13 साल की नौकरी में 25 तबादलों को लेकर प्रधानमंत्री ने माँगे शिवराज सरकार से दस्तावेज

मध्य प्रदेश के राजगढ़ की ब्यावरा तहसीलदार ने बीते महीने 13 साल की नौकरी में 25 तबादलों से परेशान होकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ट्वीट कर न्याय की गुहार लगाई थी। तहसीलदार अमिता सिंह तोमर ने प्रधानमंत्री को इस मामले पर एक पत्र भी लिखा था। जिसके बाद से प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों में खलबली मच गई थी। उनके पत्र को पीएमओ द्वारा गंभीरता से लेते हुए इस बारे में मुख्य सचिव से दस्तावेज मांगे गए हैं।  12 जुलाई को ब्यावरा तहसीलदार अमिता सिंह तोमर का स्थानांतरण 800 किमी दूर सीधी किया गया था, जिसपर उन्होंने प्रधानमंत्री को किए ट्वीट और प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर इस पूरे मामले से अवगत करवाया था। उन्होंने पीएम मादी को पत्र में लिखा था कि उन्हें इमानदारी से काम नहीं करने दिया जा रहा है। इसलिए उनका तबादला कर दिया जाता है। इसलिए उन्होंने कार्रवाई की मांग की थी। इस पत्र के जवाब में 24 जुलाई को पीएमओ कार्यालय के सेक्शन ऑफिसर कुमार शैलेंद्र ने मुख्य सचिव मप्र शासन को पत्र लिखा है।
पीएमओ की ओर से भेजे गए पत्र की एक कॉपी अमिता को 4 अगस्त को प्राप्त हुई है। जिसमें लिखा है कि उनके तबादले से संबंधित सभी दस्तावेजों को प्रधानमंत्री कार्यलय में भेजा जाए। 13 साल की सर्विस में 25 वां ट्रांसफर  तहसीलदार श्रीमती सिंह अपनी कार्यशैली को लेकर अक्सर चर्चा में रहीं हैं। 14 साल की नौकरी में उन्हें 9 जिलों व 25 जगहों पर पदस्थ किया गया। श्रीमती सिंह के मुताबिक उनका ट्रांसफर बीते महीने 800 किमी दूर सीधी जिले में किया गया। पहले भी कई बार उनका तबादला 500 किमी दूर किया गया था। उन्हें पहले दतिया से 500 किमी दूर सीहोर, फिर भिंड, देवास, श्योपुर, उज्जैन, रतलाम, राजगढ़ और अब सीधी पदस्थ किया है।
प्रमुख सचिव को पत्र में ये लिखा था मेरे खिलाफ न कोई शिकायत आई न लेन-देन व भ्रष्टाचार के आरोप लगे. न मेरे कार्यकाल में फाइलें पेंडिंग है, बल्कि राजस्व व बैंक वसूली में राज्य में बेहतर प्रदर्शन रहा. हर वर्ष सीआर बेहतर रहती है. सिंहस्थ में कई प्रमाण-पत्र मिले, सैकड़ों पुरस्कार व मेडल मिले. हाल ही में ब्यावरा में जरूर कुछ रसूखदारों के अतिक्रमण हटाने का काम किया था. क्या यही मुझे इतनी दूर भेजने की वजह है…?
पहले कहते थे KBC वाली मैडम, अब ट्रांसफर वाली मैडम
अमिता सिंह कहती है जब  मैंने कौन बनेगा करोड़पति में 50 लाख रू जीते थे, तब से लोग मुझे केबीसी वाली मैडम कहते थे, लेकिन बार-बार हो रहे तबादलों के कारण मुझे ट्रांसफर वाली मैडम कहा जाने लगा. मुझे मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है. अधिकांश तहसीलदारों की पूरी नौकरी 2-4 जिलों में ही पूरी हो जाती है, लेकिन यहां पर मेरा तो 13 साल में 25 तहसीलों में ट्रांसफर कर दिया गया.

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