले। जनजातीय वर्ग के मामलों में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण से कार्यवाही की जाए। आयोग के सचिव श्री राघव चंद्रा ने कहा कि आयोग का मकसद हर-स्तर पर जनजातीय वर्ग का संरक्षण, उन्नयन और उनकी समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित करना है।

मुख्य सचिव श्री बसंत प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग के विकास और कल्याण के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षकों की भर्ती के लिए बी.एड. और डी.एड. में रियायत देने का प्रस्ताव शासन के समक्ष विचाराधीन है।

पुलिस महानिदेशक श्री ऋषि कुमार शुक्ला ने कहा कि पुलिस के कार्यपालिक पदों में शासन के नियमों के तहत विशेष संर‍क्षित जनजातियों की सीधी भर्ती का प्रावधान नहीं है। इस संबंध में विशेष संरक्षित जनजातीय वर्गों को रियायत देने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।

प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य श्री एस एन मिश्रा ने राज्य शासन की जनजातीय लाभ की गतिविधियों के बारे में प्रस्तुतिकरण किया। बैठक में आयुक्त श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने परिचयात्मक शुरुआत की।

बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री पी.सी. मीना, अपर मुख्य सचिव नर्मदा घाटी विकास श्री रजनीश वैश, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री आर एस जुलानिया सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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