शोक का समय गया, अब अनिल जी के सपनों को पूरा करने में जुटना है: शिवराज

केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे के आकस्मिक निधन पर प्रदेश भाजपा कार्यालय में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज भी भरोसा नहीं होता कि अनिल जी हमारे बीच में नहीं हैं। उनका चेहरा भुलाये नहीं भूलता। अपने ढंग से काम करने वाले। ऐसा कार्य करते थे कि कीर्ति आरती करती थी। अनिल जी स्वाभिमानी थे अहंवादी नहीं थे। उत्साह से भरे हुए थे। वे भगवान श्री कृष्ण के सात्विक कार्यकर्ता थे। शोक करने का समय गया, अब काम करना है। उनकी वसीयत आदर्श है। नर्मदा में चुटकी भर अस्थि ही विसर्जित की। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि अनिल सशरीर नहीं है मगर उनके द्वारा शुरू किए गए कार्य उनकी मौजूदगी का अहसास करवाते रहेंगे।
संघ के सह प्रान्त कार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध ने कहा कि अनिल जी ने प्रत्येक क्षण स्वयं सेवक भाव से जिया। उनके नेतृत्व में श्रेष्ठता के प्रतिमान गढ़े गए। वे विचार के जनक थे और उसे फलीभूत करने में प्रयत्नों की पराकाष्ठा करते थे। सभा में अभाविप के राष्ट्रीय पदाधिकारी सचिन दवे ने कहा कि नर्मदा उनकी आत्मा में बसी थी। किसान संघ के कैलाश सिंह ठाकुर ने अनिल जी को भावांजलि देते हुए कहा कि उनकी छोटी सी मुस्कान कार्यकर्ता को बड़ी प्रेरणा देती थी। दवे जी के चिकित्सक डॉ संजीव गुलाटी ने कहा कि सम्पूर्ण चिकित्सा जगत उन्हें मार्गदर्शक पहले और राजनेता बाद में मानते थे। उन्हें भारतीय चिकित्सा पद्धति का विषद ज्ञान था। संघ में अनिल जी के प्रथम विभाग प्रचारक रहे विभीषण सिंह ने कहा कि इतनी कम उम्र में वे इतना कार्य कर गए कि इतिहास प्रेरणा के रूप में याद करेगा। साहित्यकार डॉ देवेंद्र दीपक ने कहा कि अनिल जी को कार्यकर्ता को प्रतिष्ठित करना तथा डैमेज कंट्रोल करना बहुत खूब आता था। सेवानिवृत पुलिस महानिदेशक स्वराज पुरी ने कहा कि उन्होंने सरल लेकिन सख्त शैली से कर कार्य को पूर्ण किया। एक अधिकारी के रूप में कई तरह के अनुभव रहे लेकिन ने हमेशा सहृदय रहे। नर्मदा समग्र से कार्तिक सप्रे ने कहा कि वे मजाक में भी स्वार्थी नहीं हुए। वे सहजता से सख्त बात बेबाकी से कह जाते थे। हम गंभीरता से सोचें कि कैसे नर्मदा का प्रदूषण कम हो, यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
मजदूर संघ के ज्ञान तिवारी ने अनिल जी को याद करते हुए कहा कि कार्यकर्ता पर गलती से हुए अविश्‍वास पर वे फूट फूट कर रोये थे। वे सख्त प्रबंधक मगर कोमल हृदय इंसान थे। बंसल न्यूज़ के शरद द्विवेदी ने कहा कि भाजपा में दो प्रचारकों कप्तान सिंह सोलंकी और अनिल जी से मिला और उनमें लौह तत्व था। अनिल जी ने एक साक्षात्कार में कहा था कि सेवा का प्रकल्प लेकर चलना मुख्य है, क्या मिला और क्या नहीं मिला गौण है। अनिल जी के अनुज अभय दवे ने अपने अनुभव सुना कर अनिल जी के कृतित्व व व्यक्तित्व को याद किया। इसके अलावा दवे को श्रद्धांजलि दने पार्टी के नेताओं सहित शहर के वरिष्ठ नागरिक भी पहुंचे थे। सभा का संचालन भाजपा उपाध्यक्ष विजेश लूनावत ने किया।
राजनीति का भरोसा करने वाला चेहरा थे अनिल दवे : उमेश त्रिवेदी
सुबह सवेरे के प्रधान संपादक उमेश त्रिवेदी ने कहा कि पत्रकारिता में होने के बावजूद ऐसे लोगों की कमी होती जा रही है जिनसे सार्वजनिक प्रश्‍नों पर खुल कर बात की जा सकती है। अनिल जी ने शिद्दत से नदी का घर बनाया था। नदी का घर बनाने के दौरान चर्चा होती थी कि ये अपनी राजनीति चमकाने का कार्य है। उन्होंने कहा कि मैंने जब उनसे पूछा कि घर का नाम यह क्यों रखा तो वे बोले थे आप भी वही प्रश्‍न पूछ रहे हो। उन्होंने कहा था इसका जवाब समय देगा। आज उनकी वसीयत को पढ़कर पता चला कि उनके घर का नाम ‘नदी का घर’ क्यों रखा था। वे नदी की तरह सतत चलते रहे। कंकर कूड़े को किनारे करते रहे। वे राजनीति का अलग चेहरा थे ऐसा चेहरा जिस पर भरोसा कर सकते थे।

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