1967 की कांग्रेस सरकार की तरह कमलनाथ सरकार फंसी, कटौती प्रस्तावों पर परीक्षा

कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में जिस तरह से विधायकों के पार्टी छोड़कर भागने की खबरें चल रही है, उससे मध्यप्रदेश में भी पार्टी में घबराहट देखी जा रही है। ऐसे में वर्तमान में चल रहे विधानसभा के मानसून सत्र में बजट पारित करना सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है। सरकार वर्ष 2019-20 के बजट को पारित कराने के लिए मांग और कटौती प्रस्ताव के दौरान अपने सभी सदस्यों की उपस्थिति को सुनिश्चित करना चाहती है। इसके लिए कांग्रेस विधायक दल की एक और बैठक 17 जुलाई को होने जा रही है जिसमें सदस्यों की सदन में उपस्थिति को लेकर ‘व्हिप” जारी की जा सकती है।

1967 गैर कांग्रेसवाद के राम मनोहर लोहिया के प्रयासों के तहत देशभर में संविद सरकारों की कोशिशें हुई। मध्यप्रदेश में भी विजयाराजे सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर जनसंघ का दामन थामा और लोकसभा चुनाव में जीतीं लेकिन कुछ दिन बाद ही इस्तीफा देकर चौथी विधानसभा में सदस्य बनीं। उनके प्रयासों से तत्कालीन कांग्रेस सरकार को बजट के दौरान शिक्षा विभाग की मांग और कटौती प्रस्ताव के दौरान संकट का ऐसा सामना करना पड़ा कि सरकार ही चली गई। तब गोविंद नारायण सिंह संविद सरकार में मुख्यमंत्री बने और विजयाराजे सिंधिया ने मुख्यमंत्रित्व पद स्वीकारना ठीक नहीं समझा। ठीक वैसी ही स्थिति में मध्यप्रदेश में इस समय कमलनाथ सरकार को लेकर बताई जा रही है। जबकि कमलनाथ सरकार के पास 121 विधायकों का बहुमत वाला समर्थन है। फिर भी छह विधायक बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और निर्दलीय के होने से कांग्रेस सरकार बैसाखी के सहारे मानी जा रही है। वहीं, भाजपा भी विधानसभा के अंदर और बाहर बार-बार कमलनाथ सरकार को अल्पमत की सरकार बता रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस अपनी सरकार बनने के बाद से ही पूरे पांच साल चलने का दावे कर रही है। फिर भी कभी सदन के भीतर बहुमत लायक उपस्थिति बनाए रखने के लिए पार्टी नेतृत्व हर विधानसभा सत्र के पहले सभी विधायकों को प्रतिदिन सदन में उपस्थिति रहने की सलाह देता है। पावस सत्र में सरकार के वर्ष 2019-20 के बजट पर अभी सामान्य चर्चा हुई है और 17 जुलाई के बाद से बजट में हर विभाग की मांग और कटौती प्रस्ताव आएंगे। संसदीय जानकारों का कहना है कि कमलनाथ सरकार के लिए विपक्ष हर विभाग के मांग और कटौती प्रस्ताव पर मत विभाजन कराकर उसके सामने परेशानियां पैदा कर सकती है। दूसरी तरफ, सूत्रों बताते हैं कि कांग्रेस, विपक्ष की हर कोशिशों को नाकामब करने के लिए विधायकों को प्रतिदिन सदन में उपस्थित रहने की बाध्यता के लिए ‘व्हिप” जारी करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

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