28 अगस्त को उच्चतम न्यायालय के 45वें मुख्य न्यायाधीश की शपथ लेगे जस्टिस दीपक मिश्र

28 अगस्त को उच्चतम न्यायालय के 45वें मुख्य न्यायाधीश की शपथ लेने वाले जस्टिस दीपक मिश्र का जन्म और करियर की शुरूआत भले ही ओडिशा से हुई हो लेकिन न्यायजगत में उनका सितारा मध्यप्रदेश में ही बुलंद हुआ। वे 1997 में जबलपुर हाईकोर्ट आए और यहाँ 2009 तक रहे। पटना, दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्यन्यायाधीश होते हुए उच्चतम न्यायालय पहुंचे और अब न्यायपालिका के प्रमुख बनने जा रहे हैं। जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस मिश्रा की आज भी गहरी छाप है। वे अपनी संजीदगी, अध्ययनशीलता, अनुशासनप्रियता, अकादमिक अभिरुचि व परिश्रम की पराकाष्ठा के लिए जाने जाते हैं।

2004 से 2006 के बीच मैंने भी जबलपुर हाईकोर्ट में वकालत करने की जोर आजमाइश की,श्रद्धेय एनएस काले के सानिध्य में। काले साहब सबक में अक्सर जस्टिस मिश्रा के फैसले पढ़ने व समझने को देते थे। जस्टिस मिश्र की अँग्रेजी इतनी उत्कृष्ट और क्लासिक थी कि बिना डिक्शनरी के सहारे दूसरी से तीसरी लाईन तक बढा नहीं जा सकता था। बहस की बात तो दूर जस्टिस मिश्रा की कोर्ट में केस का पासओवर लेने के लिए भी काफी हिम्मत जुटानी पड़ती थी। जस्टिस मिश्रा का बौद्धिक आभामंडल इतना जबरदस्त था कि नामी से नामी वकील भी गंभीर तैयारी करके जाते थे।
जस्टिस मिश्र का न्याय की सर्वोच्च आसंदी तक पहुँचना हम मध्यप्रदेशवासियों के लिए भी गर्व का विषय है। इससे पहले मध्यप्रदेश से जस्टिस हिदायतुल्लाह साहब और जस्टिस जेएस वर्मा साहब जैसे महान न्यायविद यहां तक पहुंचे और नए मापदंड कायम किए।

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