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मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के अंतर्गत गमक(कला विविधताओं की प्रस्तुतियां) के तहत 2 सितंबर को शाम 7 बजे ऑनलाइन “शाम ए मौसीक़ी” कार्यक्रम आयोजित किया गया ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि जैसा कि आप सभी जानते हैं कि फ़न को अगर मौसीक़ी के रूप में पेश किया जाये और उसमें एहसासात ओ जज़्बात की शिद्दत को शामिल किया जाए तो उससे फ़नकार को ऊर्जा प्राप्त होती है,और श्रोताओं को सुकून मिलता है। मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, साहित्य में कला विविधताओं की आवश्यकता को महसूस करते हुए लगातार एक कार्यक्रम “गमक” के नाम से कर रही है। इस कार्यक्रम में जहां एक और वरिष्ठ कलाकारों को मौक़ा दिया जा रहा है वहीं नई प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान किया जा रहा है ताकि उनकी भी हौसला अफज़ाई हो। इसी सिलसिले के तहत आज के शाम ए मौसीक़ी कार्यक्रम में आपके सामने भोपाल के प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक ज़मीर ख़ान और सनावद के सूफ़ी ग़ज़ल गायक अहमद चिश्ती ग़ज़लों की सांगीतिक प्रस्तुति दे रहे हैं।
ज़मीर ख़ान द्वारा प्रस्तुत किया गया कलाम इस प्रकार है।
बशीर बद्र
यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो
रिफ़अत सरोश
दिल में रख लो कि निगाहों में बसा लो मुझको
अख़्तर सईद खां
मैं ने माना एक न इक दिन लौट के तू आ जाएगा
कोई मौज ए गुल से कह दे न चले मचल मचल के
अहमद चिश्ती द्वारा प्रस्तुत किया गया कलाम इस प्रकार है।
मेरी बातों में है सच्चाई, ये झूठा मेरा उपदेश नहीं, मेरे भारत जैसा कोई देश नहीं
इस पे लुटा दो जान भी अपनी और करो सम्मान
इसको समझो अपनी जान, अपना देश है हिन्दोस्तान
अमीर ख़ुसरो
छाप तिलक सब छीन ली रे मोसे नैना मिलाइके
कार्यक्रम के निदेशक डॉ नुसरत मेहदी ने सभी श्रोताओं का अभिवादन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ज़फ़र ख़ान द्वारा किया गया




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