सांची बौद्ध-भारतीय अध्ययन विवि में 91वी इंडियन फिलोसॉफी कांग्रेस

सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में 91वीं भारती दर्शन कॉग्रेंस का शुभारंभ मशहूर स्वतंत्रता सेनानी, गांधीवादी और दार्शनिक प्रो रामजी सिंह ने किया। इस मौके पर प्रो सिंह ने कहा कि दर्शन का लक्ष्य अध्यात्मिकता और व्यावहारिक प्रयोजन होना चाहिए।

प्रो रामजी सिंह ने कहा कि वक्त आ गया है कि हम दर्शन और विज्ञान को पूरक की तरह समझकर कार्य करें क्योंकि बिना दर्शन के विज्ञान अंधा है और विज्ञान के बिना दर्शन अपंग। उन्होने कांग्रेस में मौजूद विद्वानों से वैश्विक दर्शन विकसित करने का आव्हान किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाबोधि सोसायटी ऑफ श्रीलंका के प्रमुख बनागला उपतिस्स नायक थैरो थे। उद्घाटन समारोह के अध्यक्ष और इंडियन फिलोसॉफिकल कांग्रेस के महासचिव प्रो डी. एन. द्विवेदी ने कहा कि भारतीय संदर्भ में ज्ञान प्रज्ञा है। उन्होने कहा कि ज्ञान प्राप्ति के लिए कोई विचार मान्य तो किया जा सकता है लेकिन उसे ज्ञान नहीं समझना चाहिए क्योंकि विचार गलत भी हो सकता है।

उद्घाटन सत्र में प्रारंभिक वक्तव्य देते हुए सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य प्रो यज्ञेश्वर शास्त्री ने कहा कि समस्त मनुष्य जाति एक परिवार है और वेदों के अनुसार सत्य एक ही है जिसे विद्वान अलग-अलग ढंग से वर्णित करते हैं। बौद्धिक संकल्पनाओं के विश्लेषण के उलट उन्होने दर्शन का व्यावहारिक प्रयोजन मानव दुखों का निवारणबताया। प्रो शास्त्री ने कहा कि सच्चे दार्शनिक लोगों के जीवन में ज्ञान का प्रकाश और दुख से मुक्ति की कोशिश करते हैं।

उद्घाटन सत्र में विशेष वक्तव्य देते हुए भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के चेयरमैन प्रो एस आर भट्ट ने भारतीय दर्शन को अन्तः प्रज्ञा से युक्त होने के साथ तार्किक भी बताया जो अन्वीक्षा, परीक्षा और समीक्षा से अपनी राह तय करता है। उन्होने उपस्थित विद्वजनों से दर्शन का इतिहास पढ़ाने की बजाय उसे जीवनोपयोगी बताते हुए मौजूदा समय में पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता जताई। उन्होने कहा कि ज्ञान के कई वैकल्पिक मार्ग हो सकते है और प्राचीन ग्रंथों में 54 प्रकार बताए गए हैं। प्रो भट्ट ने जैन धर्म में पर्यायवाद के सिद्धांत को मौजूदा वक्त में बेहद उपयोगी मानते हुए कहा कि पर्यायवाद विज्ञान के संभावनावाद का बेहतर रुप है जो बताता है कि एक अनेक कैसे हो जाता है।

इंडियन फिलोसॉफी कांग्रेस के इंडोमेंट लेक्चर के बुद्ध सीरीज पर बोलते हुए प्रो प्रदीप गोखले ने कहा कि समाज की उपयोगिता लोगों के दुखों को दूर करने में है। उन्होने कहा कि अंबेडकर ने कर्म सिद्धांत से पुनर्जन्म के सिद्धांत को हटा दिया था। स्त्रीवाद पर बोलते हुए प्रो श्रीकला नैयर ने कहा कि महिलाओं का सत्य के प्रति आग्रह कुछ अलग और अधिक होता है। डॉ एस कृष्णन ने आचार्य तुलसी लेक्चर में बोलते हुए कहा कि शैव सिद्धांत इतिहास काल के पूर्व का दर्शन है जिसमें शिव नैतिक नियम का संचालक है। उन्होने कर्म सिंद्धांत में ईश्वर को संचालक माना।

लेक्चर सीरीज के बाद हुए तकनीकी सत्र में पांच अलग-अलग विषयों यथा- दर्शन का इतिहास, तत्वमीमांसा और ज्ञानमीमांसा, आचार और सामाजिक दर्शन एवं धर्म पर 39 शोध-पत्र पढ़े गए। दिन के अंतिम सत्र में मौजूदा परिप्रेक्ष्य में भारतीय दर्शन पर सिंपोसियम में दर्शन के विभिन्न विद्वानों एवं चिंतकों ने अपने विचार व्यक्त किए।   

13 फरवरी को इंडियन फिलोसॉफिकल कांग्रेस की बैठक में इंडोमेंड लेक्चर सीरीज में गांधी दर्शन, वेदांत एवं मानववाद पर विद्वानों के विचार होंगे। साथ ही तकनीकी सत्र में दर्शन का इतिहास, तत्वमीमांसा औरज्ञानमीमांसा, आचार और सामाजिक दर्शन एवं धर्म पर 34 शोध-पत्र पढ़े जाएंगे। इसके उपरांत इच्छामृत्यु विषय पर सिंपोसियम में विद्वान अपने विचार रखेंगे। 14 फरवरी को इंडियन फिलोसॉफिकल कांग्रेस का समापन होगा।

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