24 मई को होगी आशा एवं सहयोगियों का राष्ट्रव्यापी हडताल

अपनी और अपने परिवार की जान जोखिम में डालकर कोविड महामारी का संक्रमण को रोकने के लिये काम कर रही देश भर में आशा एवं सहयोगी  24 मई को राष्ट्रव्यापी हडताल पर रहेंगे। आशा एवं सहयोगियों को कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम वेतन, भविष्य निधि, पेंशन सहित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिये जाने के अतिरिक्त के अतिरिक्त कोविड महामारी के खिलाफ अभियान के लिये पर्याप्त मात्रा में मास्क, सैनिटराईजर, ग्लब्स आदि सुरक्षा उपकरण देने के अलावा सरकारी अस्पतालों को मजबूत करने, अस्पतालों बिस्तर, वेंन्टीलेटर, आक्सीजन, जरूरी दवाओं के साथ पर्याप्त संख्या में डाक्टर, नर्स, पारामेडिकल स्टाफ आदि की व्यास्था करने के साथ दवाओं की कालाबजारी और नकली दवाओं पर रोक लगाने की मांग भी शामिल है।

देश में आशा एवं सहयोगियों का प्रमुख संगठन  च्च् अ.भा.आशा वर्कर्स कोर्डिनेशन कमेटी  ज्ज्ने 10 मई को देश भर में काला दिवस मनाते हुये ज्ञापन सौंप कर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मांगों पर तत्काल कार्यवाही करने, अन्यथा 24 मई को एक दिवसीय राष्टव्यापी हडताल पर जाने की चेतावनी दिये थे। सरकार द्वारा कोई कदम नही उइाये जाने के चलते 24 मई को आशा एवं आशा एवं सहयोगी 24 मई को हडताल पर रहेगी। उल्लेखनीय है कि 12 अप्रैल 2005 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की स्थापना के साथ देश में मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु को रोकने के लिये आशाओं के माध्यम से सघन अभियान चलाने के साथ गामीण व शहरी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने व विस्तार देने का काम आशाओं के माध्यम से हुयी। मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु की दर को कम करने में कामयाबी तो मिली, लेकिन गरीबी और कुपोषण को रोकने, लचर स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिये सरकार कदम उठाते तो स्थिति और बेहत्तर हो सकती थी। इस उपलब्धी का पूरा श्रेय एन.एच.एम. में जमीनी स्तर पर काम कर रही आशा एवं सहयोगियों को जाता है।

महामारी के मुकाबले में मैदान में  केवल आशा व सहयोगी

कोरोना महामारी का संक्रमण की भयानक स्थिति में सरकार ने लगातार लॉक डाउन लगाया, तब मैदान में घर घर जाकर संक्रमण का पता लगाने, संक्रमितों का इलाज कराने का काम आशाओं ने अपनी और अपने परिवार की जिन्द्रगी को जोखिम में डाल कर किया। तब 6 आशाओं की मृम्यु हुयी लेकिन सरकार ने उनके परिवार को घोषित बीमा राशि तक नही दिया। कोरोना के दूसरा और खतरनाक लहर में भी मैदान में आशायें है, कहीं उनके साथ अन्य कर्मी भी रहते है। पिछले 15 वर्षों में आशाओं के बीच में लगातार काम करने के चलते स्वास्थ्य के क्षेत्र में भरोसेमंद कर्मचारी के रूप में आशाओं ने जनता के दिल में स्थान बनाया है। अब सरकार की वैक्सीनेशन में भी आशायें ड्यूटी दे रही है। सरकार की गलत नीतियों से चरमरायी चिकित्सा व्यवस्था, सरकार की घोर उपेक्षा, दवाओं व आक्सीजन के अभाव चलते आम जनता की बडी संख्या में मृत्यु की घटनाओं, ठीक उसी वक्तमें  आक्सीजन व दवाओं की कालाबाजारी की स्थिति में अपने क्षेत्र के लोगों को चिकित्सा मुहैया कराने में आशायें असफल रही। कोरोना के खिलाफ प्रदेश भर में आशाओं का घर घर सर्वै अभी भी जारी है।

आशा व सहयोगी का प्रदेश में सबसे कम वेतन- और सबसे अधिक शोषण

प्रदेश की स्वास्थ्य क्षेत्र में आशाओं का महत्वपूर्ण भूमिका है इसे सम्बन्धित लोग जानते है और स्वीकार भी करते है। प्रदेश में आशाओं को 2000 रुपये वेतन(निशिचत प्रोत्सहन राशि) मिलती है। कोविड अभियान के लिये 1000 रु. (अगला आदेश तक के लिये) अलग मिलती है। इसमें राज्य सरकार का कोई योगदान नही। यह तुच्छ राशि भी महीनों के बाद देते है। भीषण मंहगाई में इस मामूली वेतन के चलते प्रदेश की आशायें आर्थिक तंगी और तनाव से गुजर रही है इसके बावजूद सरकार आशाओं के प्रति अभी मौन साधे हुये है। अधिकांश राज्य सरकारें अपनी ओर से वेतन देकर आशा एवं सहयोगियों को राहत दे रहे है, लेकिन शिवराज सरकार वेतन बढाने के बजाय आशाओं का शोषण लगातार बढा रही है। 

हडताल की मांगें :- हडताल की प्रमुख मांगों में राज्य सरकार की ओर से तत्काल अतिरिक्त वेतन देने, आशा एवं सहयोगियों को कर्मचारी का दर्जा व आशा को 21,000 व सहयेगी को 30,000 रु.यूनतम वेतन एवं सेवा निवृत्ति पर10000 रु पेंशन देने, कोविड के खिलाफ अभियान के दौरान मृत आशाओं के परिवार को 50 लाख का  राशि देने, कोरोना योद्धाओं के बीमा को कोविड के रहने तक जारी रखने, अंग्रिम पंक्ति के सभी कर्मियों को सुरक्षा उपकरण देने, कोविड अभियान के लिये  च्च्विशेष जोखिम भत्ता  ज्ज् देने, सरकारी अस्पतालों को मजबूत करने व पर्याप्त बेड, वैन्टीलेटर, आक्स्ीजन, दवाईयों के अलावा डाक्टर, नर्स,, पेरमेडिकल स्टाफ आदि का पार्यप्त संख्या में निुक्त करने, स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण रोक कर जनता की लूट बंद करने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिये सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत आवंटित करने की मांगे प्रमुख है। आशा ऊषा आशा सहयोगी एकता यूनियन सीटू म.प्र.(सीटू)ने सभी आशा एवं आशा सहयोगियों से 24 मई को हडताल सफल बनाने की अपील की है।

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