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7 हैंडपम्प, 3 सूखे, 4 दबंगों के कब्जे में, यूपी जाकर गड्ढे से पानी भर रहे 25 परिवार
टीकमगढ़ जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर करीब 600 की आबादी वाला छोटा सा गांव कबराटा, जहां इस वर्ष गर्मी आते ही गांव के 7 में से 3 हैंडपम्प बंद हो गये। बाकी बचे 4 पर गांव के दबंगों ने कब्जा कर लिया। नतीजा- यहां रह रहे 25 आदिवासी परिवारांे के 200 लोग बूंद-बूंद पानी को मोहताज हो गये। इस मामले में राज्य मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है और टीकमगढ़ कलेक्टर व सीईओ जिला पंचायत से प्रतिवेदन मांगा है।
ऐसा हर साल होता है और ये आदिवासी गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर जाते हैं, लेकिन इस बार कोरोना कफ्र्यू की वजह से जा नहीं सके। ऐसे में उन्हें पानी के लिये एक किमी दूर यूपी के ललितपुर जिले के नाबई गांव तक जाना पड़ रहा है। यहां गड्ढों में जमा पानी से किसी तरह इनका काम चल रहा है। गांव के सुरेश आदिवासी का कहना है कि सरपंच को बताया, लेकिन कोई हल नहीं हुआ। अब ठान लिया है कि पानी की व्यवस्था नहीं हुई, तो मतदान भी नहीं करेंगे। पूरन आदिवासी के अनुसार दिनभर पानी भरेे या मज़दूरी करके परिवार चलाएं, समझ नहीं आता। कलेक्टर टीकमगढ़ का इस बारे में कहना है कि पीएचई के अधिकारियों से बातकर गांव में पेयजल के संसाधन उपलब्ध करवाये जायेंगे। साथ ही सरकारी हैण्डपम्पों को दबंगों के कब्जे से तत्काल मुक्त कराया जायेगा। सागर के एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में इस संबंध में प्रकाशित खबर में दिये गये तथ्यों पर आयोग द्वारा स्वयं संज्ञान लेकर प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया गया है। आयोग ने कलेक्टर, टीकमगढ़ एवं सीईओ जिला पंचायत, टीकमगढ़ से एक माह में तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा है।




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