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यादव ड्रामा खत्म, शक्ति प्रदर्शन के बाद सुलह, अब प्रत्याशियों की घोषणा होगी
उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और उनके मुख्यमंत्री पुत्र अखिलेश यादव के बीच चार दिन से चल रहा राजनीति ड्रामा शनिवार को दिन में खत्म हो गया। शनिवार को सुबह तक जहां शक्ति प्रदर्शन का दौर चला, वहीं दोपहर होते ही यह सुलह के दौर में पहुंच गया। पिता को विधायकों की सूची तो निष्कासन समाप्त कर सुलह हो गई। अब विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों की सूची जल्द घोषित की जाएगी।
उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के पहले ही समाजवादी पार्टी में ऐसा राजनीति ड्रामा चल रहा है जिसमें सत्ता पक्ष ही केंद्र बिंदु बना हुआ है। समाजवादी मुखिया मुलायम सिंह यादव अपने भाई शिवपाल सिंह यादव और बेटे अखिलेश सिंह यादव में से किसी को भी छोड़ना नहीं चाहते। यह कुछ महीनों से चली आ रही उठापटक से साबित हो गया। पहले जहां शिवपाल सिंह को मंत्री पद से हटाने और फिर सीएम पद का चेहरा प्रस्तुत किए जाने को लेकर दोनों के बीच संबंधों में खटास आई थी। इससे चाचा-भतीजे के लिए खुलकर वाकयुद्ध हुआ।
विधानसभा की तारीखों की घोषणा होने से पहले मुलायम सिंह ने पहली सूची जारी कर दी जिसमें शिवपाल सिंह की ज्यादा चली और अखिलेश सिंह यादव के समर्थकों का पता कट गया। इससे नाराज होकर अखिलेश सिंह ने शिवपाल सिंह के समर्थकों को निगम-मंडल के पदों से हटा दिया और फिर विधानसभा चुनाव के लिए अपनी के सूची अलग से जारी कर दी। इससे मुलायम को बीच में उतरना पड़ा और फिर मुलायम-शिवपाल के बीच गुफ्तगु हुई और अखिलेश सिंह व रामगोपाल सिंह यादव को छह-छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया।
अखिलेश सिंह अपने पार्टी से निष्कासन के बाद विधानसभा में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए विधायकों की भीड़ जुटाने के लिए एमएलए से मिलने का प्रोग्राम तय किया गया। रामगोपाल ने सपा की राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन बुला लिया। सुबह पहले विधायकों की बैठक की तो अखिलेश यादव के पास बहुतायत में एमएलए आ गए और उन्होंने सूची तैयार कर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को सौंप दी। इस सूची के बाद फिर राजनीतिक घटनाक्रम बदला और मुलायम सिंह-शिवपाल सिंह से चर्चा की। स्थिति के बारे में बताया और कुछ देर बाद ही निष्कासन समाप्त हो गया। इससे चार दिन से चल रहा राजनीतिक ड्रामा भी समाप्त हो गया।




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